VHP प्रवक्ता श्री विनोद बंसल ��ी को हमारा पूर्ण समर्थन है। चैनलों के नौकरों को हमारी आस्था पर, हमारे मंदिर के ट्रस्ट पर सवाल उठाने का कोई अधिकार नहीं है।
ABP न्यूज के खिलाफ सख्त कारवाई होनी चाहिए, सैक्टर 125 स्थित ABP के दफ्तर का निरीक्षण होना चाहिए कि कहीं कोई अवैध निर्माण तो नहीं किया।
बहुत बड़ा काम कर दिया बीजेपी RSS ने? भगवान राम ने कल्पना भी नहीं की होगी कि कालान्तर में कोई पार्टी उनके नाम पर सरकार खड़ी कर लेगी और अपने अधिकृत संवाददाता के तौर पर चित्रा त्रिपाठी @chitraaum को नियुक्त कर लेगी जो मौके दर मौके उनका बचाव करेग���।
कांग्रेस ने तीन बार बीजेपी की सरकार गिराई बहुत कम किया। प्रतिबंध लगाना था RSS पर उनके आर्थिक ढांचे को नेस्तनाबूत करना था। जेल भेजना था अप्पा को तुम्हारे।
चलिए इस चर्चा को और थोड़ा आगे बढ़ाते हैं!
राम मंदिर निर्माण का रास्ता तब साफ हुआ, जब सुप्रीम कोर्ट ने भगवान रामलला विराजमान के पक्ष में फैसला सुनाया। लेकिन क्या आपको पता है कि 1989 से पहले हिंदू पक्षकारों में से किसी ने भी विवादित जमीन पर दावा नहीं किया था।
गोपाल सिंह विशारद ने राम जन्मभूमि पर पूजा की अनुमति मांगी। निर्मोही अखाड़ा ने मंदिर प्रबंधन अपने हाथ में सौंपने की मांग की थी। तात्कालीन गृहमंत्री और कांग्रेस नेता बूटा सिंह ने अपनी कानूनी समझ का इस्तेमाल करते हुए विश्व हिंदू परिषद (VHP) को बहुत महत्वपूर्ण सुझाव दिया।
जब राम मंदिर आंदोलन जोर पकड़ने लगा और तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने विवादित परिसर का ताला खुलवा दिया तब तत्कालीन गृहमंत्री बूटा सिंह ने कांग्रेस की वरिष्ठ नेता शीला दीक्षित के जरिए विश्व हिंदू परिषद के अशो��� सिंघल ��ो संदेश भेजा। सरदार बूटा सिंह ने दीक्षित के जरिए सिंघल को बताया कि हिंदू पक्ष की ओर से दाखिल किसी मुकदमे में जमीन का मालिकाना हक नहीं मांगा गया है और ऐसे में उनका मुकदमा हारना तय है। उसके बाद रामलला को पक्षकार बनाया गया था। @chitraaum @VinodAgnihotri7
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@chitraaum Ram mandir ke ban se phle hi tumhare BJP wale करोडों अरबों khaa chuke the.. Construction se लेकर ab tk घोटाला ho rha hai tu us pr 1 word bhi nhi bol paa rhi hai.. शर्म आनी चाहिए तुझे..
मुझे पर्सनली @rajnathsingh जी से ये उम्मीद नहीं थी की सैनिको के शहीद होने के जानकारी छुपाएंगे!लेकिन वो भी पिल पिले नारगी निकले! पता नहीं क्या इनकी मज़बूरी है लेकिन बहुत निराश किया!
@kum67370752@vijay4931@rajnathsingh Nhi rajnath ghatiya insaan nhi hai.. Ranga billa ke aage chalti hi nhi hai us ki.. but phir bhi wo apne स्वार्थ ke liye galt to kr hi rha hai..
कॉकरोच वाले प्रोटेस्ट से सिर्फ दो नैरेटिव बन पाए 👇
1. जनता मोदी सरकार के खिलाफ नहीं है, इसलिए प्रदर्शन में भीड़ नहीं है. देश में सब ठीक है, जनता खुश है.
2. मोदी सरकार कितनी अच्छी है, जो प्रदर्शन करने दे रही है. देश में लोकतंत्र कायम है.
मतलब इस प्रदर्शन से मोदी को फायदा ही हुआ है.
लोग कुछ दिन पहले तक EVM और चुनाव आयोग की धांधली पर बात कर रहे थे. उनके मन में बैठ गया था कि चुनाव में गड़बड़ी हो रही है.
अब ये मुद्दा गायब हो चला है.
इसके उलट अब लोग मोदी सरकार लोकतंत्र का सम्मान करती है, प्रदर्शन करने दे रही है, लोगों को आवाज उ��ाने दे रही है - ऐसे फर्जी नैरेटिव में फंस रहे हैं.
इसलिए मैं कहता हूं - खुद BJP चाहती है कि ये प्रदर्शन हो. ये प्रदर्शन जितना चलेगा, BJP को उतना फायदा होगा.
Honest Review : Welcome To The Jungle
ऐसी वाहियात फ़िल्म पिछली बार मैंने अक्षय कुमार की ही "जोकर" देखी थी, यह फ़िल्म उससे भी वाहियात है, इस फ़िल्म को देखने के बाद आपको साजिद खान की "हमशकल्स" अच्छी लगने लगेगी!
यह फ़िल्म किसी सस्ते यूट्यूबर के कॉमेडी वीडियो से भी घटिया है, एक्टिंग का तो पूछिए ही मत, इससे अच्छी एक्टिंग तो इंस्ट���ग्राम वाला आर्यन केलविन कर लेता है!
पूरी फ़िल्म में कहानी का कहीं अता पता है ही नहीं, पूरी फ़िल्म में सिर्फ और सिर्फ शोर और जबरदस्ती की कॉमेडी है!
फ़िल्म के सेकेण्ड हाफ में जब फरीदा जलाल और किरण कुमार पहली बार पर्दे पर आते हैं, तब दर्शक पहली बार स्वेच्छा से हँसते हैं, पूरी फ़िल्म देखने के बाद आपको यही दोनों किरदार याद रहेंगे!
तुषार कपूर, आफ़ताब शिवदसानी, कृष्णा अभिषेक, किकू शारदा का तो समझ आता है लेकिन अक्षय कुमार, सुनील शेट्टी, जैकी श्रॉफ, परेश रावल, राजपाल यादव जैसे कलाकर ऐसी फ़िल्म करने को राजी कैसे हो जाते हैं?
फ़िल्म में दिशा पाटनी और जैक्लीन फर्नांडीज का काम पूरी फ़िल्म में नेकर पहनाकर अपनी टांगों की नुमाइश करना है!
सबसे ज्यादा दुख मुझे इस फ़िल्म में ग्रेट सिंगर दिलेर मेंहदी साहब को देखकर हुआ, उनकी क्या मज़बूरी थी ये फ़िल्म करने की, फ़िल्म के एक सीन मे��� जब अक्षय कुमार उन्हें थप्पड़ मारता है तो हर दर्शक स्तब्ध रह जाता है!
कुल मिलाकर इस फ़िल्म को देखना पैसे और समय की बर्बादी है, इससे अच्छा कंटेंट आपको फ्री में इंस्टाग्राम पर मिल जायेगा!
अगर यह तर्क दिया जा रहा है कि जिनका नाम/प्रयास राम मंदिर निर्माण में नहीं हैं वे इस शर्मनाक घोटाले पर न बोलें तो इस तर्क पर अगर कांग्रेस तर्क दे कि जिस पार्टी का आज़ादी आंदोलन में योगदान न हो वे देश के हालात पर न बोले तो कैसा लगेगा ?
यह बेकार तर्क है। किसी ने आज़ादी दिलाई,किसी ने मंदिर बनवा दी,यह सब तर्क उनके कारनामों पर सवाल रोकने का माध्यम नहीं बन ��कता है।
और यह तर्क देकर और एक्सपोज़ हो रहे हैं की बचाव में कुछ नहीं है तो बस सवाल को ही रोक दे!
यह घोटाला देश में धर्म के नाम पर हुआ सबसे बड़ा घोटाला है जिसकी कई परत खुलनी बाकी है!
जब चुनाव से पहले अधूरे मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा की थी तब तो दुनिया भर में ढिंढोरा पीट रहे थे कि देखो देखो हम सनातन का युग के आये।
अब चढ़ावा गटक गए तो कभी गुप चुप जाँच कर रहे हैं, बंद कमरों में मीटिंग कर रहे हैं, गोपनीय रिपोर्ट बना रहे हैं।
अबे तुम्हारे बाप का माल है क्या, इसका भी ढोल पीटो ना, बताओ करोड़ों श्रद्धालुओं को कि कौन कितना खा गया, अभी किसको लगाओगे, वो कैसे खायेगा।