इथेनॉल बहस में कार कंपनियों की कोई आवाज़ नहीं है। उन्हें सामने आकर अपना पक्ष रखना चाहिए। उनके सर्विस स्टेशन में कारें आती होंगी। बाइक आती होगी। कुछ तो फीडबैक होगा। उन्हें पता होगा कि मंत्री सही बोल रहे हैं या नहीं। क्या उन्हें भी डर लग रहा है? इतनी बड़ी बड़ी कार कंपनियाँ हैं और चूँ तक नहीं ? डर इस देश का बुनियादी चरित्र हो गया है।
अगर किसी एक मंत्री की वजह से मोदी सरकार की छवि ध्वस्त हो रही है। जनता त्राहिमाम कर रही है तो उनका नाम नितिन गडकरी है। दुर्भाग्यपूर्ण है कि, जनता को राहत देने, समझाने और समाधान देने के बजाय जाने कौन सी लॉबी का जिक्र करते प्रसन्न हुए जा रहे हैं। कमाल की बात यह भी है कि, जनता से सीधे जुड़ा मुद्दा होने के बावजूद राहुल गांधी सहित पूरा विपक्ष नितिन गडकरी पर कभी हमलावर नहीं होता है। किसी दूसरे मंत्री के साथ ऐसे विवाद जुड़े होते तो अब तक राहुल गांधी और विपक्षी नेता जाने क्या कर रहे होते? नितिन गडकरी परफार्मिंग मिनिस्टर हैं, यह तर्क देकर जनता के मन में संदेह बने रहने और जनता को परेशान होने के लिए छोड़ देना कहां तक उचित है।
पत्रकारिता की झुकी हुई कमर में आयोडेक्स लगाकर सीधा करने की कोशिश करता एक जाबांज पत्रकार।
पत्रकार अगर दलाली न करे तो जनता को कभी जमीन में उतरने की जरूरत न पड़े।
ये वही विपुल दुबे विधायक है जिसने विधायक बेदीराम के साथ मिलकर रेलवे का पेपर लीक कराया था।
विपुल दुबे और बेदीराम विधायक विशुद्ध अपराधी हैं।
ये कितना भी शरीफ बन लें छात्रों के हमेशा गुनहगार रहेंगे।
युद्ध रुकने की वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें घटने के बावजूद घरेलू उपभोक्ताओं को राहत क्यों नहीं मिल रही है? तेल के दाम क्यों नहीं घटाए जा रहे?
इस पर पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी का कहना है कि भारत जिस कच्चे तेल का इस्तेमाल कर रहा है, वह लगभग दो महीने पहले खरीदा गया था।
अगर कच्चे तेल की कीमतें अगले 2–3 महीने तक इसी तरह कम बनी रहती हैं, तभी कीमतों में कमी पर विचार किया जा सकता है। अभी इस पर कुछ कहना काल्पनिक होगा।
मतलब, 2–3 महीने पहले जो कच्चा तेल खरीदा गया था, वह महंगा था, इसलिए अभी सस्ते तेल का फायदा ग्राहकों को नहीं दिया जा सकता।
बस मंत्री जी से लगे हाथों यह भी पूछना था कि यह पूरी स्कीम पश्चिम बंगाल चुनाव खत्म होते ही कैसे लागू हो गई और लगभग उत्तर प्रदेश चुनाव तक कैसे चलने वाली है?
आइटी सेल के टट्टी टट्टू अब यह बता रहे हैं कि इथेनॉल UPA ले कर आई थी और राजपत्र दिखा रहे हैं!
अरे भड़वों! जब तर्क नहीं है तो लड़चट्टों चुप क्यों नहीं रहते तुम लोग? पिछले बारह वर्षों से सत्ता में तुम हो। नीति पर गंभीरता से कार्य आरम्भ हुआ 2018 में। इंजन बने 2023 में। और तुम दिखा रहे हो कि नीति तो 2007 में आई?
अच्छा तो ये बताओ कि 2001 और 2003 में किस पैर्टी की सरकार थी? क्या वो तब से E20-30-85 बेच रहे थे? तुमने तब भी जनता को कॉन्फिडेंस में नहीं लिया, और तुमने आज भी बिना बताए जनता के EMI पर लिए इंजनों का बलात्कार किया है।
क्या UPA वालों ने गडकरी और हरदीप पुरी से कहा था कि बिना जनता को बताए कि इथेनॉल कितना मिक्स है, पेट्रोल कह कर बेचो। और उन गाड़ियों में भी डलवाओ जो बिलकुल भी इसके लिए नहीं बने हैं।
तुम्हारे पाँव के नीचे से भूमि खिसक रही है, और तुम अभी भी कॉन्ग्रेस और नेहरू को ब्लेम करने की राह देख रहे हो। चुल्लू भर पानी में डूब जाओ हरामखोरों।
कितना PR करोगे @nitin_gadkari का? और ये तुम नहीं करते पर करना पड़ रहा है क्योंकि आँच @narendramodi तक जा रही है। कुछ भी हो जाए, मोदी के कुर्ते का एक धागा हिलना नहीं चाहिए। बाकी देश में आग ही क्यों न लग जाए।
ऐसी भी क्या गुलामी करनी है बे? आत्मा तो मत बेचो दल्लों!
>रोड धंस गई,
>ट्रक पलट गया,
>रिक्शा पाताल में चला गया
>रोड में दरार आ गई
>पुल गिर गया,
आखिर हम टैक्स इन्हीं सब के लिए तो देते हैं, ऐसी कोई आपदा हो, और हमारा पैसा यूज़ में आए।
थैंक यू @nitin_gadkari जी,
📍 गुजरात
RTI में सवाल पूछा था; इथेनॉल का प्रयोग किन गाड़ियों पर किया? क्या रिजल्ट आया?
सरकार का जवाब; यह सीक्रेट है। सूचना नहीं दे सकते।
सवाल है कि नितिन गडकरी और सरकार इथेनॉल की आड़ में क्या करना चाहते हैं? लोगों की गाड़ियां क्यों खराब करने पर तुले हैं?
भारत तिवारी एनकाउंटर मामले में नया मोड़!
जिस अधिकारी एसडीपीओ राजेश कुमार शर्मा ने भारत तिवारी के एनकाउंटर का नेतृत्व किया था, उन्हें अब DSP के पद पर पदोन्नत कर दिया गया है।
इस बीच पूर्व NSG कमांडो लकी बिष्ट ने कई अहम दावे किए हैं। उनका कहना है कि करीब 19 साल पहले भी राजेश कुमार शर्मा पर मुज्जफरपुर में एक एनकाउंटर को लेकर आरोप लगे थे, लेकिन जांच के बाद उन्हें क्लीन चिट मिल गई थी।
धर्मेंद्र प्रधान के अनुसार जो भी पेपर लीक का विरोध कर रहे हैं वो "देशद्रोही" हैं।
नितिन गडकरी के अनुसार जो इथेनॉल का विरोध कर रहे हैं वो "लॉबीज" हैं।
मतलब इन स्वघोषित ईमानदारों के अनुसार, विरोध करने वाली कोई भी "आम जनता" नहीं है।
उदयपुर SP लॉर्ड लिनलिथगो के पास फ़रियाद लेकर पहुंची एक बुजुर्ग महिला,
गोरे अंग्रेजों के समय भारतीयों को बहुत दिक्कत झेलनी पड़ती थी, अच्छा है कि अब भूरे अंग्रेजों का समय है