@Amockxil2029 Agar ek hi baap ka hai to iski jagah ye bol ke dikhana ki aisi jagah Pork meat khaane me maja aayega jahan ek vishesh majhab ki baat ho.
@Amock_ka_baap
RHA को ले कर सरकार से कुछ बात और माँगें
सरकार अपने स्तर से हर आंदोलन को फूट, समझौता, बल-प्रयोग, समझदारी, मिसइन्फॉर्मेशन कैम्पेन या कायरता दिखा कर कर समाप्त करना चाहती है। और वही उनका कार्य भी है। RHA का नाम ले कर कुछ लोगों ने आंदोलन के लिए जनता को बुलाया और लगभग 7000 की भीड़ जंतर मंतर पर भीतर दिखी, उतने को ही बाहर होल्ड किया गया या लौटा दिया गया।
मैंने केवल दिल्ली पुलिस की बकलोली की अवज्ञा के लिए इसमें भाग लेने की बात की और फिर बहुत लोग मेरे आने पर भी आए। फिर दुबे को पाठक जी ने नेता मान कर एक ऐसे पत्र पर चर्चा के लिए आश्वासन दिया जिसमें आरक्षण शब्द ही नहीं है।
खैर, मैं ये सब तकनीक देखता और जानता आया हूँ। मुझे इस विषय पर सरकार को भीड़ दिखाने की आवश्यकता न पहले थी, न आज है, पर जब चाहूँ वह भी कर सकता हूँ। अगली बार बिना अनुमति के भी ऐसा किया जा सकता है यदि प्रूफ ऑफ कॉन्सेप्ट चाहिए, तो वह भी दिखा देंगे। पर मेरा लक्ष्य वह है ही नहीं।
सरकार को ‘आरक्षण हटाओ आंदोलन’ से इसलिए नहीं डरना चाहिए क्योंकि एक भीड़ पूरे कनॉट प्लेस को घर कर पत्थरबाजी करते हुए संसद घेर लेगी। सरकार को इसलिए डरना चाहिए कि ऐसी कोई भीड़ ही नहीं है, न ही हम संसद को घेरने की योजना बना रहे हैं।
आंदोलन की तपन केवल जलती हुई कार की आग और अराजक भीड़ की ही नहीं होती। एक तपन ऐसी भी होती है जब जनमानस को वैचारिक रूप से इतना सक्षम बना दिया जाता है कि वह स्वयं ही अपने लिए वह निर्णय कर ले, जो वो कल तक किसी दूसरे बहकावे में आ कर कर रहा था।
हमारी माँगें:
१. आरक्षण पर श्वेत-पत्र: क्या लाभ हुआ, किन जातियों को अनुपात से अधिक लाभ लगातार मिला, कौन सी जातियाँ पूर्णतः छूट गईं। आरक्षण किस तरह से देश या समाज के उत्थान में सहायक है, उसके लिए आँकड़े क्या कहते हैं आदि आदि! इस से जुड़ी हर वह रिपोर्ट और सर्वेक्षण जो सार्वजनिक नहीं हुई।
२. EWS को हर वह आर्थिक सहायता दी जाए जो SC को मिलती है। निःशुल्क कोचिंग, निःशुल्क फॉर्म, शून्य हॉस्टल और कोर्स फीस। फिर भी लोन यदि लेना पड़े तो उसमें भी सुविधा।
३. तीनों ही आरक्षित वर्ग में ‘कोटा विदिन कोटा’ लागू हो ताकि वास्तविक दलित-पीड़ित-वंचित जातियों तक लाभ पहुँचे। अभी SC और OBC में हजार-हजार जातियाँ ऐसी हैं जिन्हें नगण्य आरक्षण मिला है। और 4-5 जातियाँ ऐसी हैं जो 70-80% आरक्षण खा रही हैं। इसका आधार पारिवारिक आय हो, न कि वैयक्तिक और दुरुपयोग की संभावना न रहे।
४. मेरिट का सम्मान हो। आरक्षित वर्ग का कटऑफ किसी भी हालत में सामान्य वर्ग के कटऑफ के (से नहीं) 10% के रेंज से बाहर न जाए। और यह भी आज की परीक्षा के अधिकतम आयु सीमा वाले बच्चों की आयु के बाद समाप्त किया जाए। न्यूनतम क्वालिफाइंग मार्क्स तो तय होना ही चाहिए।
५. सरकार यह सर्वेक्षण करे कि क्या गरीबी, भेदभाव या पिछड़ेपन से किसी की बौद्धिक क्षमता घट या बढ़ सकती है? इम्पीरिकल एविडेंस सार्वजनिक करें और उसी आधार पर आरक्षण की नीतियाँ बनें।
६. एक व्यक्ति को एक बार आरक्षण मिले। एक परिवार को एक बार आरक्षण मिले।
७. दशकीय समीक्षा हो। समाप्ति के लिए एक ‘सनसेट क्लॉज’ या रोडमैप कि कब तक रहेगा।
८. कॉलेज/यूनिवर्सिटी पुस्तकालयों में पुस्तकों के अलॉटमेंट का आरक्षण तत्काल निरस्त हो। इसका कोई लॉजिक नहीं है। यह आरक्षण से लड़ कर वहाँ पहुँचे बच्चों को सताने की व्यवस्था मात्र है। या आप पुस्तकों की मात्रा दोगुनी कीजिए और वहाँ ‘आरक्षित सेक्शन’ लिख दीजिए।
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अन्य माँगें:
९. यूजीसी नियमावली निरस्त हो या समीक्षा कर के हर जाति समूह को इसमें सम्मिलित किया जाए।
१०. SC/ST Act की तर्ज पर ‘सवर्ण उत्पीड़न (रोकथाम) कानून पास’ हो। दोनों ही कानून में केस झूठा पाए जाने पर, उस केस में होने वाला दंड आरोप लगाने वाले को झेलना पड़े। आर्थिक जुर्माना भी वसूला जाए।
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सरकार और सुधिजन देख लें। बाकी, चाहे आप दुबे, शेखावत या अन्य को मैनेज कर लें, आंदोलन चलता रहेगा।
@theskindoctor13@Yadavanviroyal Dr. Sahab jitni der me ye video banayi aur upload ki utni der me to Kam se kam 2 patient OPD me free kar dete.
In jaise #librandu ke muh kya lagna.
If this was a man then this @Yadavanviroyal has never uttered a single word for so called body-shaming
@ripper_dhruvaa WhatsApp University से पढ़ाई करके और निम्न कोटि का गांजा फूंक के आदमी ऐसी ही बाते करता है।
अब ठीक से थोड़ा सा पढ़ और बता कि तूने जो लिखा है उनमें से कितनो से बाबा साहब ने स्वतंत्रता दिलाई।
@mktyaggi@nitin_gadkari थोड़ा सोचो और उत्तर दो कि जब नितिन गडकरी केवल सड़क परिवहन मंत्री है तो वो क्यों उछल उछल करके सबसे आगे इथेनॉल का झंडा उठा कर खड़ा रहता आया है?
@ocjain4 अच्छा जी, और ये भयंकर वाला ज्ञान आपको कैसे प्राप्त हुआ?
वैसे मैं बताऊं - इसके दो में से कोई 1 या दोनों कारण हैं।
1 भाजपा के सही मायने में अंधभक्त हो (और तुम जैसे लोगों की वजह से ही भाजपा के बुरे दिन आने शुरू हो गये हैं)।
2 ऐसी वीडियो बनाने और पोस्ट करने के लिए कुछ राशि मिली है
@pathshalagurug फिर तो तथाकथित गुरु जी, जब कश्मीर में सेना के जवानों पे पत्थर मारा जा रहा था वो भी सही था, जब एक उन्मादी भीड़ ने लाल किले पे दूसरा झंडा लगाया था और पुलिस वालों को पीटा था वो भी सही था?
क्या पुलिस वालों का परिवार नहीं होता?
@CourageousRo Nothing will happen.
लाल किले पे तथाकथित किसान आंदोलन के समय उत्पात मचाने वालों का क्या हुआ?
जो लिब्रांडु देश को और सेना को गालियाँ देते रहते हैं, उनपे कौनसी कार्यवाही होती है?
वो रावण और अन्य नेता इतना गंदा बोलते हैं तब भाजपा क्यों नहीं कुछ करती है?
@MukeshPathakji प्रारंभ से ही हमारा देश कृषि प्रधान था। सभी कार्य खेती के अनुसार ही होते थे।
इन 4 माह में हम देखे तो प्रारंभ के 2 माह में अच्छी बारिश होती थी, जिस से जो कच्चे रास्ते होते थे उनपे अच्छा खासा कीचड़ हो जाता था क्योंकि पहले पक्की सड़के नहीं होती थी तथा बाद के महीनों में खेती
@MrMishra जब जनवरी से UGC बिल के बाद से ही इस्तीफा मांगा जा रहा था तब तो अपने ही समर्थको को सरकार और IT सेल देशद्रोही बता रही थी।
और क्या घटिया तर्क दिया है कि 6 लाख वोटर, उन 6 लाख मतदाताओं ने शिक्षा मंत्री बनाने के लिए वोट दिया था क्या?