इस देश की सरकार और तंत्र मुसलमानों को किस हद तक निशाना बना रहे हैं वो अब सिर्फ गरीब फेरी वाले तक महदूद नहीं है।
अहमद बुहारी अब दोषमुक्त हैं पर उनकी कंपनी किसी और के पास जा चुकी है।
देखिये ये पूरा वीडियो।
राहुल गाँधी को कमजोर आंकना गलती होगी.
पिछले 24 घंटे का घटनाक्रम इसका गवाह है.
Norway की एक पत्रकार Helle Lyng जिसके X पर फॉलोवर मात्र 3500 थे,
भारत के पीएम मोदी को एक सवाल पूछती है.
मोदी के जवाब ना देने पर वो X पर पोस्ट डालती है, विपक्ष नेता राहुल गाँधी उसको Quote करते हैँ.
नीचे कमेंट में Helle Lyng पूछती है, ये तो इंटरव्यू नहीं दे रहे, क्या आप इंटरव्यू दोगे मुझे?
और बस. यहीं से एक तमाशा शुरू होता है जो अभी तक चल रहा है.
Helle Lyng के फॉलोवेर्स 35000 हो गए
बीजेपी आईटी सेल और मीडिया मोदीजी का बचाव करने में जुट गयी.
पत्रकार को कांग्रेस का एजेंट साबित किया जा रहा है किसी भी तरह.
अगर राहुल Quote ना करते तो क्या ये होता?
नहीं, बिलकुल नहीं..
अंदर की खबर ये है कि वीडियो App द्वारा जल्दी ही राहुल गाँधी Helle Lyng को इंटरव्यू दे सकते हैँ.
अगले दो दिनों में ये देखने को मिल सकता है..
ये इंटरव्यू सोशल मीडिया पर सफलता के सारे रिकॉर्ड तोड़ सकता है..
अगर किसी को पत्रकारिता सीखनी है, तो CNN से सीखनी चाहिए।
CNN ने दिखाया कि ईरान के एक प्राथमिक स्कूल पर हमले में अमेरिकी सेना जिम्मेदार थी, जिसमें कई मासूम बच्चों की मौत हुई।
सबसे ताकतवर देश के खिलाफ भी सच दिखाना, यही होती है प्रोपेगैंडा-फ्री पत्रकारिता🔥
*अगर इस धूर्त और बेशर्म आदमी की जगह आज कोई और प्रधानमंत्री होता तो अब तक अपना पद छोड़ चुका होता। जिस भी आदमी में थोड़ी-बहुत लाज-शर्म होती वो देश का ऐसा हाल करने से पहले कुर्सी से उतर चुका होता…।*
👉मगर नरेंदर मोदी तो बेहया है। देश और देश की इज्जत भले ही इससे नहीं संभल रही है, मगर कुर्सी का मोह नहीं छोड़ पा रहा है। रोज अमेरिका बेइज्जत कर रहा है, मगर इस चिकने घड़े को फर्क कहां पड़ रहा।
भारत माता की आन-बान और शान से इसका कोई लेना-देना नहीं है, इसे देश से नहीं सिर्फ कुर्सी और सत्ता से प्यार है। वर्ना भारत इतना कमजोर कभी नहीं हुआ था, जितना आज है। आज भारत की विदेश नीति अमेरिका डिसाइड कर रहा है।
*ट्रंप जो भी मोदी से कराना चाह रहा है, वो खुलेआम करा रहा है। मोदी की औकात नहीं, उसकी बात काट देने की...*
👉बताईये, ईरान हमारा कितना पुराना और भरोसेमंद साथी था, मगर ईरान के सर्वोच्च नेता के मारे जाने पर अमेरिका की निंदा करना तो दूर इस आदमी के मुंह से सहानुभूति और संवदेना के एक शब्द भी नहीं फूटे।
👉ईरान का जो जंगी बेड़ा IRIS-देना भारत के निमंत्रण पर भारत आया था, उसे वापस लौटते हुए अमेरिका ने हिंद महासागर में डुबोकर सैकड़ों लोगों को मार डाला। कौन कहे बचाने को, मोदी अमेरिका के इस घटियापन को आंख मूंदकर देखता रहा।
*क्या आपको अब भी शक है कि हमारा प्रधानमंत्री अमेरिका का गुलाम नहीं है ?*
👉🏿ये आदमी ब्लैकमेल्ड होकर अमेरिका के हाथों में खेल रहा है, वो भारत के हित की जगह अमेरिका को फायदा पहुंचाने के लिए काम कर रहा है...
➡️अगर नहीं तो अमेरिका से ट्रेड डील करने की क्या मजबूरी थी, क्या ये बात मोदी को नहीं पता कि इससे भारत का भविष्य खोखला हो जाएगा, हमारे किसान तबाह हो जाएंगे, हमारे छोटे-छोटे व्यापारियों की जिंदगी जहन्नुम बन जाएगी...
➡️अब तो ऐसा लगने लगा है कि भारत कोई आजाद देश नहीं बल्कि अमेरिका का डोमिनियन स्टेट है। जो सरकार हमने चुनी है, वो सिर्फ अमेरिका का फरमान मानने के लिए मजबूर है। वर्ना अमेरिका कौन होता है, हमें रूस से तेल खरीदने की परमीशन देने वाला...?
👉🏿पाकिस्तान के खिलाफ सीजफायर की घोषणा अमेरिका से होती है..... मोदी सरकार बाद में बताती है
👉🏿ट्रेड डील पर पहले घोषणा अमेरिका कर देता है......बाद में मोदी सरकार देश की जनता को बताती है
अमेरिका एक के बाद एक कंडीशन भारत पर थोंपता जाता है, मगर हमारे प्रधानमंत्री अपनी नाराजगी दर्ज कराने की जगह मुंह में दही जमाए तमाशा देखते रहते हैं।
👉भारत की जमीन को चीन अपना बताता है, अरूणाचल में नए गांव बसा लेता है। इसका मुंहतोड़ जवाब देने की जगह मोदी चीनी अधिकारियों को भाजपा कार्यालय में बुलाकर मिठाई खिलाते हैं।
👉बांग्लादेश जैसा पिद्दी देश पाकिस्तान के साथ मिलकर हमारे नार्थ-ईस्ट को हमसे अलग करने की बात करता है, रोज हमारे खिलाफ जहर उगलता है, मगर हमारी सरकार में इतना हिम्मत नहीं कि वो उसे जवाब दे
👉इसी तरह नेपाल और मालदीव जैसे भिखमंगे देश भी चीन के प्रभाव में आकर भारत के खिलाफ उल-जलूल हरकतें करते हैं, मगर मोदी सरकार इन लोगों को भी सबक नहीं सिखा पाती....
अगर देश में कोई नेता, पत्रकार इनके खिलाफ बोले तो ये उसका मुंह बंद कराने के लिए हर लेबल पर उतर जाते हैं। मगर अमेरिका-चीन और बाग्लांदेश के सामने इनकी घिग्घी बंध जाती है। मोदी जी पैंट में मूत देते हैं।
👉मैं पूरी जिम्मेदारी से कह सकता हूं कि मोदी सिर्फ भारत का नहीं बल्कि दुनिया का सबसे पाखंडी, कमजोर और डरपोक प्रधानमंत्री है। इसे देश की इज्जत से कोई लेना-देना नहीं।
*सच में अगर आज नेहरू और इंदिरा जैसा प्रधानमंत्री होता तो अमेरिका-चीन को सबक सिखा देता, या शास्त्री जी जैसा प्रधानमंत्री होता तो बिना कहे देशहित में अपना इस्तीफा दे दिया होता.. .! मगर इस बेहया को देखकर तो ऐसा लगता है जैसे इसे कुर्सी से घसीटकर उतारना पड़ेगा, क्योंकि ये खुद से कुर्सी छोड़ेगा नहीं........ .!!*
*जनहित में जारी*
FIR हो,
मुकदमा दर्ज हो या
Privilege प्रस्ताव लाएं - मैं किसानों के लिए लड़ूंगा।
जो भी ट्रेड डील किसानों की रोज़ी-रोटी छीने या देश की खाद्य सुरक्षा को कमजोर करे, वह किसान-विरोधी है।
अन्नदाताओं के हितों से किसान-विरोधी मोदी सरकार को समझौता नहीं करने देंगे।