गाजीपुर के किसानों ने मक्के के खेत में जननायक आदरणीय श्री अखिलेश यादव जी की तस्वीर के माध्यम से PDA के प्रति अपने स्नेह, विश्वास और प्रतिबद्धता को अभिव्यक्त किया है।
यह केवल एक तस्वीर नहीं, बल्कि महिलाओं, किसानों, युवाओं, पिछ���़ों, दलितों, अल्पसंख्यकों और वंचित वर्गों की आशाओं, आकांक्षाओं और सामाजिक न्याय के संकल्प का प्रतीक है।
जन्मदिन की बहुत-बहुत बधाई @yadavakhilesh जी।
PDA की हिस्सेदारी से सामाजिक न्याय का संकल्प हम मिल कर पूरा करेंगे। अच्छे स्वास्थ्य और खुशहाल जीवन के लिए शुभकामनाएं।
संघर्ष, संवेदना और समाजवादी विचारधारा के प्रतिबद्ध प्रहरी, करोड़ों युवाओं, किसानों, गरीबों, पिछड़ों, दलितों, अल्पसंख्यक��ं एवं वंचित समाज की उम्मीदों के केंद्र, समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव जी को जन्मदिवस की हार्दिक बधाई एवं अनंत शुभकामनाएँ।
आपके नेतृत्व में सामाजिक न्याय, संविधान की रक्षा, लोकतांत्रिक मूल्यों और PDA की साझी ताकत का आंदोलन निरंतर मजबूत हो रहा है। जनहित, विकास और समावेशी राजनीति के प्रति आपकी प्रतिबद्धता प्रदेश की जनता के लिए विश्वास और परिवर्तन का आधार बनी हुई है।
ईश्वर से प्रार्थना है कि आपको उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु, यश एवं असीम ऊर्जा प्रदान करें, ताकि आप सदैव इसी समर्पण के साथ जनसेवा करते हुए उत्तर प्रदेश को प्रगति, समृद्धि और सामाजिक न्य��य के पथ पर अग्रसर करते रहें।
जन्मदिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ एवं उज्ज्वल भविष्य के लिए मंगलकामनाएँ।
समाजवादी पार्टी के प्रमुख एवं उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री तथा वर्तमान में सपा सांसद श्री अखिलेश यादव जी को आज उनके जन्मदिन पर उन्हें व उनके परिवार वालों को हार्दिक बधाई एवं उनके अच्छे जीवन व लम्बी उम्र की शुभका��नायें।
उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव जी को जन्मदिन की हार्दिक बधाई।
प्रभु श्री राम से आपके लिए आरोग्यता और दीर्घायु की प्रार्थना है।
@yadavakhilesh
@Uppolice@ayodhya_police श्रीमान जी maushivala रोड निकट अहिरान का पुरवा के पास माइनर की सफाई का कार्य चल रहा है जिसमें अंधाधुन बालू की खुदाई सफाई के नाम पर हो रही है क्या सिंचाई विभाग को यह बात अवगत है की जो मिट्टी खुदाई हो रही है यह जा कहां रही है कृपया उचित कार्रवाई की जाएं
सम��्त विश्व में भगवान राम के उपासकों के लिए ये एक बेहद संवेदनशील समाचार है कि ‘राम मंदिर’ के चढ़ावे की करोड़ों की रकम गायब पायी गई है।
ये मंदिर ट्रस्ट के लिए अत्यंत शर्मनाक स्थिति है। कोई भी सफ़ाई देने के लिए सामने नहीं आना चाहता है।
न्यायालय से स्वतः संज्ञान लेने की माँग है क्योंकि इसका सीधा संबंध वैश्विक स्तर पर समस्त सनातनी समाज की प्रभु राम में गहरी आस्था से जुड़ा है।
सरकार की चुप्पी स���दिग्ध है।
कांग्रेस पार्टी की वरिष्ठ नेता श्रीमती सोनिया गांधी जी को आज उनके 79वें जन्मदिन पर हार्दिक बधाई एवं उनकी अच्छी सेहत के साथ लम्बी उम्र की शुभकामनायें। उनके परिवार के सभी सदस्यों व उनके अनुयाइयों को भी आज के दिन की हार्दिक बधाई।
मेरे सम्मानित प्रदेश वासियों,
उत्तर प्रदेश की सुरक्षा, सामाजिक संतुलन और सुदृढ़ कानून-व्यवस्था हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। प्रदेश में अवैध रूप से रह रहे रोहिंग्या एवं बांग्लादेशी घुसपैठियों के विरुद्ध सख्त और निर्णायक कार्रवाई प्रारम्भ की गई है।
मैं प्रदेश की जागरूक जनता से अपील करता हूं कि सतर्क रहे और घरेलू अथवा व्यावसायिक कार्यों में किसी भी व्यक्ति को नियोजित करने से पूर्व उसकी पहचान अवश्य सुनिश्चित करे।
प्रदेश की सुरक्षा हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है क्योंकि सुरक्षा ही समृद्धि का आधार है।
आज श्रद्धेय नेताजी की तीसरी पुण्यतिथि है। आदरणीय नेताजी की पावन स्मृतियों को नमन करता हूँ। विनम्र श्रद्धांजलि।
तीन वर्ष हो गए, लेकिन आज भी इस पर भरोसा नहीं होता कि नेताजी हमारे बच नहीं हैं। मैं ��न्हें हर रोज़ अपने पास अपने बीच पाता हूँ। मगर हक़ीक़त ये है कि नेताजी हमारे बीच नहीं हैं। तीन साल आज हो गये। आज भी उनकी कमी हर समाजवादी के जीवन, हर किसान के आँगन और हर नौजवान के सपनों में महसूस होती है। नेताजी सिर्फ़ एक नेता नहीं थे, बल्कि भारत की राजनीति के उस दौर के प्रतीक थे जब खेत-खलिहान की आवाज़ सड़क से लेकर संसद में गूंजती थी। वे ऐसे जननेता थे, जिन्होंने सत्ता को साधन बनाया, साध्य नहीं; जिन्���ोंने राजनीति को जनता की सेवा और सामाजिक न्याय का ज़रिया माना।
आदरणीय नेताजी का क़द किसी पद या सत्ता से नहीं नापा जा सकता। वे उस भारत का चेहरा थे, जहाँ किसान को सम्मान मिलता था, मज़दूर को अधिकार, और गरीब को न्याय। उन्होंने सत्ता की सीढ़ियाँ संघर्ष से चढ़ीं, न कि किसी समझौते या पूँजी की ताक़त से। जब उन्होंने समाजवाद को अपनाया, तो वह केवल विचार नहीं था; वह एक जीवन दर्शन था, जिसमें सबको साथ लेकर चलने की आस्था थी। नेताजी आज भी किसानों, नौजवानों के संघर्ष के प्रतीक के तौर पर याद किए जाते हैं। इंसाफ़ और इंसानियत की हर लड़ाई नेताजी के स्वप्न और संघर्षों को अपने भीतर साँस लेते हुए महसूस करती है।
आज जब देश संविधानिक मूल्यों पर संकट से गुजर रहा है, जब लोकतंत्र की आत्मा को भय और विभाजन से बाँटने की कोशिश हो रही है, तो नेताजी की याद और भी ज़्यादा जरूरी लगती ���ै। अगर आज नेताजी हमारे बीच होते, तो वे किसानों की सूनी आँखों में उम्मीद भरते, नौजवानों के दिलों में भरोसा जगाते। आदरणीय नेताजी के दिखाए रास्ते पर ही मेरे जैसे लाखों कार्यकर्ता चलने की कोशिश कर रहे हैं। मैं आज भी सदन में खड़ा होकर बोलना शुरू करता हूँ, तो हर बार पहले शब्द में ही नेताजी याद आते हैं। गोया मेरे आगे वाली सीट पर बैठे हों और मेरी तरफ़ देखकर हिम्मत दे रहे हों कि समाजवाद का परचम बुलंद रख���।
नेताजी की राजनीति सत्ता ��ाने की नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने की राजनीति थी। उन्होंने हर बार अपने विरोधियों के लिए भी दरवाज़ा खुला रखा, क्योंकि वे जानते थे कि लोकतंत्र संवाद से चलता है, अहंकार से नहीं। उनका सादा रहन-सहन, ज़मीन से जुड़ा व्यवहार और जनता से गहरा रिश्ता, आज की राजनीति में दुर्लभ हो गया है। उनकी अनुपस्थिति सिर्फ़ एक व्यक्ति की कमी नहीं, बल्कि एक युग की अनुपस्थिति है, एक ऐसे युग की, जहाँ नेता जनता के घर में बैठता था, और जनता नेता के दिल में रहती थी।
तीन साल से नेताजी हमारे बीच नहीं हैं, पर उनकी आत्मा हर समाजवादी के संघर्ष में जीवित है। जब कोई किसान अपने अधिकार के लिए सड़कों पर उतरता है, जब कोई नौजवान बेरोज़गारी के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाता है, जब कोई विद्यार्थी संविधान की रक्षा की बात करता है, वहाँ कहीं न कहीं नेताजी की आत्मा साथ खड़ी होती है। उनकी मुस्कान, उनका स्नेह, उनकी फटकार, उनका विश्वास, सब याद आता है।
���ज हम, समाजवादी कार्यकर्ता, अखिलेश यादव जी के नेतृत्व में नेताजी के अधूरे सपनों को पूरा करने के लिए फिर एक बार संकल्प लेते हैं। नेताजी का सपना सिर्फ़ ��पा की मजबूती का नहीं था, बल्कि भारत के हर गाँव में न्याय और समानता की मशाल जलाने का था। उनकी विरासत हमें सिखाती है कि संघर्ष से डरना नहीं चाहिए, क्योंकि समाजवाद किसी किताब का अध्याय नहीं, बल्कि हर उस गरीब के दिल की धड़कन है जो अपने हक़ के लिए खड़ा होता है। आदरणीय अखिलेश यादव जी ने नेताजी की सीख, संघर्ष और स्वप्न को आगे बढ़ाया है। संविधान और समाजवाद की रक्षा करते हुए पार्टी को देश की तीसरी सबसे बड़ी राजनीतिक ताक़त बनाया है। यह केवल एक संगठनात्मक उपलब्धि नहीं, बल्कि नेताजी की विचारधारा की नैतिक जीत है।
यह हमारी ज़िम्मेदारी है कि समाजवादी पार्टी को राष्ट्रीय पार्टी बनाकर नेताजी के स्वप्न को साकार करें ताकि दिल्ली से लेकर गाँव की चौपाल तक, समाजवाद की आवाज़ गूँजे, न्याय और बराबरी की बात उठे। नेताजी भले आज हमारे बीच शारीरिक रूप से नहीं हैं, पर उनका व्यक्तित्व हमारे भीतर है, उनकी आत्मा ��मारे संघर्ष में है, और उनका सपना हमारे भविष्य का रास्ता है।
श्रद्धेय नेताजी अमर रहें
जय समाजवाद, जय संविधान
Wishing a very happy birthday to the people's leader, the voice of the poor, my guiding light — Shri @laluprasadrjd ji.
You’re not just my father, you are a movement that inspires justice, courage, and change.
Carrying forward your ideology is not just my responsibility, it is my dharma.
#TejPratapYadav
🙏🌱
#HappyBirthdayLaluJi #PeopleLeader #RJD #LegacyContinues
जो परिवेश , परंपरा , परिवार और परवरिश की मर्यादा का ख्याल रखते हैं , उन पर कभी सवाल नहीं उठते हैं , जो अपना विवेक त्याग कर मर्यादित आचरण व् परिवार की प्रतिष्ठा की सीमा को बारम्बार लांघने की गलती - धृष्टता करते हैं, वो खुद को आलोचना का पात्र खुद ही बनाते हैं ..
हमारे लिए पापा देवतुल्य हैं , परिवार हमारा मंदिर व् गौरव और पापा के अथक प्रयासों - संघर्षों से खड़ी की गयी पार्टी व् सामाजिक न्���ाय की अवधारणा हमारी पूजा .. इन तीनों की प्रतिष्ठा पर किसी की वजह से कोई आंच आए ये हमें कदापि स्वीकार्य नहीं ..
हमारे 17 लोग शहीद हो गए और प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण में पुंछ का नाम तक नहीं लिया.
हमें राहुल गांधी से उम्मीद है कि वो हमारी आवाज बुलंद करेंगे.
- आज राहुल गांध��� पुंछ पहुंचे हैं, वहां एक आदमी ने ये बात कही
आगरा के एक अस्पताल में महात्मा बुद्ध और बाबासाहेब अंबेडकर जी चित्रित टाइल्स को फर्श पर लगाना एक ऐसा अपमानजनक कुकृत्य है जिसकी जितनी निंदा की जाए कम है। कभी बाबासाहेब निर्मित संविधान बदलने की साज़िश, कभी मप्र में कोर्ट परिसर में उनकी मूर्ति लगाने का विरोध और कभी ज़मीनी टाइल्स पर उनका चित्रण एक सोची-समझी चाल है, जिसके पीछे प्रभुत्ववादियों का कौन सा गुट काम कर रहा है कहने की आवश्यकता नहीं है।
जैसे-जैसे पीडीए की चे��ना बढ़ रही है, वैसे-वैसे पीडीए के प्रेरणास्रोत प्रतीकों व महापुरुषों पर और साथ ही पीडीए समाज पर वर्चस्ववादियों के शारीरिक-मानसिक प्रहार भी बढ़ रहे हैं। ऐसे सुनियोजित अपमान करके जिनको लग रहा है कि पीडीए का मनोबल टूटेगा वो ऐतिहासिक भूल कर रहे हैं। प्रताड़ना का प्रतिकार शक्ति बन कर उभरता है। उत्पीड़न की भी एक सीमा होती और उत्पीड़क की भी। अब भाजपा वो सीमा लाँघ चुकी है और अपने पतन को देखते हुए ऐ��े कुत्सित-कृत्यों से पीडीए की हिम्मत और एकजुटता को तोड़ने का अंतिम प्रयास कर रही है, जिसमें अब वो कभी सफल नहीं होगी।