मुर्दा न्याय व्यवस्था! 🚨💔😡
2015 के राजस्थान के डांगवास में छह दलितों की निर्मम हत्या कर दी गई थी। दलितों ने इस भयावह नरसंहार के खिलाफ देश भर में आंदोलन किया तो मामला CBI को सौंपा गया।
CBI ने गलत लोगों को गवाह बनाया। नतीजन, अदालत ने आज सभी 40 आरोपियों के बरी कर दिया। इतने बड़े पैमाने पर हुए खूनी संघर्ष और हत्याओं के बाद अदालत से सभी आरोपियों का बरी होना न्याय व्यवस्था पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगाता है। यह घटना एक प्रमाण है कि इस देश में दलित होना कितना भयावह है।
समाज के आधा दर्जन लोगों की हत्या कर दी गई, और राज्य सरकार, पुलिस प्रशासन एवं CBI इस नरसंहार कोई लेकर ठोस सबूत पेश नहीं कर पाई? जब हत्यारे जाट समुदाय से थे और स्थानीय प्रशासन एवं राजनीती में जाटों का ही प्रभुत्व है। ऐसे में भला वे अपने समाज के खिलाफ ठोस सबूत पेश करेंगे भी क्यों?
धन्य है ये सरकार, धन्य है ये न्यायपालिका। लंबी कानूनी प्रक्रिया और सीबीआई जांच के बाद भी यदि एक भी आरोपी को सजा न मिले, तो इससे देश की न्याय प्रणाली और कानून के इकबाल पर एक गंभीर और उपेक्षा का धब्बा लगा है।
छुआछूत का दंश!
MP के शिवपुरी में कक्षा 4 के एक दलित बच्चे ने क्लास में रखी बोतल से पानी पी लिया तो शिक्षक लोकेश शर्मा ने जातिगत शब्दों का प्रयोग करते हुए उसे डंडे से बुरी तरह पीटा।
देश में दलितों के साथ छुआछूत जारी है लेकिन ब्राह्मण समाज के लोग "आरक्षण हटाओ आंदोलन" चला रहे हैं।
कल ही राजस्थान लोक सेवा आयोग ने चिकित्सा सेवा का परिणाम जारी किया है।
अब बताओ।
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69 नंबर वाला आदिवासी डॉक्टर अच्छा इलाज करेगा?
या 58 नंबर लाकर EWS सवर्ण कोटे से बनने वाला डॉक्टर अच्छा इलाज करेगा?
जो आरक्षण हटाने की मांग कर रहे है उनसे पूछ रहा हूँ।
इस समय ब्राह्मण "आरक्षण हटाओ आंदोलन" चला रहे हैं।
अब आज ही की खबर सुनिए। MP के शिवपुरी के प्राइमरी स्कूल में एक दलित बच्चे ने क्लास में रखी बोतल से पानी पी लिया, तो शिक्षक लोकेश शर्मा का जातीय दंभ आहत हो गया।
लोकेश शर्मा ने बच्चे को गालियां दीं और बेरहमी से पीटा।
किराए पर कमरा ढूंढते वक्त योग्यता नहीं पूछी जाती है।
न नौकरी पूछी जाती है।
सबसे पहले पूछा जाता है तुम्हारी "जाति क्या है?"
जब रहने के लिए छत भी जाति देखकर मिले, तो बराबरी के दावे खोखले लगते हैं।
देश में आरक्षण हटाओ की बात चल रही है।
चलो अब आरक्षण की सच्चाई को जानते है।
कल राजस्थान लोक सेवा आयोग अजमेर ने कॉलेज प्रोफेसर गणित का परिणाम जारी किया।
दलित 101 नंबर लाकर फेल हो गया।
आदिवासी 86 नंबर पर फेल हो गया।
EWS वाला सवर्ण 82 नंबर लाकर गणित का प्रोफेसर बन रहा है।
मैं भी #आरक्षण का #विरोधी हूँ। सभी क्षेत्रों से इस सबसे पहले इसको हटाने की ज़रूरत है।
1. EWS (सुदामा कोटा) – 10% जितनी आबादी, उतना आरक्षण।
2. मंदिर आरक्षण – 100%, पीढ़ी-दर-पीढ़ी, सदियों की प्रथा।
3. न्यायालय आरक्षण – कॉलेजियम सिस्टम; कोर्ट में जज, वकीलों में 99% वंशवादी प्रक्रिया।
4. शिक्षा आरक्षण – 95%; विश्वविद्यालयों में कुलपति, सचिव, प्रिंसिपल, प्रोफेसर, विद्यालयों में हेडमास्टर जैसे पदों पर वंशवादी प्रक्रिया।
5. स्वास्थ्य आरक्षण – 90%; सरकारी या निजी डॉक्टरों में वंशवादी प्रक्रिया।
6. मीडिया आरक्षण – 100%।
7. प्रशासनिक आरक्षण – 90%; IAS, IPS, IFS आदि।
8. विधायिका आरक्षण – 70–80%; मुख्यमंत्री, राज्यपाल, मंत्री, MP, MLA, MLC, सचिव जैसे अन्य पदों पर वंशवादी प्रक्रिया। यदि वोट 10% है, तो 80% कैसे चुने जाते हैं?
9. ब्यूरोक्रेसी आरक्षण – 95%; वंशवादी कोटा।
10. ठेकेदारी आरक्षण – 95%।
11. खेल आरक्षण – क्रिकेट 92%।
12. सिनेमा आरक्षण – 96%।
13. शंकराचार्य आरक्षण – 100%; मेरिट, ज्ञान और जातिवादी प्रक्रिया।
14. RSS चीफ आरक्षण – 100%; योग्य, काबिल और अनुभवी व्यक्ति क्यों नहीं?
15. वेलफेयर स्कीम आरक्षण – 10%; 5 किलो राशन, प्रधानमंत्री आवास योजना, वृद्धा पेंशन, किसान जैसी सभी योजनाओं में सुदामा कोटा।
16. जाति प्रमाण-पत्र आरक्षण – 10%; दलित, OBC बनकर हक़मारी, पैसा और पैरवी, जातिवादी अफसरों की कोटा प्रक्रिया।
17. जनरल कोटा आरक्षण – 50%; आबादी 10% है, आरक्षण 50%, नौकरियाँ।
18. NFS कोटा – सिफ़ारिश, चयन समिति की प्रक्रिया के कारण SC, ST, OBC की आरक्षित सीटों पर NFS लगाना।
चिंता:
1. जिसकी जितनी भागीदारी, उसको उतनी हिस्सेदारी मिलनी चाहिए—सभी क्षेत्रों में, सरकारी और निजी।
2. 10% वालों को जब सुदामा कोटा के तहत 10% हिस्सेदारी मिल रही है, तो OBC, SC, ST को भी उनका पूरा हिस्सा मिलना चाहिए।
3. देश में आज तक जितने भगोड़े हुए, वे सभी एक ही वर्ग से क्यों?
4. माफिया, अपराधी, रंगबाज़, बलात्कारी किस वर्ग में अधिक हैं? सरकारी धन, तंत्र और व्यवस्था उसकी पहरेदारी क्यों करती है?
5. जातिवादी प्रथा, कलंक और परंपरा को हटाकर "हिंदू" लिखना अनिवार्य हो। न रहेगी जाति, न होगा जाति के नाम पर अपराध, शोषण, हिंसा, राजनीति और हक़मारी। बेटी-रोटी का संबंध देश का उज्ज्वल भविष्य है। एक श्रेष्ठ भारत, फिर विश्वगुरु भारत होगा।
सोशल एक्टिविस्ट नेहा भारती ने कहा कि "अगर कोई लड़की सुंदर है तो सारे ब्राह्मणवादी लोग कह देते हैं कि तू तो दलित या जाटव लग ही नहीं रही।"
यह बात सुनकर मुझे वर्ष 2021 का अपना अनुभव याद आ गया।
मैं SC/ST एक्ट के मेरे मामले में न्याय की मांग लेकर तत्कालीन राजस्थान के मुख्य सचिव निरंजन आर्य से मिलने गया था। निरंजन आर्य जी स्वयं दलित समाज से आते थे। लेकिन बातचीत के दौरान उन्होंने मुझसे कहा, "तू दलित लगता तो नहीं है, अच्छे कपड़े और अच्छे जूते पहने हो।"
ब्राह्मणवाद पर हम लोग हा हल्ला जरूर करते है लेकिन बड़े पदों पर विराजे ऐसे दलित अधिकारियों का यह कौनसा वाद है जो ब्राह्मणवाद से भी ज्यादा खतरनाक है।
₹36,000 करोड़ बने गंगा एक्सप्रेसवे में कुछ ही वक्त में दरार !
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में युवक ने दिखाया एक्सप्रेसवे का क्षतिग्रस्त हिस्सा
हाथ से ही डामर उखाड़ता नजर आ रहा है, जिससे निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
अंधभक्त गोपाल जी ~ हम लोग 40% विश्व गुरु बन गए हैं ,10 साल दीजिये 100% विश्व गुरु बन जाएंगे!
पत्रकार~ कहाँ से आपको ये सब न्यूज़ मिलता है?
अंधभक्त गोपाल जी ~ हम TV 9 भारतवर्ष देखते हैं।
TV 9 भारतवर्ष You did it 🫶🏾🤡
शिक्षक समुदाय को मूर्ख व बेवक़ूब कहना एक शिक्षामंत्री द्वारा दिया गया बयान बेहद शर्मनाक है यह आपकी मनोदशा के स्तर को दर्शाता है । तत्काल माफ़ी माँगनी चाहिए आपको @madandilawar
प्रिंसिपल साहब ने तो हद कर दी...🙄
प्रिंसिपल भंवरलाल शर्मा 11 महीने में 4 दिन स्कूल आए स्टाफ ने विरोध किया तो बोले मेरा संबंध गैंग से भी है।
भंवरलाल ने स्कूल के सरकारी रिकॉर्ड,हाजिरी रजिस्टर अपने घर मंगवा लिए घर पर ही सिग्नेचर करते थे भंवरलाल शर्मा बांरा में पोस्टेड थे पर श्रीगंगानगर में अपने आवास पर रजिस्टर मंगवाकर हाजिरी भर रहे थे... फर्जी तरीके से वेतन उठा रहे थे। 🙄
स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों का भविष्य कैसा होगा जब प्रिंसिपल साहब खुद ही स्कूल नहीं आ रहे हैं और टाइम टू टाइम वेतन उठा रहे हैं।
स्कूल में कार्यरत शिक्षकों को अपना वेतन उठाना हो तो प्रिंसिपल साहब के घर जाना होगा वहां से सिग्नेचर करने पड़ेंगे फिर वेतन मिलेगा प्रिंसिपल साहब तो रईसी से जीवन जी रहे थे।
@RahulGandhi जी, जय भीम।
आपने विनोद जाखड़ जी जैसे जुझारू युवा चेहरे को NSUI की कमान दी।
आज NEET, पेपर लीक, बेरोजगारी, शिक्षा और सामाजिक न्याय के मुद्दों पर देशभर में NSUI जिस तरह सड़कों पर दिखाई दे रही है, वह लंबे समय बाद कांग्रेस संगठन में नई ऊर्जा का संकेत है।
लेकिन एक बड़ा सवाल अभी भी खड़ा है सामाजिक न्याय की बात करने वाली पार्टियों में राज्यसभा और बड़े संवैधानिक मंचों पर दलित, वंचित और ज़मीनी आवाज़ों का प्रतिनिधित्व इतना कमजोर क्यों है?
राजस्थान से आज आपके पास एक ऐतिहासिक अवसर है।
भंवर मेघवंशी जैसे निर्भीक दलित चिंतक, लेखक और स्वतंत्र पत्रकार को राज्यसभा भेजना सिर्फ एक व्यक्ति को टिकट देना नहीं होगा, बल्कि यह उस विचार को सम्मान देना होगा जो संविधान, सामाजिक न्याय और बराबरी की लड़ाई को जमीन पर लड़ता आया है।
भंवर मेघवंशी उन आवाज़ों में से हैं जिन्होंने सत्ता, जातिवाद और अन्याय के खिलाफ बिना डरे लगातार लिखा और बोला है।
आज जब दलित समाज का एक बड़ा वर्ग राजनीतिक प्रतिनिधित्व को लेकर निराश महसूस करता है, तब ऐसा फैसला कांग्रेस की खोई हुई विश्वसनीयता और वैचारिक प्रतिबद्धता को फिर से जीवित कर सकता है।
आज देश का युवा, छात्र, दलित, पिछड़ा और वंचित वर्ग सिर्फ भाषण नहीं, प्रतिनिधित्व चाहता है।
जो सड़क पर लड़ रहा है, संविधान की बात कर रहा है, सामाजिक न्याय की मशाल उठा रहा है उसे संसद तक पहुंचाना ही असली राजनीति है।
इतिहास ऐसे फैसलों को याद रखता है। ऐसे मौके बार-बार नहीं आते।
@kharge@priyankagandhi@kcvenugopalmp@GovindDotasra
धीरे धीरे चाकू घुसेड़ कर मारिए या घप्प से मार दीजिए, इंसान मर तो दोनों केस में रहा ही है। वैसे ही सरकार ये रोज़ थोड़ा थोड़ा पेट्रोल की कीमत बढ़ाते बढ़ाते जो 80 रुपए पर ले आई है उसको सीधा एक बार में ही बढ़ाकर 100 रुपए कर दे। मिडिल क्लास तो बना ही 'मरने' के लिए है, मार दीजिए।