@PoojaHindu50 आप जो ट्विटर पर ट्वीट कर रही है उस काबिल भी आपको डॉ भीमराव अम्बेडकर जी ने ही बनाया है। वरना संविधान से पहले पुरुषो ने तो स्त्रियों को आगे बढ़ने ही नहीं दिया।
@ArifKha21525222@riskyyadav41@myogioffice@myogiadityanath ऐसा पहली बार नहीं हो रहा कि कोई फॉर्म भरने के आखिरी दिनों में site स्लो चले। ऐसा हर बार होता है, और सरकार तो है बिलकुल बकलोल उसे कोई मतलब नहीं बच्चों से, वो ना तो सिस्टम सुधरेगी और ना खुद को।इसलिए हम लोगों को ही बदलना पड़ेगा,हम बदलेंगे तो पूरा देश बदलेगा। अपनी आदत सुधारनी पड़ेगी।
E100 पेट्रोल आने के बाद एक फायदा ये भी रहेगा कि मान लीजिये पेट्रोल पम्प वाले के पास 10-20 का छुट्टा पैसा नहीं है
तो वो डायरेक्ट मुहँ में भी गन्ने का रस डाल सकता है.🤣🤣
@KraantiKumar कैश में ही तो घोटाला होगा, जो दान करेगा वो भी कैश में ही करेगा, ऑनलाइन कैसे चंदा दे पायेगा।
आपको क्या लगता है जो लोग लाखो करोड़ो रूपये चंदा देते है वो सब ईमानदारी का पैसा होता है। ईमानदार आदमी इतनी बड़ी धनराशि चंदे में दे ही नहीं सकता।
@KraantiKumar आज लगता है बीजेपी सर्वोच्च पार्टी बन गयी है, हर एक विधायक सांसद और नेता बीजेपी से जुड़ना चाहते है, पर ये पूरा सच नहीं है वक़्त बदलता है।
इंदिरा गाँधी के जमाने में भी यही हुआ था हर कोई इंदिरा से जुड़ना चाहता था, पर आज कांग्रेस की हालत देख लो।
ऐसे ही आने वाले समय में बीजेपी की होगी
आपका नाम अश्विनी वैष्णव है।
आप रेल मंत्री हैं, लेकिन सोशल मीडिया पर “रील मंत्री” के नाम से ज्यादा फेमस हैं।
अब आपने भरोसा दिलाया है कि IRCTC की खराब वेबसाइट 30 दिनों में अपडेट हो जाएगी।
वही IRCTC, जहां टिकट से पहले यात्री CAPTCHA से कुश्ती लड़ता है।
वही IRCTC, जहां तत्काल बुकिंग 10 बजे शुरू होती है और उम्मीद 10:01 पर दम तोड़ देती है।
वही IRCTC, जहां लॉगिन फेल, OTP लेट, पेमेंट हैंग, पैसा कट और अंत में नतीजा - वेटलिस्ट या रिग्रेट।
पिछले 3,037 दिनों से यात्री वेबसाइट पर बुलेट ट्रेन नहीं मांग रहे।
वे बस इतना चाहते हैं कि टिकट बुक करते समय सिस्टम इंसानों जैसा काम करे , सरकारी दफ्तर जैसा नहीं।
डिजिटल इंडिया में एक ट्रेन टिकट बुक करना अगर UPSC प्रीलिम्स जैसा लगने लगे , तो समस्या यात्री की नहीं , सिस्टम की है।
@SMC89767254@Sanchit40813621@govindprataps12 अगर हिंदी में ही बोलना है फिर टेलीप्रोम्पटर की क्या जरूरत, अगर मुझे अपनी मातृभाषा में ही बोलना पड़े तो मुझे नहीं लगता कि मुझे टेलीप्रोम्पटर की जरूरत पड़ेगी।
ये कोई तेल साबुन बेचकर खरबपति नहीं बना है, रोज नई नई खोज करता है।
और एक दो बिजनेसमैन हमारे यहाँ के है जो तेल, साबुन और फ्रेश सब्ज़ी बेचकर नंबर एक बने हुए है देश में।
आम आदमियों का हक़ मारकर नंबर एक बने है।
दोस्त नहीं बाप है साहब का, एपस्टिन फ़ाइल है उसके पास, अडानी का केस है उसके पास।
अगर उसके खिलाफ साहब ने कुछ बोला तो कुर्सी से हाथ धोना पड़ेगा, ये साहब को अच्छे से पता है।
क्या आदित्य शर्मा की जान की कीमत कुछ भी नहीं है,
अगर यही काम पाकिस्तान ने किया होता तो अब तक एयरस्ट्राइक हो चुकी होती।
लेकिन अमेरिका ने किया है, तो जाने दो।
वो दोस्त है साब का।