चे गुवेरा की तरह पानी से सख्त नफरत, स्टालिन से मारपीट सीखी और माओ से माओवाद, हेडमास्टर के बेटों से अटूट प्रेम, पत्रकार हमारे भाई, पैरोडी एकाउंट 100% Follow Back
कॉमरेड्स! कोई बिजली जैसी चीज नहीं होती है, डैम इसलिए बनाये जाते हैं ताकि पेड़ काटकर संघी लोग कागज बना सकें। साथियों इस षड्यंत्र से पर्दा हटाने के लिए हम लोग 'चिपको आंदोलन' करेंगे; जहां भी नंगी तार दिख जाए ह्यूमन चैन बनाकर चिपक जाओ। कोई करेंट वरेन्ट नहीं होता। ये षड्यंत्र है। 😛
कॉमरेड्स! संघियों ने हमें मारने के लिए भारी मात्र में हिट स्प्रे का ऑर्डर दिया है - वे खुलेआम सड़क पर घूम रहे हैं। नाली में, कीचड़ में, कोनों में, कूड़े में, गन्दगी में सब जगह स्प्रे कर रहे हैं - हमारी रहने की सभी जगहों पर हमला हो रहा है। अतः जिस नाली में पड़े हैं वहीं छिपे रहें।
कॉमरेड्स! कोई बिजली जैसी चीज नहीं होती है, डैम इसलिए बनाये जाते हैं ताकि पेड़ काटकर संघी लोग कागज बना सकें। साथियों इस षड्यंत्र से पर्दा हटाने के लिए हम लोग 'चिपको आंदोलन' करेंगे; जहां भी नंगी तार दिख जाए ह्यूमन चैन बनाकर चिपक जाओ। कोई करेंट वरेन्ट नहीं होता। ये षड्यंत्र है। 😛
कॉमरेड्स! हमारे शरीर का मैल ही हमारा रक्षक है। इसकी रक्षा करना ही हमारे जीवन का परम उद्देश्य है। मत भूलिए, मैल छंटा मतलब वामपंथी कटा।
अतः जैसे भी करो, पानी से दूर रहो। हम जिस गली जिस कूचे से गुजरें, हमारी सुगन्ध ही लोगों को सूचित कर दे कि संघियों को डराने कॉमरेड्स आ रहे हैं। 😎
कॉमरेड्स! आज एक संघी बस में मेरे साथ बैठा फिर सीट से उठकर बोला - "तू नहाता नहीं है क्या? चुल्लू भर पानी में डूब मर, नाली के कीड़े!" लेकिन इससे पहले मैं कुछ बोल पाता वो वहीं बेहोश हो गया। चार लोग कांघे पर लादकर अस्पताल ले गए उसको। कितने फट्टू होते हैं ये संघी, बस इतने से बेहोश! 😂
कॉमरेड्स! पता है, संघी ये क्यों कहते हैं कि आत्मा मर ही नहीं सकती - ताकि अगर किसी वामपंथी की बदबू सूंघकर टें बोल जाएं तो मन में ये दिलासा बनी रहे कि अभी मरे नहीं हैं फिर एक और जन्म लेंगे तब देख लेंगे इन वामपंथियों को। 🤣
कॉमरेड्स! देखा! मैने कहा था कि भारत उष्ण जलवायु वाला देश है, यहां ठंड जैसा कुछ नहीं होता। अब ये संघी भी बिना गर्म कपड़ों के घूमने लगे हैं। चार महीने से कभी कपड़ों पर, कभी हीटर पर, कभी गीजर पर खर्चा कर रहे थे गधे; इनकी बुद्धि अब खुली जब आधे लुट गए। 😂
कॉमरेड्स! इन दुष्ट संघियों की हिम्मत तो देखो इन्होंने जैसे ही सुना कि हम पानी के खिलाफ आंदोलन करने वाले हैं, इन्होंने पानी ही बरसवा दिया। हाय! सारा मैल घुल गया मेरा। नासपीटे जीने नहीं देते बिल्कुल। चार पांच महीने की मेहनत से मैल एकत्र हुआ था शरीर पे। दुष्ट कहीं के।🥹
कॉमरेड्स! आजकल ये संघी नई नई हुडी, जूते मोजे, जैकेट वगैरह पहनकर घूम रहे हैं ताकि हम लोग विश्वास कर लें कि उष्ण जलवायु वाले देश में ठंड भी पड़ती है। ठंड जैसा कुछ नहीं होता, ये प्रोपेगंडा है ताकि इन पूंजीवादियों के जाल में हम फंसकर NGO से बड़ी मुश्किल से जुटाए पैसे खर्च कर दें।
कॉमरेड्स! हम सब उस परमपिता कार्ल मार्क्स की संतानें हैं। चे ग्वेरा का मैल हमारे शरीरों में है, लेनिन की कुटिल बुद्धि हमारे पास है और स्टालिन की लाल क्रान्ति। जब हमारे आदर्श कभी नहीं नहाते थे तो हम क्यों नहाएं; पानी हमारा शत्रु है। हम पानी के खिलाफ आंदोलन करेंगे अब। 😎