आदरणीय सचिन पायलट जी के सीकर आगमन पर पलसाना टोल प्लाजा पर स्वागत कार्यक���रम का आयोजन रखा गया, आप सभी युवा साथी ज़्यादा से ज़्यादा संख्या में पहुंचे।
दिनांक 2 मई 2026
समय दोपहर 12:00 बजे
@SachinPilot
श्रीगंगानगर में जनसुनवाई के दौरान भाजपा के विधायक जयदीप बिहानी जी के साथ अधिकारियों द्वारा अभद्रता और मारपीट किए जाने का मामला प्रकाश में आया है। यह घटना निंदनीय और व्यवस्था पर सवाल खड़े करने वाली है।
इस प्रकार की घटनाएं होती है, तो यह जनता के भरोसे को कमजोर करती हैं। इस पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए। भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों, इसके लिए जवाबदेही तय की जानी चाहिए।
AICC महासचिव आदरणीय सचिन पायलट जी पर राजस्थान भाजपा प्रभारी राधामोहन दास जी की अशोभनीय टिप्पणी सिर्फ निंदनीय नहीं, बल्कि भाजपा की गिरती हुई सियासी मानसिकता का खुला प्रदर्शन है।
विरोध की राजनीति और घटिया व्यक्तिगत हमलों में फर्क होता है, और भाजपा ने बार-बार यह साबित किया है कि वह इस मर्यादा को समझने में पू���ी तरह विफल रही है। अब यह साफ दिखने लगा है कि भाजपा के लिए मुद्दों पर बहस करने से ज्यादा आसान रास्ता है किसी भी विपक्षी नेता पर व्यक्तिगत अप��ान और स्तरहीन बयानबाज़ी।
यह सिर्फ एक व्यक्ति का अपमान नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों और राजनीतिक शिष्टाचार पर सीधा हमला है। क्या यही “नई राजनीति” है, जिसका दावा भाजपा करती है?
भाजपा नेतृत्व की चुप्पी इस बात का संकेत है कि ऐसे बयान अब अपवाद नहीं, बल्कि उनकी कार्यशैली का हिस्सा बन चुके हैं। राधामोहन दास जी को तुरंत बिना शर्त माफी मांगनी चाहिए, और भाजपा को अपने नेताओं पर लगाम लगाने की सख्त ��़रूरत है वरना जनता जवाब देना जानती है।
कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव, टोंक के लोकप्रिय विधायक श्री सचिन पायलट जी पर राजस्थान भाजपा प्रभारी श्री राधाम��हन दास द्वारा की गई टिप्पणी बेहद अशोभनीय, निंदनीय और घटिया राजनीतिक स्तर को दर्शाने वाली है।
भाजपा अब मुद्दों पर बहस करने के बजाय व्यक्तिगत आक्षेप और निम्न स्तर की भाषा का सहारा ले रही है। भाजपा अपने ही घोषित शुचिता और संस्कारों को तिलांजलि दे चुकी है। अब यह पार्टी संवाद नहीं, बल्कि अपमान की राजनीति पर उतर आई है। जो इनका वास्तविक चाल चरित्र और चेहरा है l
भाजपा नेतृत्व को तुरंत अपने नेताओं की बेल��ाम जुबान पर लगाम लगानी चाहिए और श्री राधामोहन दास को अपनी इस अपमानजनक टिप्पणी के लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए। @SachinPilot
हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री सुखविंदर सिंह सुखु जी को जन्मदिन की हार्दिक बधाई एवं शुभकाम��ाएं।
मैं ईश्वर से आपके स्वस्थ, खुशहाल एवं दीर्घायु जीवन की कामना करता हूँ। आने वाला वर्ष आपके लिए मंगलमय हो।
@SukhuSukhvinder
Just returned at 2:15 am to Ernakulam from Kozhikode after taking part in a huge UDF rally addressed by @kharge ji and @RahulGandhi ji .
Journey was much quicker by train than driving!
All set for tomorrow morning 👍
📍Cochin Railway Station
राजस्थान से पहली बार, राजस्थान की ���ाटी के लाल, राजस्थान NSUI के प्रदेश अध्यक्ष छोटे भाई
विनोद जाखड़ जी को भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (NSUI) का राष्ट्रीय अध्यक्ष नियुक्त होने पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।
यह पूरे राजस्थान के लिए गर्व और सम्मान का क्षण है। हमें पूर्ण विश्वास है कि आप राष्ट्रीय स्तर पर भी छात्रों की आवाज को बुलंद करते हुए उनके अधिकारों के लिए मजबूती से संघर्ष करते रहेंगे। @VinodJakharIN @nsui
आज कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव श्री @SachinPilot जी का प्रभु श्री सांवरिया सेठ दर्शन हेतु आगमन के दौरान वल्लभनगर परिवारजनों के साथ स्वागत अभिनंदन किया व उनको जन्मदिवस की शुभकामनाएं दी।
इस दौरान उनकी माताजी पूर्व सांसद आदरणीय श्रीमती रमा पायलट जी से आशीर्वाद प्राप्त किया।
सचिन पायलट को जन्मदिन की शुभकामनाएँ।
राजस्थान की धूल भरी धरती पर, जहाँ तपते सूरज की ���िरणें ओसारे की तरह चमकती हैं और क्षितिज मरीचिका-सा काँपता है, सचिन पायलट चलते हैं। राजस्थान के बियाबानों में भटकता एक प्रदेश अध्यक्ष। सरकार में भागीदारी; लेकिन नेतृत्व की संपूर्ण आकांक्षाओं का एक अपूर्ण पटाक्षेप। पार्टी की एक सरकार का कभी दहाड़ते और कभी कराहते हुए आगे बढ़ना और अंतत: बुरी तरह ढहना। कांग्रेस का साल 2023 में अपने आपको हार की राह पर डाल देना एक बहुत बड़ी कीमत थी, जिसका असर वह शायद 2028 में जान सके। साल 2028 की जीत सुनिश्चित करने के लिए उसका वह चुनाव जीतना अपरिहार्य था। लेकिन उसे द्वंद्व के बीच हारने दिया गया। एक आम कार्यकर्ता भजनलाल की सरकार के स्तर पर बहुत ग़लतियाँ नहीं हुईं तो काँग्रेस के लिए अब मुश्किल दौर है। जैसे दिग्विजयसिंह ने मध्यमप्रदेश में अथक परिश्रम करके भाजपा को प्रदेश सौंपा था, वैसा ही कुछ राजस्थान में हो चुका है।
वैसे सियासत में देखें तो सचिन का नाम ही एक मेटाफ़र है, पायलट। एक पिता, ���िसने वायुसेना के आकाश और राजनीति के तूफ़ान दोनों देखे और एक पुत्र, जिसने वही ऊँचाई और वही उथल-पुथल विरासत में पाई। प्रदेश का नेतृत्व अशोक गहलोत जैसे नभस्पर्शी नेता के पास था। नया नेतृत्व आ रहा था। संतुलन सधना चाहिए था। दोनों ओबीसी मूल से थे। दोनों हाइकमान के लाड़ले रहे। दोनों की विचारधारा एक जैसी थी। दोनों एक जैसी उम्र में आगे आए थे। नया चेहरा थोड़ा अपडेट था। पुराना समय के साथ और संजीदा हुआ था। लेकिन हम उस समाज में पले-बढ़े हैं, जो इस संस्कृति में जीता है कि भाई मरने का दु:ख नहीं; लेकिन अच्छा हुआ भाभी का नखरा झड़ गया। वह अपने हासिल को खोने का एहसास नहीं रखता।
राजस्थान के इस नव नायक सचिन पायलट की कहानी किसी अर्धरूसी और अर्धफ्रांसीसी उपन्यास के जूझते और रक्तरंजित स्वप्नदर्शी नायक की तरह है। उनका जीवन विरोधाभासों से बुना हुआ है। वह अंतर्विरोधों को सलीके से जीते हैं। दिल्ली की तराशी हुई बुलेवार्ड सड़कें और टोंक की धूलभरी गलियाँ, व्हार्टन की गम्भीर कक्षाएँ और जयपुर की खण्डित विधानसभा, सैनिक की वर्दी और राजनेता का कुर्ता। वे राजनीति में जन्मे ज़रूर थे, पर समय ने उन्हें निर्वासन भी दिया; साल 2000 में पिता की आकस्मिक मृत्यु ने उनके जीवन में एक खालीपन रच दिया, जिसे उन्होंने युवावस्था की ऊर्जा से भरा। राजनीति के जंगल की पदचाप इतनी बेसुरी होती हैं कि सामान्य इन्सान को डरा दें; लेकिन सोनालिया धरती के रूपाले सपनों से वंचित हुए पायलट ने अपने मोरचंग को अशोक गहलाेत के रावणहत्थे के साथ-साथ गुंजाए रखा है और धीमे नहीं पड़ने दिया है। इन दोनों की अलग-अलग दूरियों से लयकारी देखने वाल�� है।
छब्बीस वर्ष की उम्र में, जब अधिकांश लोग कॅरियर की दहलीज़ पर भटक रहे होते हैं, पायलट संसद के गलियारों में गम्भीरता का अभ्यास कर रहे थे। उनकी शिक्षा एक आरोही लय की तरह लगती है। एयर फ़ोर्स बाल भारती स्कूल से लेकर सेंट स्टीफ़ेंस, आईएमटी गाज़ियाबाद और फिर पेनसिल्वेनिया की व्हार्टन स्कूल तक। और राजनीति के स्थायी आह्वान से ��हले उन्होंने बीबीसी और जनरल मोटर्स में थोड़ी देर के लिए ‘अन्य तरह के जीवन’ के ख़ास स्वाद भी चखे। वे बहुत उत्साही हैं और सामाजिक गुत्थियों को समझने में बहुत माहिर। दक्षिण भारतीय समाजों की जातियों के गणित और चरित्र उन्होंने वैसे ही आत्मसात किए हुए हैं, जैसे राजस्थानी जातियों और गोत्रों के।
फिर भी राजस्थान ने उन्हें लौटाया। 2018 में टोंक ने उन्हें भारी बहुमत से चुना, मानो यह राज्य उन्हें सिंह���सन सौंपना चाहता हो। लेकिन राजनीति, जैसा हम उथल-पुथल भरे रूसी उपन्यासों में पढ़ते हैं, एक चंचल तितली है। पंख चमकते हैं, लेकिन दिशाएँ अनिश्चित रहती हैं। मुख्यमंत्री की कुर्सी हाथ से फिसल गई; इसके बदले वे अशोक गहलोत के डिप्टी बने, मानो उत्तराधिकारी को सत्ता के प्रवेश द्वार पर प्रतीक्षा करने कहा गया हो। मुझे लगता है, वे पहले ही दिन उपमुख्यमंत्री का पद ठुकरा देते और उपमुख्यमंत्री होना स्वीकार न��ीं करते तो आज शायद उनका और प्रदेश का ��रिदृश्य और ही होता।
2020 का विद्रोह महज़ राजनीतिक नहीं था; यह उत्तराधिकार से जूझते एक युवा नेता और बुज़ुर्ग संरक्षक के बीच का राजनीतिक कम और मनोवैज्ञानिक द्वंद्व अधिक था। यह एक शॉर्ट मूवी नहीं थी, जैसा दिखता है। यह एक लंबी ऐसी ओटीटी सीरीज थी, जिसमें वह सब था, जो आम नफ़ीस फ़िल्मों में नहीं होता। मैंने इस लंबी ओटीटी सीरीज को तब ही लिख लिया था। अब पता नहीं कब उपयोग होगी। लेकिन आम ओटीटी सीरीज में उत���ा मसाला नहीं होता, जितना साल 2020 में घटित इस एपिसोड में हुआ था। अब मैं उन पंक्तियों को एक साथ पढ़ता हूँ तो लगता है कि यह बेहतरीन उपन्यास की एक गाथा है। क्या हमारे सामने दिखने वाले राजनेता ऐसा भी कर सकते हैं? लेकिन हमारी मेमोरी हमें दग़ा दे जाती है, इसलिए हम कई बार यह सब महसूस नहीं कर पाते।
पायलट का आकर्षण उनके रेज़्यूमे से नहीं, उनके व्यक्तित्व के द्वैत से ��ै। एक कॉर्पोरेट नौजवान जो संख्याओं की भाषा जानता है, एक सैनिक अधिकारी जो सलामी देता है, और एक राजनेता जो टोंक के गाँवों की धूल भरी गलियों में जनता से मिलता है। उनकी वाणी में न गहलोत जैसी देसी खांटी लोकपटु खरखराहट है और न ही पिता राजेश पायलट का सधा गरिमामय गरमजोशी भरा ग्राम्य अंदाज़; यह आधुनिकता की एक अलग चमक है, जिसमें बोर्डरूम की सुघड़ता और चौपाल की सच्चाई दोनों मिलते हैं। कितना सुंदर, लेकिन ���ितना उदास। कितना भव्य, लेकिन कितना पराया। लेकिन यह काँग्रेस ही है, जो उस नदी की तरह है, जिसे तालाब डुबो देते हैं और अपनी प्रतिद्वंद्वी पार्टी को तालाब-तालाब जुड़कर सागर बनाने पर आमादा रहते हैं।
राजस्थान की राजनीति को बहुत पहले अलग तरह से चालाया जाता रहा है। यहाँ पत्थर पानी को मारता नहीं, धार देता है। पानी बदले में पत्थर को संवार देता है। ऐसा कुछ राजस्थान के बारे में कहीं पर, अब मुझे याद नहीं, इस धरती के बहुत ज़हीन अस्सी व��्षीय कवि नंदकिशोर आचार्य ने लिखा है। लेकिन अफ़वाहों की गूंजती झरती पहाड़ी जैसी राजस्थान की राजनीति में कभी कहा जाता है कि रानी आठ बजे बात टुन्न हो जाती है और पायलट बड़े-बड़ों से अबे-तबे करके बात करता है। न रानी को डरते कोई यह बताए कि तुम्हारी सियासत में पलीता लगाए जा रहा है और न कोई पायलट को समझाए कि धरती के नीचे एक अलग तरह की "सरस्वती" बह रही है। जबकि सच यह है कि वसुंधरा राजे बहुत देर रात तक भी ब���ठकें लेती थीं और पायलट भी बुज़ुर्गों से सलीके से पेश आते हैं। इस तरह के कुछ कांड सीपी जोशी के साथ भी हो चुके हैं। आज ही अशोक गहलोत ने वसुंधरा राजे के बारे में बहुत सही कहा है। एक खरा आदमी किस तरह साइडलाइन हो जाता है, सीपी भी इसी का शिकार हुए एक दु:खद किस्सा हैं।
सियासत की सड़क पर भी एक बोर्ड हमेशा टंगा ही रहता है, "सावधानी हटी, दुर्घटना घटी।" और नौजवान नेता के साथ भी दुर्घटना घटी और भाजपा की सबल न��ता को भी की��त चुकानी पड़ी। लेकिन सावधान रहे लोग, दुर्घटना से बच गए और पार्टी कीचड़ में ऐसी फँसी है कि अगले चुनाव में भी निकलती हुई मुझे तो नहीं ही लग रही। पायलट का निजी जीवन भी किसी पुराने फ्रेंच उपन्यास के पन्नों जैसा है। सारा अब्दुल्ला से विवाह, जिसने राजस्थान की धरती और कश्मीर की वादियों को एक सूत्र में बाँधा। राजस्थान की धरती से आगे बढ़े अब इस युवा को बाहर का मौक़ा दिया गया है; और यह जानते बूझते हुए दि��ा गया है कि प्रदेश में इस समय अशोक गहलोत के बाद कोई दूसरा गुरुत्वीय बल का वाला राजनीतिक केंद्र है तो वह पायलट के अलावा कोई नहीं है।
कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष ने आलोचनाओं और प्रत्यालोचनाओं के बीच अपनी तरह से बहुत से काम किए हैं; लेकिन अगर कोई ताक़तवर व्यक्ति धीरे-धीरे किसी जगह से दूर होता है तो उस रिश्ते का खंडित होना स्वाभाविक है। आज, जब कांग्रेस अपने पुनर्जन्म की तलाश मे��� है और राजस्थान स्थिरता की। सचिन पायलट नाबोकोवियन स��्पेंशन में हैं। न पूरी तरह पहुँचे हुए, न बिल्कुल अनुपस्थित; शक्ति के नभ में चारों ओर चक्कर लगाता प्यास से व्याकुल एक पपीहा। प्रश्न यही है: क्या यह पायलट कभी मुख्यमंत्री निवास में अपना विमान उतार पाएँगे या वे भारतीय राजनीति के नभ में यों ही परिक्रमा करके लोगों के सबसे सम्मोहक बने रहेंगे? पायलट साहब, कांग्रेस की गुफ़ा में से जल बूंद-बूंद कर रिसता है। भाजपा में यह झरने की तरह झरता और सियाही की तर��� सूखता है। कांग्रेस खेजड़ियों का वनप्रांतर है और भाजपा यूकेलिप्टस का जंगल! जाने किस खेजड़ी की किस यज्ञ के लिए समिधा बने, किसकी पूजा हो और किसको ऊँट-बकरी चरें और यूकेलिप्टस की ख़बियां तो आप जानते ही हैं!
पायलट साहब को एक बार फिर जन्मदिन की असीम शुभकामनाएं।
@SachinPilot
AICC महासचिव, टोंक विधायक एवं राजस्थान के पूर्व उप - मुख्यमंत्री श्री सचिन पायलट को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं ।
मैं ��श्वर से आपके स्वस्थ, खुशहाल एवं दीर्घायु जीवन की कामना करता हूँ |
@SachinPilot
��न-जन के लोकप्रिय नेता ह्रदय युवा सम्राट आदरणीय श्री सचिन पायलट जी
अपने जन्मदिवस के पावन अवसर पर श्री सांवलिया सेठ धाम पधारकर दर्शन करेंगे तथा परम कृपालु भगवान् से आशीर्वाद प्राप्त करेंगे
दिनांक : 7 सितम्बर 2025
समय : प्रातः 10:00 बजे
स्थान : श्री सांवलिया सेठ धाम
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AICC महासचिव एवं युवा हृदय सम्राट जननेता आदरणीय श्री सचिन पायलट जी के जन्मदिवस पर श्री सांवलिया सेठ धाम में आय��जित कार्यक्रम में आप सभी सादर आमंत्रित हैं।
🗓️ 7 सितम्बर 2025 🕙 प्रातः 10.00 बजे
📍श्री सांवलिया सेठ जी, मंडफिया चित्तौड़गढ़।
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