जिस तरह से राम मंदिर को लेकर ख़बरें आ रही है वह बहुत ही शमर्नाक है!
किसी श्रद्धालु ने कितनी उम्मीद आस्था से चांदी दान किया वह गायब है!
किसी व्यापारी ने सोने दान में दी वह गायब!
कितनी मन्नतों से लोग इसे भगवान के सामने चढ़ाते हैं!
उसका भयावह परिणाम देखिये, लोगों ने राम मंदिर में चढ़ावा कम कर दिया! आस्था कम नहीं हुई! बल्कि उन्हें यह सन्देश गया की जो चढ़ावा वह भगवान के दर पर चढ़ाते हैं वह चोरों के हाथ लग रही है!
इससे भी बड़ा अपमान हिन्दू धर्म की आस्था का हो सकता है ?
जिस राज्य में बस आरोप के आधार पर बुलडोज़र जस्टिस की परम्परा शुरू की गयी, बिना ट्रायल के घर गिराए गए, उस राज्य में राम मंदिर के नाम पर इतना बड़ा शर्मनाक घोटाला हो गया तो बुलडोज़र तो दूर, केस तक दर्ज करने में हाथ कांपने लगे!
यही है समान न्याय? यही है राम राज्य की परिकल्पना ? कमजोर,वंचितों पर सरकार अपनी पूरी तरकत दिखाए और जब अपने साइड के लोग पकड़ में आ जाएं तो मौन वास में चले जाएं?
उम्मीद करते हैं हर अपराध में यही मानक उत्तर प्रदेश सरकार उठाएगी! पहले पूरी जांच! कानून का पालन होगा! तब एक्शन होगा!
Good to see that the RSS debate is now attracting “legal luminaries” too.
I am ready to discuss, deliberate and debate this issue anytime, anywhere on law, Constitution, transparency and accountability.
And I sincerely hope this post targeting me by @JethmalaniM will not be billed to either the BJP or the RSS.
Mr. Mahesh, you say:
“A dynast indulged by inheritance does not become larger than the Constitution merely because he sits in a ministerial chair.”
Interesting pravachan coming from the son of Shri Ram Jethmalani.
A surname may open doors, but it does not automatically give weight to every argument. And certainly, invoking the Constitution while defending opacity does not make the argument constitutional.
Let me remind you of a basic distinction:
You are selected representative.
I am an elected public representative
Not once. Not twice. But, Thrice.
So, before lecturing me on constitutional morality, please answer the real question: why should any organisation of such scale, influence and public activity remain outside ordinary legal transparency?
Please get yourself appointed as the RSS designated legal representative and respond to our queries in my office if they allow you.
Also, this applies equally to all the “legal luminaries” writing editorials and delivering pravachans on TV.
PS: if you don’t mind me asking Mahesh ji, do your children:
- attend RSS shakhas
- spend time Gau Shalas
- drink Gau mutra
- Are they Gau or Dharam Rakshaks (at least part time)
If they aren’t doing it, are they also anti nationals like me?
BJP’s mouthpiece @JagranNews and @anantvijay are publishing such news that suggests internal fighting within the BJP.
[Speculation: Perhaps it’s the donation sharing issue between two or three groups within the party? ]
राममंदिर की स्थापना होने के बाद रामलला को चढ़ावा और भेंट खूब प्राप्त हुआ। लेकिन दान की चोरी का आरोप सामने आने के बाद लोग भी अब सामने आकर अपनी भेंट को लेकर आरोप लगाने लगे हैं। कुछ ऐसा ही मामला जौनपुर निवासी कारोबारी के सामने भी आया जो अब चर्चा में आ गया है।
वर्ष 2025 में रामलला को चरण पादुका व हार चढ़ाने वाले अमाई निवासी अजय विश्वकर्मा को आजतक इसकी रसीद नहीं मिल सकी है। वह घर से 22 अक्टूबर 2025 को पैदल अयोध्या के लिए निकले थे। 30 अक्टूबर को सवा किलो चांदी का हार व तकरीबन 300 ग्राम वजनी चांदी की चरण पादुका श्रीराम को समर्पित किया था।
प्रभु श्री राम पर अटूट विश्वास रखने वाले अजय मुंबई में रहकर कारोबार करते हैं। उन्होंने कहा कि चढ़ावे के बाद रसीद मांगने पर कहा गया कि पंजीकृत कराए गए मोबाइल फोन नंबर पर इसे भेज दिया जाएगा।
हालांकि आजतक उन्हें कोई रसीद नहीं मिली है। साथ ही हार को प्रभु के गले में धारण कराए जाने के बाद फोटो भी उनको आज तक नहीं भेजी गई।
राम मंदिर में करोड़ों के चढ़ावे में कथित गबन को लेकर उपजे विवाद पर उन्होंने किसी तरह की प्रतिक्रिया देने से मना कर दिया। कहा कि इसकी जांच एजेंसियां कर रही हैं। ऐसे में उन्हें इसे लेकर कुछ नहीं कहना है।
हालांकि मंदिर प्रशासन की ओर से इस लापरवाही को लेकर वह जरूर आहत महसूस करते हैं। हालांकि जांच शुरू होने के बाद अब माना जा रहा है कि चढ़ावे को लेकर नई जानकारी सामने आ सकती है।
#Jaunpur #UP #RamMandir #JagranNews
कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता।
भगवान स्वयं प्रकट होकर भी सच कह दें, तब भी शायद कोई फ़र्क़ न पड़े।
भाजपा के पास नागरिक कम, अनुयायी ज़्यादा हैं।
जबकि कांग्रेस और विपक्ष के पास अनुयायी कम, नागरिक ज़्यादा हैं।
राम मंदिर घोटाला सरकार और बीजेपी के लिए बहुत ही डैमेजिंग है और उनके कोर नैरेटिव को चोट पहुँचाता है।
धर्म के नाम लड़की था करोड़ों का बड़ा घोटाला ऐसी जगह और ऐसे लोगों के बीच हुआ है जो वे दूर दूर तक “कांग्रेस विपक्ष अखिलेश मुस्लिम नेहरू सोरोस विदेशी साजिश” जैसी पिच पर ले जा सकते हैं जहाँ पर मीडिया इस मुद्दे को डाइवर्ट कर सके।
और यह ऐसा मुद्दा है जो मीडिया के नहीं चाहने के बावजूद हिंदी पट्टी में गाँव गाँव तक पहुँच रहा है!
વાલ્મિકીથી લઈને કેટલાય રામચરિત્રો આ દેશમાં લખાયા અને તેનું વાંચન થયું હશે! મહાત્મા ગાંધીએ કેવા રામરાજ્યની કલ્પના કરેલી !
૨૦૨૬માં અયોધ્યાના રામમંદિરને જે રાજકીય લોકો એક સિદ્ધી માને છે, ત્યાં આજે ધર્મ અને રાજકારણનું કોકટેલ શું કરી રહ્યું છે એ જોઈ રહ્યા છીએ... રામ કે નામ પર…
जय श्री राम! श्री चंपतराय जी ने अपना पूरा जीवन राम मंदिर आंदोलन को समर्पित कर दिया। केमिस्ट्री के शिक्षक से VHP के अंतरराष्ट्रीय उपाध्यक्ष और ट्रस्ट के महासचिव बनकर उन्होंने रामलला के भव्य मंदिर का निर्माण देखा। झूठे आरोपों से उनके चरित्र पर कोई आँच नहीं आ सकती। उनका जीवन ही रामभक्ति का प्रमाण है!
अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल की हिम्मत में भारी गिरावट
Brent Crude oil लगभग 79.5 - 79.9 USD प्रति बैरल
उम्मीद है भारत में पेट्रोल डीजल की क़ीमत पुरानी दरों पर लौटनी शुरू होगी… एक नहीं तीन बार में सही 🤔
જ્યાં ધર્મ એ સત્તા અને રાજકારણનું સાધન બને છે.
તે ધર્મના કરોડો લોકો તમારા મતદાતા બને છે એ જાણીને કે આ નેતા અમારા ધર્મના રક્ષક છે!
પણ જ્યારે તેમની સાથે છળ થાય છે ત્યારે ઘણું મોડું થઈ ગયું હોય છે, એ કરોડો લોકો શુદ્ધ ધર્મના નહીં પણ એ રાજકીય ઉદ્ધારક નેતાના ગુલામ બની ગયા હોય છે.
ग़ुलामी! जानते हैं क्या होती है? इस विडीओ में समझ आएगा।
समस्या भाषा नहीं है, नरेंद्र मोदी अंग्रेज़ी नहीं बोल पाते, इसलिए हिन्दी बोल रहे हैं और अनुवादक अंग्रेज़ी में बोल रहा है, यहाँ तक कोई दिक़्क़त नहीं है।
दिक़्क़त है शब्दों में, दिक़्क़त है बॉडी लैंग्वेज की, दिक़्क़त है राग-दरबारी गाने से। आमतौर पर अमेरिका के राष्ट्रपति को 'मिस्टर प्रेसिडेंट' कह कर सम्बोधित किया जाता है। लेकिन यहाँ नरेंद्र मोदी उन्हें बार-बार 'एक्सेलेन्सी' कह रहे हैं। ये है सबसे बड़ी ग़ुलामी की निशानी।
अब आते हैं शब्दों पर। नरेंद्र मोदी, डॉनल्ड ट्रम्प की किस बात के लिए भूरि-भूरि प्रशंसा कर रहे हैं? पूरी दुनिया में तहलका मचाने के लिए? पश्चिमी एशिया में कौन सी शांति स्थापित की ट्रम्प ने, जिसकी नरेंद्र मोदी इतनी तारीफ़ किए जा रहे हैं?
हमारे नाविक मारे गए, उसके लिए इतने मीठे शब्दों में अनुनय-विनय? कि उनकी जान की रक्षा महत्वपूर्ण है? माना कि डिप्लोमैटिक बातचीत में आप किसी का कॉलर नहीं पकड़ सकते, लेकिन इतना घिघियाया भी नहीं जाता। आपको बोलना चाहिए था कि भारत शान्ति का पक्षधर ज़रूर है, लेकिन भारत की सेनाओं ने चूड़ियाँ नहीं पहन रखी हैं। अमेरिका की ऐसी कोई भी धृष्टता, हमारे सम्बन्ध हमेशा के लिए चौपट कर सकती है।
आप हाथ में पर्ची लिए एक-एक लाइन डर-डर के बोल रहे हैं, आपका हलक़ सूखा जा रहा है। बुला लीजिए किसी बॉडी लैंग्वेज एक्स्पर्ट को, और पूछिए उससे कि क्या ये विडीओ देख कर ऐसा नहीं लग रहा है कि शहंशाह के दरबार में बैठा एक मुलाज़िम, उस शहंशाह की शान में क़सीदे पढ़ रहा है?
पुराने ज़माने में अगर बादशाह सलामत किसी को चाकू फेंक कर मारें और निशाना चूक जाए तो दरबारी कहते थे कि 'ख़ंजर ने ना-फरमाबरदारी कर दी' मतलब चाकू ने महराज के आदेश की अवहेलना की है। आप भी कुछ वैसा करते नज़र आ रहे हैं।
@narendramodi जी, पूरी दुनिया में एक सनकी ने जीना हराम कर रखा है, और आप उसे 'शान्ति के प्रयासों' के लिए धन्यवाद कर रहे हैं?
बेहद शर्मनाक है ये!
"भारत में हुआ AI Summit पूरी तरह अव्यवस्थित था"
◆ Anthropic के CEO Dario Amodei ने भारत में आयोजित India AI Impact Summit 2026 को लेकर कहा
#AISummit#CEO | #DarioAmodei