इसमें क्रिएटर और देखने वाले दोनों की ही भूमिका है
पहले थोड़ा स्वाद चखाओ जब डिमांड बढ़े लेवल बढ़ाओ ये चल रहा है , पुरानी मूवी में ग्लैमर का मतलब और आज की डेफिनिशन अलग है
.... घर आंगन ही देख लो 10 साल पहले बिना दुपट्टा लिए लड़कियां निकलती नहीं थीं आज कहां आ गए हम 10 साल बाद कहां पहुंचेंगे , जो आजकल hm मोबाइल में देख रहे कोई बड़ी बात नहीं घर आंगनबौर सड़को पर देखने को मिले सीजेपी प्रोटेस्ट में ही देख लो सैंपल !