छात्रों के साथ की गई बर्बरता के मामले में दिल्ली पुलिस FIR दर्ज करने से इनकार कर रही है।
केरल की अथिरा और राजस्थान की रितु समेत कई अन्य युवाओं को दिल्ली पुलिस ने पीटा है।
हम अमित शाह की दिल्ली पुलिस की इस क्रूरता को ऐसे ही नहीं जाने देंगे। पुलिस हड्डियां तोड़ सकती है, पर सत्याग्रह के हौसले को नहीं।
भारत के युवा, खासकर युवतियां निडर, दृढ़ और एकजुट हैं। हम अपने सभी युवा साथियों के साथ लोकतंत्र की रक्षा के लिए लड़ते रहेंगे।
📍 दिल्ली
Delhi Police is refusing to register an FIR on the assault of our students.
Two young women, Athira from Kerala and Ritu from Rajasthan, along with many others, were beaten by Delhi Police.
I have spoken to Kerala Home Minister Ramesh Chennithala and Rajasthan PCC President Govind Singh Dotasra. A Zero FIR has already been registered in Kerala. We will pursue every legal route against the officers responsible, in Kerala, in Rajasthan and in the courts.
Brutality by Amit Shah's Delhi Police will not go unchecked.
In 1930, at Dharasana, Sarojini Naidu led unarmed satyagrahis into police lathis. Not one of them raised a hand. The world watched.
Police can break bones. They cannot break a satyagraha.
India's youth, especially young women, are fearless, determined and united. They are standing up for our democracy, and I stand with them.
पत्रकार :- पद्मा श्री आपने उस व्यक्ति को दिया जिसने कारसेवकों पर गोली चलवाई
राजनाथ सिंह:-चलिए इसके पीछे बहुत कारण है
आए थे राहुल जी का मजाक बनाने
जाते-जाते खुद मजाक बन गए 🥱
सुबह के 4 बजे। जब दुनिया सो रही थी, तब अंकिता भंडारी के माता-पिता को हिरासत में ले लिया गया।
उनका गुनाह? वे इंडिया गेट पर चुपचाप बैठे थे - बोझिल कंधों के साथ, बिना किसी हंगामे के और सिर्फ़ इतना माँग रहे थे कि CBI जाँच पूरी होने तक दुष्यंत गौतम को सिक्किम का राज्यपाल न बनाया जाए।
कल मैं और प्रियंका इन माता-पिता से मिले थे।
जिस जाँच का नतीजा आया नहीं, उसके पहले ही नियुक्ति की जल्दी और सवाल पूछने वाले माँ-बाप को रात के अंधेरे में उठा लिया गया।
इस सरकार की पहचान यही है: पीड़ितों की आवाज़ दबा दो, सवाल करने वालों को हटा दो।
पर न्याय की लड़ाई न दबेगी, न रुकेगी।
कांग्रेस अंकिता भंडारी के परिवार के साथ खड़ी है, और खड़ी रहेगी - जब तक उन्हें न्याय नहीं मिलता।
#JusticeForAnkitaBhandari
आरएसएस,बीजेपी की स्टाइल में देखिये कैसे लक्ष्मी मानी जाने वाली बेटियों की पूजा की जा रही है।ये सत्ता में बैठे हिंसक अपनी आँखें बंद किए हुए हैं।ये किसी के सगे नहीं हैं।जिनके साथ ये सब हो रहा है क्या वे देश के नहीं हैं या हिन्दू नहीं हैं?
चार साल हो गए। इंसाफ देना ही नहीं था। राज्य में लगातार विरोध प्रदर्शन होता रहता है। अगर जी- प्रिंटर से नतीजों के प्रिंट निकाल लाने का गुमान नहीं होता तो कोई भी राजनीतिक दल राज्यपाल का पद नहीं देता। पहले इंसाफ करता। इसका क्या बचाव हो सकता है कि चार साल से राज्य की जनता अंकिता के इंसाफ को लेकर संघर्ष कर रही है। उत्तराखंड की जनता के उस हिस्से की दाद देनी होगी जो आए दिन इसे लेकर सड़क पर उतरती है। बड़ी बात है।
जंतर-मंतर किसी के पापा का नहीं है!
चाहे मोदी हों या शाह, जंतर-मंतर किसी की बपौती नहीं है! देश की जनता से वहाँ विरोध प्रदर्शन करने का अधिकार हम किसी भी कीमत पर छीनने नहीं देंगे!
: IYC अध्यक्ष @UdayBhanuIYC जी
चार साल से अंकिता भंडारी के परिवार को इंसाफ नहीं मिला, लेकिन एक ‘VIP’ आरोपी को संरक्षण और संवैधानिक पद का इनाम ज़रूर मिला।
जहां बलात्कारियों और हत्यारों का फूल-मालाओं से स्वागत होता है और अपराधियों को सत्ता की ताकत से नवाज़ा जाता है - उस महिला-विरोधी BJP से कोई उम्मीद की भी नहीं जा सकती।
आज, अंकिता के माता-पिता अपनी बच्ची के लिए न्याय की गुहार ले कर, अपने घर से मीलों दूर, India Gate पर बैठे हैं।
मैं और कांग्रेस पार्टी उनके साथ खड़े हैं - उनके दुख में भी और इंसाफ की इस लड़ाई में भी।
#JusticeForAnkitaBhandari
अंकिता भंडारी के माँ-बाप हिरासत में,
और VVIP दुष्यंत सीधा राजभवन में।
अगर दुष्यंत गौतम की राज्यपाल के पद से बर्खास्तगी नही हुई, तो अब कुछ इसी तरह पूरे देश की सड़कों पर Justice के लिए Democracy का तांडव होगा। और ये तांड़व तुम रोक नही पाओगे अमित शाह।