@VipinPrakashSh7 कॉमन सीनियरिटी का ऐतिसाहिक निर्णय वर्तमान और भविष्य के सभी विवादों का स्थायी समाधान है।
कॉमन सीनियरिटी ही न्याय हैं जो सुप्रीम कोर्ट ने कर दिया है।
कोमन सीनियरटी और पदौनति के संदर्भ में सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अनुपालना कराने को लेकर आज मुख्यमंत्री कार्यालय, कार्मिक विभाग अत्ति शासन सचिव शिक्षा, विधि विभाग को ज्ञापन दिया, सकारात्मक हल निकालने का आश्वासन मिला- राजस्थान प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षक
@svoruganti1466@BhajanlalBjp@DIPRRajasthan@RajGovOfficial@RajCMO@PIBJaipur सुप्रीम कोर्ट और हाइकोर्ट के प्राकृतिक न्याय व समानता के वीपी डीपीसी में कामन सीनियरिटी के निर्णय को अविलंब लागू करें सर
न्यायालय ने शिक्षा विभाग में प्राध्यापकों (Lecturers) की वरिष्ठता (Seniority) को लेकर एक ऐतिहासिक और न्यायसंगत फैसला सुनाया है।
माननीय सर्वोच्च न्यायालय व माननीय राजस्थान उच्च न्यायालय के आदेश के बावजूद शिक्षा विभाग 2 माह से वरिष्ठता सूची पर फ़ैसला नहीं कर रहा। इसको लेकर शिक्षकों में असंतोष है।
विभाग को निर्णय लेकर और मेरिट को लागू कर पदोन्नति करनी चाहिए। किसी भी वरिष्ठता में मेरिट ही आधार होनी चाहिये। सभी विषयों को समान अवसर मिलना चाहिये। अवसर की समानता और मेरिट से पदोन्नति, माननीय सर्वोच्च न्यायालय व उच्च न्यायालय के यही तो आदेश है।
इस कार्य में विभाग को देरी नहीं करनी चाहिये। जिस तरीके से डीपीसी की गई उस से ना केवल हिंदी, इतिहास, संस्कृत, भूगोल, वाणिज्य, अर्थशास्त्र, जीव विज्ञान, भौतिक विज्ञान, गृह विज्ञान विषयों के साथ मैरिट व समानता का निर्धारण नहीं हुआ।
और इतना ही नहीं अगर इन विषयों की पदोन्नति नहीं हुई तो इन विषयों के पद भी रिक्त नहीं होंगे तो हिंदी, इतिहास, संस्कृत, भूगोल, वाणिज्य, अर्थशास्त्र, जीव विज्ञान, भौतिक विज्ञान, गृह विज्ञान विषयों के लगभग 8 लाख से अधिक प्रशिक्षित #बेरोज़गार विद्यार्थियों ( जो इन विषयों में MA, B.Ed है) के साथ भी अन्याय होगा क्यूंकि आगे आने वाली व्याख्याता भर्ती में उनके विषय में कोई वैकेंसी नहीं आ पायेगी।
अगर एक भर्ती के प्रत्येक विषय से कॉमन वरीयता बने तो हमेशा के लिए नज़ीर बनेगी और जब भी पदोन्नति होगी तो सभी विषयों को समान रूप से पदोन्नति का लाभ मिलेगा और सभी विषयों के समान रूप से पद खाली होंगे और बेरोजगार अभ्यर्थियों के लिए भी समान रूप से पद उपलब्ध रहेंगे। इसमें अहित किसी का नहीं है बल्कि सबके साथ समानता है। अब जिसकी मेरिट में रैंक उच्च है उसको पहले लाभ मिलेगा तो उसको ही मिलना चाहिए!! जिसकी रैंक नीचे है क्या उसको पहले लाभ मिलेगा??
इसलिए सरकार माननीय न्यायालय के इस निर्णय को इस रूप में भी देखे क्यूंकि जिन दो विषयों के व्याख्याता सरकार को गुमराह कर रहें हैं मेरिट से सीनियोरिटी में उनका भी नंबर आ रहा हैं। और उनके साथ ही सभी विषयों के मेरिट क्रमानुसार नंबर आ रहा हैं।
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📍चुरू
राजस्थान शिक्षा सेवा प्राध्यापक संघ (रेसला) जिला इकाई चुरू द्वारा आयोजित जिला स्तरीय शैक्षिक अधिवेशन में व्याख्याता साथियों से विभिन्न शैक्षणिक व सेवा से संबंधित मुद्दों पर संवाद किया।
📌वरिष्ठता पर माननीय न्यायालय के निर्णय को लागू करने
📌क्रमोन्नत विद्यालयों में पद सृजन करने
📌MACP L-15 के संबंध में आदेश जारी करने
📌वाईस प्रिंसिपल/वरिष्ठ व्याख्याता पद डाईंग करने
📌MBC व्याख्याताओं के प्रकरण का निस्तारण करने
📌व्याख्याता का केंद्र सरकार के समान वेतन करने अथवा 5400 ग्रेड पे करने
📌कैडर पुनर्गठन के माध्यम से पदोन्नति के अवसरों में बढ़ोतरी करने के संबंध में संवाद हुआ।
जिला अधिवेशन के पश्चात् निर्वाचन द्वारा निर्वाचित जिलाध्यक्ष श्री रजनीश धुवाँ, जिला मंत्री श्री डॉ. भानीराम मेघवाल, सभाध्यक्ष श्री मुकेश शर्मा को हार्दिक बधाई। निवर्तमान जिलाध्यक्ष श्री अमित सारण जी को शानदार कार्यक्रम के लिए धन्यवाद।
निर्वाचन पर्यवेक्षक श्री अविनाश सारण व निर्वाचन अधिकारी श्री अर्जुन सिंह को निर्विरोध व निर्विवाद चुनाव संपन्न कराने के लिए आभार
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कोमन सीनियरटी और पदौनति के संदर्भ में सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अनुपालना कराने को लेकर आज मुख्यमंत्री कार्यालय, कार्मिक विभाग अत्ति शासन सचिव शिक्षा, विधि विभाग को ज्ञापन दिया, सकारात्मक हल निकालने का आश्वासन मिला- राजस्थान प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षक