बाड़मेर के वरिष्ठ पत्रकार श्री अशोक जी शेरा को जन्मदिवस की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ।
प्रभु श्री राम से आपके उत्तम स्वास्थ्य एवं दीर्घायु जीवन की कामना करता हूँ।
@ashokshera94
शिव MLA श्री @RavindraBhati__ जी के सोशल मीडिया अकाउंट हैंडल संचालन करने वाले एव कर्मठ और ईमानदार
विक्रम सिंह साजियाली को जन्म दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं
@Vikram_sajiyali 🌹🌹
इसे कहते है अनुशासन और संस्कार का परिचय देना
शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी का हजारों गाड़ियो का काफिला जिसमे एक भी पुलिस की गाड़ी नही थी फिर भी पूर्ण रूप से सभ्य तरीके से काफिला गुज़रा
और दूसरी तरफ़ कल जो घटना घटित हुई उसने साबित कर दिया कि हमारा एक ही मकसद है अराजकता फैलाना।
भारत के किसी भी कोने में चले जाइए, रविन्द्र सिंह भाटी के प्रति लोगों का स्नेह और अपनापन सहज रूप से देखने को मिल जाएगा। चाहे दिल्ली हो, मुंबई, चेन्नई हो या हैदराबाद, हर जगह ऐसे लोग मिल जाएंगे जो घंटों उनके इंतजार में खड़े रहते हैं। कई बार देर रात तक केवल एक झलक पाने के लिए लोगों का उत्साह यह बताने के लिए पर्याप्त है कि भाटी ने जनमानस के बीच एक अलग स्थान बनाया है।
राजस्थान की राजनीति में जिस प्रकार का भावनात्मक जुड़ाव और स्वैच्छिक जनसमर्थन रविन्द्र सिंह भाटी को प्राप्त है, वैसा उदाहरण बहुत कम देखने को मिलता है। यह समर्थन किसी पद, सत्ता या राजनीतिक समीकरण का परिणाम नहीं, बल्कि जनता के विश्वास का प्रतिबिंब प्रतीत होता है।
वर्तमान समय में देश के विभिन्न कार्यक्रमों में उनकी बढ़ती उपस्थिति राजनीतिक दृष्टि से भी अनेक संकेत देती है। राजनीति संभावनाओं का क्षेत्र है और भाटी की सक्रियता को देखते हुए यह माना जा सकता है कि आने वाले समय में प्रदेश और देश की राजनीति में कोई नई दिशा अथवा नई भूमिका सामने आ सकती है।
आज की स्थिति में एक बात स्पष्ट दिखाई देती है कि भाटी के साथ न तो सत्तापक्ष पूरी तरह खड़ा नजर आता है और न ही विपक्ष। यदि कोई शक्ति उनके साथ मजबूती से खड़ी दिखाई देती है, तो वह है आमजन का विश्वास। राजनीति में दलों का समर्थन बदल सकता है, लेकिन जनता का स्नेह और आशीर्वाद ही किसी भी नेतृत्व की सबसे बड़ी ताकत होता है।
रविन्द्र सिंह भाटी जैसलमेर से निर्दलीय लड़े तो भी जीत जाएंगे, आज के टाइम जैसलमेर की जनता का स्थानीय नेताओं से भरोसा उठ गया है यह समय की डिमांड है @RavindraBhati__
TEAM-RSB 🚩
ट्विटर टीम के सभी साथियों से निवेदन है कि एक दूसरे से जुड़ें, एक-दूसरे को फॉलो करें रिपोस्ट करने वाले सभी साथी एक दूसरे से जुड़े।
हमारी पहचान हमारी एकता है,हमारी नींव विश्वास है ❤️
आओ मिलकरTEAM-RSB को और अधिक संगठित सक्रिय और मजबूत बनाएं !!
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झुकती है दुनिया झुकाने वाला चाहिये..
गिरल माइंस आंदोलन समाप्त: श्रमिकों की 24 मांगें मंजूर, विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने की धरना खत्म की घोषणा.... राजस्थान में एक ही मर्द राजपूत नेता है... रवीन्द्र सिंह भाटी
25 दिनों तक गिरल की धरती पर संघर्ष की मशाल जलती रही।
5 मई को मजदूर साथियों की अपील पर विधायक रविन्द्र सिंह भाटी स्वयं धरना स्थल पहुंचे। लगातार वार्ताएं हुईं, समाधान के प्रयास हुए, लेकिन कई बार ऐसा भी हुआ कि बातचीत में सहमति जताने वाले लोग बाहर आकर अपनी ही बातों से मुकर गए। यह सब मजदूरों ने भी देखा और जनता ने भी।
19 मई को महत्वपूर्ण वार्ता हुई, परंतु मांगें सरकार और प्रशासन दोनों से जुड़ी होने के कारण तत्काल सहमति नहीं बन सकी। समय मांगा गया, लेकिन धरना जारी रहा। संघर्ष जारी रहा।
जब प्रशासन की संवेदनहीनता और सुस्ती साफ दिखाई देने लगी, तब भाटी ने आसपास के गांवों का दौरा कर जनजागरण शुरू किया। एक व्यापक और निर्णायक आंदोलन की तैयारी होने लगी। लोग जुड़ने लगे, आवाज मजबूत होने लगी।
लेकिन 5 जून की सुबह एक दुखद खबर आई। धरने पर बैठे एक मजदूर साथी की तबीयत बिगड़ गई और उनका निधन हो गया। यह केवल एक व्यक्ति की मृत्यु नहीं थी, बल्कि व्यवस्था की उदासीनता पर बड़ा सवाल था।
उस कठिन समय में भी रविन्द्र सिंह भाटी अपने साथियों के साथ सुबह से शाम तक डटे रहे। पीड़ित परिवार की सहमति और सम्मान के साथ उन्हें न्याय दिलाने का प्रयास किया गया। इसके बाद पुनः गिरल धरने को आगे बढ़ाने की तैयारी शुरू हुई।
रात होते-होते सरकार और प्रशासन को भी एहसास हुआ कि अब इस आंदोलन की अनदेखी संभव नहीं है। यदि संवेदनहीनता जारी रही तो उसके गंभीर परिणाम होंगे।
इस पूरे घटनाक्रम में भाटी ने निर्णय स्वयं लेने के बजाय मजदूरों पर छोड़ा। उनका स्पष्ट कहना था.... “यह लड़ाई आपकी है, आप जो निर्णय करेंगे, मुझे स्वीकार होगा।”
इसके बाद मजदूर संघ और प्रशासन के बीच लंबी वार्ता हुई। अंततः सभी मांगों पर सहमति बनी। संघर्ष को सफलता मिली। मजदूरों को न्याय मिला।
यह जीत केवल मांगों की नहीं, बल्कि धैर्य, एकता और विश्वास की जीत है।
एक विधायक ने राजनीति की परंपरागत परिभाषा को बदलने का प्रयास किया। जिसने कहा था कि हर परिस्थिति में आपके साथ रहूंगा, वह संघर्ष के पहले दिन से लेकर आधी रात तक, हर कठिन मोड़ पर साथ खड़ा दिखाई दिया।
यही जुबान की कीमत होती है।
यही जनप्रतिनिधित्व का धर्म होता है।
और यही वह राजनीति है, जिसमें जनता केवल वोट नहीं, बल्कि विश्वास भी सौंपती है।
#बाड़मेर #राजस्थान