Our Country have 168 Years old Law System with Obsolete/Outdated Laws.
Major Reforms & Digitalization of entire Judiciary System is must for Justice with All.
This is eyewash. Entire masjid needs demolition. Past water dues with penalty collected including demolition charges. Same notice should be given to Electricity supplying Company for giving connection to an illegal entity. Masjid itself has to be classified as illegal and MIAL should be threatened with cancellation of MIAL license if the masjid award is not withdrawn forthwith.
@KiritSomaiya Nothing but larger unlimited appeasement of Muslims. Beggers are flourishing due to such inaction by authority. #hindus must start freedom movement against burocracy helping Muslims for freebies. Why notice needed for illegal connection? Disconnect without notice REPOST PROTEST
@KiritSomaiya No action against all the officials who turned a blind eye to all the illegal occupation / illegal water connection / illegal electricity connections?
Fruits are expensive in India. At least for the middle class.
If you have a family of 5-6 and all of you eat even a little fruit every day, it can easily cost 500–1,000 minimum per day.
So that’s like 15–30K a month.
That’s why people don’t eat fruit every day.
And for the poor, fruits are a luxury that they rarely get to eat.
पत्रकार अपर्णा कुरुप पर केरल पुलिस ने उनके शो में इस्लामी विद्वान कंथापुरम ए.पी. अबूबक्कर मुस्लियार के खिलाफ दिए गए बयानों के लिए एफआईआर दर्ज की है, जिन्होंने कहा था कि महिलाओं को अपने घरों तक सीमित रहना चाहिए और महिलाओं के सार्वजनिक दिखावे से महान विनाश होता है।
अपर्णा कुरुप ने अपने शो में उनकी राय पर सवाल उठाए और आलोचना की।
इसके बाद, बिग टीवी ने न केवल शो का वीडियो सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से हटा दिया, बल्कि अपर्णा ने भी माफी जारी की।
फिर, कुछ दिनों बाद, उन्होंने मौत की धमकियों को लेकर पुलिस के पास पहुंचीं।
और अब, उनके खिलाफ एक मामला दर्ज कर लिया गया है।
ये तथाकथित फेमिनिस्ट, अभिव्यक्ति की आजादी वाले, और बड़ी बिंदी गैंग पूरी तरह चुप हो गए हैं।
अब याद कीजिये, अनिरुद्धाचार्य जी ने महिलाओं को मर्यादा में रहने का उपदेश दिया, तब महीनों तक इन्ही लोगों ने उन्हें पानी पी पी कर कोसा था
लेकिन अब शायद ये गिरोह पितृसत्ता को तोड़ना नहीं चाहते, क्योंकि उन्हें डर है कि इस मामले में उनके अपने सिर ही टूट जाएंगे।
यह कांग्रेसी राशिद दलवी कह रहा है,
क्या ऑपरेशन सिंदूर की किसी राज को छुपाने के लिए ऑपरेशन सिंदूर में शामिल एयर मार्शल को राम मंदिर का सीईओ बनाया गया है....?
यही कांग्रेसी जब चुनावी नतीजे आते हैं,
तब हाय ईवीएम हाय ईवीएम, वोट चोरी वोट चोरी चिल्लाकर अपना लहंगा और घाघरा उठाकर पागलों की तरह भागते हैं ....!
इन कांग्रेसी कु@त्तों को देश की सेना पर भी भरोसा नहीं है,
और इन कांग्रेसी कु@त्तों के इस घटिया विचार पर इनको कौन वोट देगा भाई ....?
ये महाराष्ट्र की भाजपा के मुख्यमंत्री मंत्री देवेंद्र जी की वाइफ अमृता जी है इनके पतिदेव चुनाव के समय धर्म बचाते है और और किससे धर्म बचाते है यह भी आप जानते ही होंगे!₹, क्या क्या किसके खिलाफ बयान देते है कट्टर हिन्दू बनकर वो वो आप सब भी जानते होंगे। पर न्यूज़ यह है कि देवेंद्र जी वाइफ अमृता जी का कहना है यदि मुसलमान नवरात्रि गरवे में आये तो किसी को कोई दिक्कत नही होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि अगर कोई मुस्लिम व्यक्ति गरबा देखने या उसका आनंद लेने आता है, तो इसमें कुछ भी गलत नहीं है। उनका कहना है कि त्योहार और उत्सव सभी को साथ लेकर चलने वाले होने चाहिए और किसी समुदाय के व्यक्ति को केवल धर्म के आधार पर रोकना उचित नहीं है।
इनके बयान से मुस्लिम वर्ग में खुसी की लहर आ गई है!
हमे क्या मैं कुछ बोल दूंगा तो कोंग्रेसी पाकिस्तानी सपाई से लेकर पता नही क्या क्या 2 कौड़ी के IT सेलिये टैग दे देंगे इसीलिए मुझे कुछ नही बोलना।
आप सब इनके इस बयान को किस प्रकार देखते है जरूर बताएं!
हिंदू और हिंदुत्व के नाम पर वोट बटोरने वाली भाजपा और उसके नेताओं का तथाकथित "मुस्लिम प्रेम" अब धीरे-धीरे और खुलकर पूरी तरह जनता के सामने आ रहा है।
कल तक जो पार्टी तुष्टीकरण के खिलाफ होने का दम भरती थी, आज उसी के बड़े चेहरों के दोहरे मापदंड देखकर वह सनातनियों के लिए एक कलंक बनती जा रही है।
एक तरफ महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की पत्नी अमृता फडणवीस सरेआम मीडिया में बयान देती हैं कि डांडिया और दुर्गापूजा जैसे पवित्र धार्मिक पंडालों में अगर मुस्लिम लड़के केवल आनंद या मनोरंजन के लिए आते हैं, तो उन्हें बेरोकटोक आने देना चाहिए और इसमें कुछ भी गलत नहीं है।
यह बयान सीधे तौर पर उन हिंदू संगठनों और कार्यकर्ताओं के मुंह पर तमाचा है जो इन त्योहारों की पवित्रता और सुरक्षा को बनाए रखने के लिए दिन-रात जमीन पर संघर्ष करते हैं।
दूसरी तरफ, केवल अमृता फडणवीस ही नहीं, बल्कि एक महानुभाव तो लगातार इस सुर में सुर मिलाते दिखते हैं, जिन्होंने न्यूयॉर्क में खुले मंच से यह तक कह दिया कि जो हिंदू यह सोचता है कि भारत में मुसलमान नहीं होने चाहिए, वह हिंदू ही नहीं है।
चाहे शीर्ष पर बैठे संगठन के प्रमुख हों, मुख्यमंत्री की पत्नियां हों या भाजपा के कई अन्य कद्दावर नेता,सत्ता का स्वाद चखते ही इन सबका ढोंग अब साफ उजागर हो चुका है।
हिंदुत्व का इस्तेमाल सिर्फ सत्ता की सीढ़ी चढ़ने के लिए किया गया, और सरकार बनते ही ये दोगले नेता उसी बहुसंख्यक समाज की भावनाओं और सुरक्षा को ताक पर रखकर खुलकर अपनी तुष्टीकरण की राजनीति को आगे बढ़ाने में व्यस्त हो गए हैं।
कैसा हिंदूवादी नेता है जिसका बीवी एक मुसलमान के साथ ठुमके लगा रहा है!
जिससे अपना घर नहीं संभल रहा है, सुने हैं वह संघ की कृपा से वो भारत का प्रधानमंत्री बनने वाला है।
गजब का तमाशा चल रहा है देश में जनता को यह लोग मूर्ख ही नहीं महा मूर्ख समझता है।
नेहा बोरा पहुंची यूपी, CM योगी को प्रयागराज से दी चुनौती, गद्दी से उखाड़ फेंकेंगे ..🎯😎
पगली वो चाय वाले नहीं है गाय वाले है ..
पड़े लिखे समझदार ततै*या के छ*त्ते में हाथ नहीं डालते, एक शब्द उल्टा निकला तो बाबाजी सीधा टां.... देते हैं ..
3 वर्ष पूर्व मुस्लिम लड़के रियाज़ अली के साथ अमृता फडणवीस का वीडियो काफी विवादस्पद रहा था...
अब इन्ही अमृता फडणवीस ने यह कहकर बहुत बड़ा विवाद पैदा कर दिया है कि गरबा -डांडिया और दुर्गापूजा पंडालों में मुस्लिम लड़के आनंद के लिए आते हैं तो उन्हें आने देना चाहिए...
फडणवीस सरकार अल्लाह की मेहरबानी पर टिकी हुई है
इस निर्णय ने योग्य सवर्ण छात्रों के मन में असंतोष पैदा कर दिया है
और (सुप्रीम कोर्ट) को भी हस्तक्षेप करने पर मजबूर कर दिया है।
- सुप्रीम कोर्ट ने कहा
कल्पना कीजिए कि आप एक ऐसे डॉक्टर से अपनी सर्जरी करवा रहे हैं, जिसने प्रवेश परीक्षा में नकारात्मक (माइनस 40) अंक प्राप्त किए थे
सुनने में यह डरावना लग सकता है, लेकिन NEET PG 2025-26 की काउंसलिंग में यह एक कड़वी सच्चाई बन चुका है।
चिकित्सा शिक्षा के गिरते मानक और माइनस 40 कट-ऑफ का विवाद
केंद्र के मोदी सरकार द्वारा कट-ऑफ स्कोर को घटाकर,शून्य और नकारात्मक' तक लाने के फैसले के बाद👇🏻👇🏻
सरकारी मेडिकल कॉलेजों में एमएस (MS) ऑर्थोपेडिक्स और जनरल सर्जरी जैसी महत्वपूर्ण सीटें महज 4 से 10 अंकों पर आवंटित की गई हैं।
माननीय सुप्रीम कोर्ट का सख्त सवाल👇🏻👇🏻
आखिर मोदी सरकार ने मानकों में इतनी बड़ी गिरावट क्यों की ?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या यह फैसला देश के स्वास्थ्य तंत्र के लिए घातक साबित नहीं होगा इस पूरे मामले पर अब सुप्रीम कोर्ट ने कड़े सवाल उठाए हैं
कोर्ट ने 'नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन इन मेडिकल साइंसेज' (NBEMS) से पूछा है कि आखिर कट-ऑफ में इतनी अधिक कटौती क्यों की गई ?
न्यायालय के समक्ष दो मुख्य पक्ष हैं:
सरकार का तर्कः सीटें खाली न रहें और संसाधनों का पूर्ण उपयोग हो। विशेषज्ञों की चिंताः चिकित्सा शिक्षा और पेशेवरों के मानकों में भारी गिरावट आ सकती है।
अदालत के अनुसार, इन दोनों के बीच संतुलन बनाना अनिवार्य है। कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा कि यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि इस फैसले का मेडिकल शिक्षा के स्तर पर क्या प्रभाव पड़ेगा। फिलहाल, बोर्ड से इस पर विस्तृत जवाब मांगा गया है।
राशिद अल्वी साहब को
गहरा सदमा लगा है कि
फ़िल्म 'हनुमान अंश'
देखकर हिंदू अचानक
'धार्मिक' कैसे होने लगे!
उधर आरफ़ा ख़ानम की रात की नींद इस बात पर उड़ी हुई थी कि 'धुरंधर' फ़िल्म देखकर देश के लोग 'राष्ट्रवादी' क्यों बन रहे हैं!
ग़ज़ब का लॉजिक है इन स्वघोषित 'इंटेलेक्चुअल्स' का!!
दशकों तक बड़े परदे पर
'बिल्ला नंबर 786' का चमत्कार, कराची से आयातित कलाकारों की नज़ाकत और हर दूसरी फ़िल्म में तिलकधारी को विलेन देखने के इतने आदी हो चुके हैं कि अब जैसे ही स्क्रीन पर सनातन संस्कृति की गूंज या राष्ट्रवाद की ललकार सुनाई देती है,
इनका सेक्युलर फ़्रेमवर्क
भरभराकर गिर पड़ता है।
दर्द फ़िल्म से नहीं है, दर्द इस बात से है कि देश का आम दर्शक अब उनके सेट किए गए प्रोपेगैंडा को नकार कर अपनी जड़ों और स्वाभिमान पर गर्व करने लगा है।
इस दर्द की दवा बस यही है।
भाजपा शासित राज्यों में ऐसी फ़िल्मों को तुरंत टैक्स-फ़्री किया जाए, ताकि यह 'कौमी सिरदर्द' और थोड़ा गहरा हो और सिनेमाघरों के बाहर का हाउसफुल बोर्ड देखकर इनको हक़ीक़त का आईना साफ़-साफ़ दिखता रहे!
जय श्री राम!
भारत माता की जय!
एक CM की पत्नी उन्हें ले डूबेगी।
जब राजनैतिक और वैचारिक ज्ञान ना हो तो घर वालो पर कम से कम इतना कंट्रोल तो होना ही चाहिए कि वो सार्वजनिक स्थान पर अपने अल्पज्ञान का प्रदर्शन ना करे।
कंट्रोल कीजिए नेताजी, डिजिटल युग है भविष्य में एक भी बयान को डिफेंड करना मुश्किल हो जाएगा।...
अगर गरबा इतना ही पसंद है पूरी फैमिली के साथ क्यों नहीं आते है वो ?
क्यों अपनी घर के महिलाओं को घर छोड़ कर आते है ??