If you're talking about "fair education system," start with Reservation.
It is one of the biggest issues affecting hardworking students.
Hats off to Harsh Dubey. We need more such voices at student protests.
ये लोग कहते हैं कि नीट पर 18 घंटे चर्चा करेंगे?
लेकिन चर्चा किनसे करेंगे, नेताओं से?
जो चांदी की चम्मच लेकर पैदा हुए हैं
वो मेरे जैसे छात्रों का दर्द क्या समझेंगे?
~ Harsh Dubey, NEET Aspirant
इस पूरे प्रकरण में अगर सबसे ज़्यादा मूर्ख कोई बना है तो वो हैं सामान्य वर्ग के युवा। तुम्हें क्या मिला भाई? तुम क्यों उछल रहे थे? तुम्हें तो नुक़सान ही हुआ।
तुमने नीला झंडा उठाने वालों का समर्थन किया। तुम चंद्रशेखर 'रावण' के भक्त बन गए। तुम गर्व से जिस आंदोलन को अपने बताते फिर रहे हो उसके नेता अमेरिका से आंबेडकर की तस्वीर लेकर भारत की धरती पर उतरा। जिस प्रोटेस्ट्स के सहारे तुमने मोदी को गालियाँ दीं उनमें UGC रेगुलेशंस की एक बार भी चर्चा तक नहीं हुई। स्टैंड तक क्लियर नहीं है इसपर।
तुम्हारे तो आंदोलन में इतनी ताक़त भी ���हीं थी कि कोई वार्ड पार्षद तक अपना बयान दे सके, कम से कम नीले झंडों के कारण प्रधानमंत्री को तो पोर्ट्रेट मोड में कैमरा करके वीडियो बनाना पड़ा। आरक्षण को लेकर इस आंदोलन के जोकरों के क्या विचार थे, ये तुमने नहीं पूछा। प्राइवेट सेक्टर में आरक्षण की घोषणा करने वाली कांग्रेस इस आंदोलन का हिस्सा थी। AAP वालों के आरक्षण पर क्या विचार हैं, तुम्हें पता है फिर भी तुम सिर्फ़ इसीलिए कूदते रहे क्योंकि तुम्हारे हिसाब से मोदी परेशान है।
उस मंच से भगवान श्रीराम के लिए अपशब्द कहे गए, फिर भी तुम एक अदद विरोध तक न दर्ज करा पाए। तुम अपने मंच से आंबेडकर को एक शब्द तक कहकर देखो, जिनका तुम समर्थन कर रहे हो वही तुम्हारी फाड़कर रख देंगे। अपने अस्तित्व का सोचो, ऐसे फूहड़ आंदोलनों का समर्थन करके स्वयं का मजाक मत बनाओ।
असल में पहली बात तो ये है कि सामान्य वर्ग के युवाओं की अब हैसियत नहीं बची है ख़ुद के दम पर कोई आंदोलन करने की, इसी बेचारगी में उधार के आंदोलनों में बिन बुलाए मेहमान की तरह घुसकर उसे अपना बता रहे हैं। ��ूसरी बात ये है कि तुम्हारी बात सुनेगा भी नहीं कोई, एक तो संख्या नहीं है ऊपर से एकता नहीं है। तीसरी बात, तुम्हारे अपने चुने हुए नेता तुम्हारी माँगों पर तुम्हारे साथ नहीं हैं, चाहे वो किसी भी पार्टी में हों।
सच में, सामान्य वर्ग के युवाओं से बड़ा मूर्ख कोई नहीं है आज की तारीख़ में। अपनी भद पिटवाकर रख दी तुम सबने!
इस पुनीत कार्य में दो महीना का समय लगना आपकी और मोदी सरकार की शिथिलता और उदासीनता का परिचायक है। अधिकारी उतना ही उत्साहित और कर्मशील होते हैं जितनी सरकार।
"Who Will Talk About Reservation?"
Amidst the protests, the words of furious NEET aspirant Harsh Dubey on my show last night has gone viral.
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अभी आलोक शर्मा जी ने तथ्यों से विपरीत जाकर केवल राजनीतिक जवाब दिया। मैं समझ सकता हूं कि उनके मन में इतना आक्रोश क्यों है। 2016 से पहले, जब तक नीट नहीं था, प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में यूजी सीटें 20–50 ल��ख रुपये और पीजी सीटें 50 लाख से 1 करोड़ रुपये तक बिकती थीं। जाकर जांच कर लीजिए, ऐसे संस्थानों केl अधिकांश मालिक इन्हीं की पार्टियों से जुड़े थे और सैकड़ों करोड़ रुपये प्रतिवर्ष कमाते थे।
प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी के 2016 से नीट लागू करने के बाद सामान्य और निम्न मध्यम वर्ग के बच्चों को भी मेरिट के आधार पर प्र��ेश मिलने लगा और करोड़ों का यह कारोबार बंद हो गया। यही कारण है कि आज नीट बंद करने की मांग उठाई जा रही है।
152 पेपर लीक के मामलों में कई राज्यों के मामले शामिल हैं। नड्डा जी ने भी इसका उल्लेख किया। सचिन पायलट और उनकी ही पार्टी के विधायकों के खिलाफ देशद्रोह के मुकदमे दर्ज हुए थे। इसका नीट से क्या संबंध है? प्रधानमंत्री मोदी जी और अमित शाह जी को गाली देना, उमर खालिद, प्रेमानंद महाराज या भगवान राम पर टिप्पणी करना, इनका प्रवेश परीक्षा और शिक्षा व्यवस्था से क्या संबंध है?
नीट इंजीनियरिंग और मेडिकल के छात्रों की परीक्षा है, जिसमें फिजिक्स, केमिस्ट्री, मैथ्स, जूलॉजी और बॉटनी जैसे विषय होते हैं। इन विषयों का इन राजनीतिक मुद्दों से क्या संबंध है? सरकार चर्चा के लिए तैयार है, फिर चर्चा से परहेज़ क्यों?