युवाओं के नाम बहन जी का संदेश!
मेरठ की घटना का संज्ञान लेते हुए माननीया बहन जी ने आज एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की, जहाँ उन्होंने दलित समुदाय के युवाओं को संदेश देते हुए कहा कि हमें बाबासाहेब डॉ. आम्बेडकर के दिखाए रास्ते पर चलना चाहिए। अपने ऊपर होने वाले किसी भी जुल्म-ज्यादती के विरुद्ध लड़ाई, कानून को हाथ में लेकर नहीं, बल्कि कानून के दायरे में रहकर लड़नी चाहिए।
न्याय के नाम पर हिंसा, हंगामा या सड़क जाम जैसा बवाल करने से पीड़ितों को न्याय मिलने वाला नहीं है; बल्कि इससे समाज के लोगों की मुसीबतें और परेशानियां और अधिक बढ़ जाती हैं। बहन जी ने स्पष्ट कहा कि न्याय के लिए समाज को बाबासाहेब के लिखित संविधान के अनुसार चलना चाहिए और जिला न्यायालय, उच्च न्यायालय एवं सर्वोच्च न्यायालय सहित अन्य कानूनी तरीकों का सहारा लेना चाहिए।
अब इस पर चंद्रशेखर आज़ाद का कहना है कि कोर्ट-कचहरी से न्याय पाने में तो 10-10 साल लग जाएंगे, तब तक क्या हमारी बहन-बेटियों की इज्जत लुटती रहे और हम चुप बैठे रहें? दुनिया को छोड़िए, चंद्रशेखर आजाद पर खुद 36 मुकदमे दर्ज हैं। क्या उन्होंने अपने मामले में तत्काल इंसाफ दिलवा दिया? नहीं, क्योंकि कानून की प्रक्रिया के तहत सबको चलना ही पड़ता है।
चंद्रशेखर के इस बयान के बाद बहुत से लोग बहन जी को टारगेट कर रहे हैं। दरअसल, डायलॉगबाजी करने और नए लड़कों को खुश करने के लिए चंद्रशेखर का कहना सही लग सकता है, लेकिन आप ज़रा अपने विवेक का इस्तेमाल करके बताइए कि जिस भी घटना पर चंद्रशेखर जाते हैं, क्या वे उन परिवारों को तत्काल न्याय दिला पाते हैं? क्या वे कोई जज हैं जो ऑन-द-स्पॉट फैसला सुना देंगे? सहारनपुर, आजमगढ़, प्रयागराज, हरदोई, हाथरस... चंद्रशेखर आज़ाद ने इनमें से किस जगह पर तत्काल न्याय दिला दिया?
बहन जी ने चार-चार बार सरकार चलाई है, उन्हें अच्छी तरह पता है कि शासन और प्रशासन कैसे काम करता है। इसे छोड़िए, कोई भी व्यक्ति जो कानून की थोड़ी भी समझ रखता है, उसे पता होगा कि FIR होने के बाद पुलिस का इन्वेस्टिगेशन ऑफिसर (IO) विवेचना करता है, चार्जशीट दाखिल होती है, फिर सालों तक कोर्ट में तारीख पर तारीख चलती है और तब जाकर कोई फैसला आता है। अब वहाँ चाहे चंद्रशेखर जाएं या राहुल गांधी, कोर्ट की न्यायिक प्रक्रिया में सालों-साल तो लगते ही हैं।
हाँ, यह अलग बात है कि यदि आप सत्ता में हैं, तो फास्ट-ट्रैक कोर्ट का गठन करके एक तय समय-सीमा के भीतर न्याय सुनिश्चित किया जा सकता है। पर इसके लिए तो सत्ता चाहिए! इसीलिए बहन जी ने समाज के युवाओं को संदेश दिया कि अगर अपने ऊपर हो रहे जुल्म-ज्यादती को हमेशा के लिए रोकना है, तो उन्हें केंद्र व राज्यों की राजनीतिक सत्ता की 'मास्टर चाबी' खुद अपने हाथों में लेनी होगी।
अब कुछ साथियों की यह भी नाराजगी है कि बहन जी ने मेरठ के SSP अविनाश पांडेय के खिलाफ सीधा कुछ क्यों नहीं बोला। देखो भाई, बहन जी चार बार देश के सबसे बड़े सूबे की मुख्यमंत्री रही हैं, उनका राजनीतिक कद बहुत बड़ा है। मुझे नहीं लगता कि उन्हें अविनाश पांडेय जैसे किसी अदने और गालीबाज़ अफसर का नाम लेकर अपने स्तर को नीचे गिराना चाहिए। वैसे भी आप बहन जी का ट्रैक रिकॉर्ड उठाकर देख लीजिए, वह भाषणबाज़ी नहीं करतीं, सीधा एक्शन लेती हैं। उनकी सरकार के दौरान IG, DIG और DGP रैंक के बड़े-बड़े अफसरों में इतनी हिम्मत नहीं होती थी कि वे कानून और संविधान को धता बता सकें, फिर अविनाश पांडेय की क्या बिसात! उसके लिए तो हम लोग ही काफी हैं।
बाकी, ऐसे जातिवादी अफसरों को बल सत्ता के संरक्षण से मिलता है। अतः अगर समाज सच में अविनाश पांडेय के कृत्य से आहत है, तो भाजपा सरकार को इसका जवाब अपने वोट से दीजिए। लोकतंत्र में असली और सबसे गहरी चोट 'वोट की चोट' ही होती है। कुल मिलाकर बात यह है कि बहन जी ने समाज के युवाओं को जो संदेश दिया है, उस पर गंभीरता से अमल करें। वह बहुजन समाज की असली संरक्षक और मार्गदर्शक हैं।
संविधान विरोधी ताकतें हमेशा बहुजन समाज को सड़कों पर उलझाकर उनके भविष्य को मुकदमों के दलदल में धकेलना चाहती हैं। भावुकता में आकर सड़कों पर हुड़दंग करने से केवल हमारे युवाओं का करियर बर्बाद होगा, न्याय नहीं मिलेगा। इसलिए, इस सामंती व्यवस्था को नेस्तनाबूद करने के लिए जोश के साथ होश रखिए और बहन जी के नेतृत्व में 'वोट की ताकत' से अपनी खुद की हुक्मरानी स्थापित कीजिए।
इंजीनियरिंग, जवाबदेही और पारदर्शिता के बिना बनाये जा रहे देश के हाईवेज संकट में हैं। इन हाईवे के निर्माण की कीमतें देश की जनता चुका रही है। पढ़िए विश्लेषण।
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मध्य प्रदेश इस देश के सबसे बदहाल राज्यों में से एक बन चुका है, और ऐसी सरकार को हराना कोई मुश्किल काम नहीं है। कांग्रेस को सिर्फ आदिवासी वोटों को मजबूत तरीके से अपने पक्ष में जोड़ने की जरूरत है, बाकी समर्थन पहले से मौजूद है और समय के साथ और भी बढ़ेगा।
मध्य प्रदेश में आदिवासी समाज के बीच संगठन को मजबूत करने और प्रभावी नेतृत्व देने के लिए एक सशक्त ट्राइबल प्रभारी की सबसे अधिक आवश्यकता है @RahulGandhi@INCMP
केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने बयान जारी जारी कर कहा 'सतलुज" को OTT से हटाने में केंद्र सरकार का कोई योगदान नही है.
बिट्टू साहब का कहना है OTT कंपनी अपने व्यावसायिक फैसले खुद लेते हैं. मंत्री साहब की यह बात लोगों के गले नही उतर रही है.
जिस फ़िल्म को बनाने में करोड़ो रुपया लग गया, समय मेहनत और इमोशन लगा, भला OTT प्लेटफार्म और फ़िल्म मेकर्स अपना खुद का नुकसान क्यों करेंगे.
दूसरी सबसे अहम बात ये है, रवनीत सिंह बिट्टू साहब को दिलजीत दोसांझ से ज्यादा दिक्कत लग रही, कहते हैं दिलजीत दोसांझ पैसों के लिए ऐसे विवादित प्रोजेक्ट चुनता है, और चमकीला को चमकीला जी बोलता है ?
रवनीत सिंह बिट्टू के अनुसार दलित समाज के चमकीला अश्लील गाना आते था इसलिए जी लगा कर नही बोलना चाहिए. अब बात अश्लीलता की है या जाति की है, रवनीत बिट्टू की अपने मन के अंदर की बात बता सकते हैं
यह मानसिक गुलाम है जा0हिल महिलाएं हैं जो कभी नहीं सुधर सकती।
शायद अपने पति और सास ससुर के कभी घुटने भी नहीं छुए होगी पैर छूना तो बहुत दूर की बात रही।
लेकिन इस 2 फुट के लौंडे के आगे जमीन पर लेट रही हैं नतमस्तक होकर जमीन चाट रही है जा0हिल।
इनकी यह जहि0लियत और मानसिक गुलामी ही इनकी और इनके परिवार के आर्थिक व सामाजिक शोषण व सामाजिक अपमान का कारण है।
ये तो मैं पक्का दावा कर सकता हूं कि यह सब पिछड़े दलित समाज के संपन्न घरों की ही जा 0हिल महिलाएं होंगी।
2022 में श्रीलंका की अर्थव्यवस्था चौपट हो गयी. दूध और अंडा चांदी के भाव मिलने लगा. सत्ता परिवर्तन के बाद नई सरकार ने श्रीलंका की अर्थव्यवस्था को दुबारा मजबूत किया.
बौद्ध भूमि श्रीलंका एक बार फिर World Bank के Upper Middle Income श्रेणी में पहुंच गया.
भारत अभी भी Lower Middle इनकम4 श्रेणी में फंसा हुआ है. नेता, बाबा, उद्योगपति और ब्यूरोक्रेट्स लक्ज़री लाइफ जी रहे हैं. युवा 15,000 के लिए 15-15 घंटे काम कर रहे हैं.
भारत की प्रति व्यक्ति आय 2700 डॉलर आंकी गई है. जबकि की Upper Middle Income श्रेणी में आने के लिए 4,496 से अधिक होनी चाहिए.
श्रीलंका के अलावा वियतनाम ने भी Upper Middle Income श्रेणी में जगह बनाई है.
नोएडा में फ्रेंडशिप के नाम पर लूट करने वाले शातिर गिरोह निधि यादव, प्रियंका यादव और रिया यादव को गिरफ्तार किया गया है।
ये अपने साथियों ओमवीर यादव, मंगेश यादव, पंकज यादव के साथ मिलकर सोशल मीडिया पर युवाओं को फंसाकर मिलने को बुलाते थे फिर लूटपाट करके मारपीट करके भगा देते थे।
सावधान रहें, सतर्क रहें!