चुनाव आने से पहले सभी विपक्षी पार्टियों को सीजेपी के साथ मिलकर ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा लेना चाहिए नहीं तो , इतना प्रचार करना पैसा बर्बाद करना कोई मतलब भी नहीं होगा क्योंकि फिर से वो लोग जो चाहेंगे वो करेंगे...
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रायबरेली में सपा नेताओं की ओछी राजनीति!
अखिलेश यादव को भगवान श्रीकृष्ण के रूप में दिखाकर सनातन आस्था का मजाक उड़ाया जा रहा है।
जो कभी 'कृष्ण जन्मभूमि' के पक्ष में नहीं खड़े हुए, वो आज वोट बैंक के लिए भगवान बनने का ढोंग कर रहे हैं।
जगज़ाहिर है कि साल 2022 के यूपी विधानसभा चुनाव में 'तीन-तिकड़म' कर सपा ने राष्ट्रीय लोकदल और सुभासपा से हाथ मिलाने के साथ कई वजूद वाले नेताओं को अपने दल में शामिल कराया, इसके बावजूद वह भाजपा को सत्ता से नहीं हटा सकी। उसके सभी सामाजिक और राजनीतिक समीकरण धरे के धरे रह गए।
दरअसल, सपा के पास न कोई दृष्टिकोण है औ��� न विश्वसनीय नेतृत्व। जनता का भरोसा तो उसमें कतई नहीं है। इसलिए इस बार भी उसका जातीय समीकरणों और खोखले नारों का खेल धरा का धरा रह जाएगा।
कुल मिलाकर लब्बोलुआब यह है कि सपा बहादुर श्री अखिलेश यादव की कोई भी पैंतरेबाज़ी तीसरी बार भी भाजपा की बाज़ी पलट नहीं पाएग���। उत्तर प्रदेश में भाजपा की हैट्रिक तय है और तीसरी बार भी कमल ही खिलेगा।
"मैंने दोस्त को 1 लाख UPI किया, कोई पैसा नहीं लगेगा। मैंने एक दुकानदार को 2500 पेमेंट किया, उसके पैसे लगेंगे? इसका क्या लॉजिक है? कोई मुझे बताए कि इसमें सरकार का कौन सा खर्च आता है?
RBI ने अपना 3 लाख करोड़ का सरप्लस सरकार को सौंपा है। सारे बैंकों का मुनाफा 2026 में 4 लाख करोड़ है। NPCI का प्रीटैक्स प्रॉफिट 1900 करोड़ है। जब नुकसान किसी को नहीं है तो फिर दुकानदारों से वसूली किस बात की होगी? मैंने इससे बड़ी सरकारी मूर्खता देखी नहीं।"
- अश्नीर ग्रोवर, भारत पे के पूर्व एमडी