बलिया
➡MLA उमाशंकर सिंह का हुआ अंतिम संस्कार
➡फूट-फू��कर रोए भाजपा मंत्री दिनेश प्रताप सिंह
➡उमाशंकर के इलाज की व्यवस्था कराई थी- दिनेश
➡अमित शाह, PMO ने व्यवस्था कराई थी- दिनेश
➡दलगत सीमाओं से ऊपर थे उमाशंकर- दिनेश
➡उनका छोटा बेटा बनेगा बड़ा उमाशंकर- दिनेश
➡‘PM की संवेदना उमाशंकर के परिवार के सा��’
@RBLDineshSingh @BJP4UP @bspindia
एक चु... पाने के लिए पुरुष क्या-क्या जतन करता है इसकी बानगी पाकिस्तान है |
सिर्फ इस महिला के () के चक्कर मे इसकी पार्टी और पूरा परिवार आज सत्ता मे है वरना,
आज PMLN इतनी कमज़ोर हो गयी है की नवाज़ शरीफ खुद कॉर्पोरेटर ��क नहीं बन सकता है |
देश की 90% से ऊपर अवाम इमरान खान के साथ है पर असीम मुनीर को () दे दे के,
चाचा प्रधानमंत्री है ��ुद पंजाब की मुख्यमंत्री है बाकि समधी, भतीजे अलग मंत्री है |
अयूब खान के बाद दूसरा आर्मी जनरल है असीम मुनीर जो पाकिस्तान के इतिहास मे फील्ड मार्शल बना है ऊपर से इसने कानून मे संसोधन कर के खुद को हमेशा के लिए इस्तिसना दिलवा दिया है |
चाहे तो आज जारदारी को हटा के राष्टपति बन जाएगा कोई पूंछने वाला नहीं है लेकिन,
पिछले 3 साल से सिर्फ इसके () के चक्कर मे पूरा परिवार सत्ता का मजा मार रहा है |
वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप भारतीय स्वाभिमान और अदम्य साहस के अमर प्रतीक। हल्दीघाटी से दिवेर तक उन्होंने मुगल साम्राज्य के सामने कभी घुटने नहीं टेके और मातृभूमि की स्वतंत्रता के लिए जीवनभर संघर्ष किया। चेतक की निष्ठा, प्रताप का पराक्रम और त्याग आज भी हर भारतवासी को राष्ट्रगौरव का संदेश देता है। दूरदर्शन परिवार की ओर से वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की जयंती पर साहस, स्वाभिमान और राष्ट्रभक्ति के अमर प्रतीक को शत्-शत् नमन।
#MaharanaPratap #VeerShiromani
#DeshKaPehlaChannelDeshKaApnaChannel
⚔️महान योद्धा वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप जी अदम्य साहस, अद्भुत शौर्य और दृढ संकल्प के प्रतीक थे। आज उनके जयंती दिवस पर उन्हे कोटि-कोटि वंदन।🙏🏻
#महाराणा_प्रताप#MaharanaPratap
माँ भारती के अमर सपूत, स्वाधीनता के कालजयी स्वर, त्याग व बलिदान की उज्ज्वल कीर्ति पताका, 'हिंदुआ सूर्य' वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की पावन जयंती पर नमन।
मातृभूमि के गौरव और स्वाभिमान की रक्षा हेतु आपका अदम्य साहस एवं सर्वस्व समर्पण, युग��ं-युगों तक भारतीय जनमानस को अन्याय के विरुद्ध अडिग रहने और राष्ट्रनिष्ठा की प्रेरणा देता रहेगा।
वीरता और पराक्रम के अमर प्रतीक, देश के महान योद्धा महाराणा प्रताप को उनकी जयंती पर आदरपूर्ण श्रद्धांजलि। उन्होंने मातृभूमि की आन-बान और शान की रक्षा के लिए अप��ा जीवन समर्पित कर दिया। उनके अदम्य साहस और अटूट स्वाभिमान की गाथाएं युगों-युगों तक देशवासियों के हृदय में राष्ट्रभक्ति का दीप प्रज्वलित करती रहेंगी।
"विकास के नाम पर विनाश का रास्ता"
भारत की सबसे प्राचीन पर्वतमाला अरावली आज अपने अस्तित्व की सबसे बड़ी लड़ाई लड़ रही है। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट के एक निर्देश के बाद 100 मीटर से कम ऊँचाई वाली पहाड़ियों को “पहाड़” न मानने की व्याख्या सामने आई है, जिसने अरावली के विशाल भूभाग को कानूनी संरक्षण से बाहर करने का खतरा पैदा कर दिया है। यह केवल शब्दों का खेल नहीं है, बल्कि इसके दूरगामी परिणाम राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली और पूरे उत्तर-पश्चिम भारत के पर्यावरणीय भविष्य को सीधे प्रभावित करने वाले हैं।
अरावली पर्वतमाला लगभग 692 किलोमीटर तक गुजरात से लेकर दिल्ली तक फैली है और इसे लगभग तीन अरब वर्ष पुरानी पर्वत श्रृंखला माना जाता है। इसका दो-तिहाई हिस्सा राजस्थान में स्थित है, जहाँ यह जलवायु संतुलन, वर्षा चक्र और भूजल रिचार्ज की रीढ़ के रूप में कार्य करती है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि अरावली न होती, तो प��्चिमी, मध्य और दक्षिण भारत का बड़ा भूभाग रेगिस्तान में बदल चुका होता। ऐसे में इस प्राकृतिक ढाल को कमजोर करना दीर्घकालिक पर्यावरणीय आत्मघात से कम नहीं है।
फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया के आँकड़े इस संकट की गंभीरता को और स्पष्ट करते हैं। देश में मैप की गई 12,081 पहाड़ियों में से केवल 1,048 यानी महज 8.7 प्रतिशत ही 100 मीटर की ऊँचाई के मानक पर खरी उतरती हैं। इसका सीधा अर्थ यह है कि अरावली का लगभग 90 प्रतिशत हिस्स�� इस नई व्याख्या के बाद कानूनी सुरक्षा खो सकता है। यह स्थिति खनन, रियल एस्टेट और निजी परियोजनाओं के लिए रास्ता खोलती है, जबकि पर्यावरण और स्थानीय समुदायों के लिए यह विनाश का संकेत है।
अरावली केवल पहाड़ियों की श्रृंखला नहीं है। यह 300 से अधिक जीव-जंतुओं और पक्षियों का प्राकृतिक आवास है, लाखों पशुपालकों के लिए चारागाह है और बनास, साबरमती तथा लूणी जैसी नदियों का उद्गम स्थल भी है। इसकी चट्टानी संरचना वर्षा जल को रोककर उसे जमीन के भीतर पहुँचाती है, जिससे पूरे क्षेत्र में भूजल रिचार्ज होता है। पहले से ही जल संकट से जूझ रहे पश्चिमी राजस्थान के लिए अरावली का कमजोर होना सूखे को स्थायी बना देने जैसा होगा।
सरकार की पर्यावरण नीति की वास्तविक तस्वीर जोजरी नदी की उपेक्षा और खेजड़ी वृक्षों के साथ हो रहे व्यवहार से भी साफ होती है। खेजड़ी, जिसे राजस्थान का राज्य वृक्ष माना जाता है और जो रेगिस्तानी पारिस्थितिकी तंत्र की जीवनरेखा है, आज योजनाबद्ध कटाई का शिकार बन रहा है। सरकारी आँकड़ों और जमीनी आकलनों के अनुसार, सोलर परियोजनाओं और औद्योगिक लीज़ के नाम पर अब तक लगभग 26 लाख खेजड़ी पेड़ काटे जा चुके हैं, जबकि आने वाले समय में करीब 50 लाख और खेजड़ी पेड़ों की कटाई की तैयारी की जा रही है। सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि एक पूर्ण विकसित खेजड़ी पेड़ के साथ अन���य पेड़ो को तैयार होने में लगभग 100 वर्ष लगते हैं, जिससे मरुस्थल के इस अनमोल पारिस्थितिकी तंत्र पर दीर्घकालिक और गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।
एक पेड़ औसतन 1,200 किलोलीटर ऑक्सीजन प्रतिवर्ष देता है। इस आधार पर, जो 26 लाख पेड़ काटे गए, वे हर साल लगभग 25 करोड़ किलोलीटर ऑक्सीजन प्रदान करते थे जो अब पूरी तरह बंद हो चुकी है। पेड़ों के कटने और बड़े पैमाने पर ऊर्जा परियोजनाओं की स्थापना के कारण तापमान में 3 से 4 डिग्री तक ���ृद्धि दर्ज की गई है। पर्यावरणविदों के अनुसार, पश्चिमी राजस्थान में बारिश कम होने का यह एक प्रमुख कारण बन गया है। तापमान बढ़ने और आवास नष्ट होने के चलते रेगिस्तान के कई छोटे जीव भी विलुप्ति के कगार पर पहुँच गए हैं। जबकि यही पारिस्थितिकी तंत्र है जो न्यूनतम पानी में पनपता है, मिट्टी को बाँधकर मरुस्थलीकरण को रोकता है, पशुओं के लिए चारा देता है और स्थानीय ग्रामीण अर्थव्यवस्था का आधार है।
विडंबना यह है कि सुप्रीम कोर्ट ने अतीत में अरावली की रक्षा के लिए ऐतिहासिक भूमिका निभाई ��ै। 1990 के दशक से लेकर एम.सी. मेहता बनाम यूनियन ऑफ इंडिया जैसे मामलों में कोर्ट ने राजस्थान और हरियाणा में अनियंत्रित खनन पर रोक लगाई और यह स्वीकार किया कि इससे होने वाला पर्यावरणीय नुकसान अपूरणीय है। ऐसे में आज उसी अरावली को कमजोर करने वाली व्याख्या सामने आना न केवल चिंताजनक है, बल्कि न्यायिक परंपरा के भी विपरीत प्रतीत होता है।
जैसलमेर….
महीपाल सिंह नामक युवक एयरफ़ोर्स की परीक्षा देने जैसलमेर आता है…
परीक्षा देकर बस से वापस अपने घर रामदेवरा लौटने के लिए निकलता है…
जैसलमेर से मात्र दस किलोमीटर दूर पहुँचते ही अचानक बस में आग लगती है, बस धू धू कर के जलने लगती है…
बस में सवार 30 से ज़्यादा लोग आग से झुलस जाते हैं…
तीस में से दस लोग वहीं दम तोड़ देते हैं…
दस लोग 90% तक जलकर आख़िरी साँसें ले रहे होते हैं…
महीपाल सिंह भी 35% तक जल जाता है…
अफ़रातफ़री मची देखकर महीपाल सिंह दौड़कर एक कार वाले के पास जाकर मदद माँगता है…
कार मालिक उसे कार से नीचे उतार देता है…
वो बदहवास सा दौड़कर दूसरी क���र के पास जाता है…
वो कार मालिक दरवाज़ा तक नहीं खोलता…
महीपाल सिंद दर्जनों कारों की तरफ़ उम्मीद भरी नज़रों से देखता है….
लेकिन सभी कार मालिक मानो ये कह रहे हो कि, हम तो यहाँ तमाशा देखने आए हैं…
आधा घंटा चिलचिलाती धूप और जले हुए शरीर का दर्द सहने के बाद…
एक मोटरसाइकिल वाला महीपाल सिंह को जैसलमेर पहुँचाता है…
वहाँ प्राथमिक उपचार के बाद उसे जोधपुर रेफर कर दिया जाता है….
पाँच घंटे का सफ़र त��� करके महीपाल जोधपुर पहुँचता है….
इलाज शुरू होता है…
लेकिन इंसानों के रूप में इतने हैवान देखने के बाद शायद महीपाल की जीने की इच्छा ही ख़त्म हो जाती है…
और बीती रात महीपाल ये दुनिया छोड़कर चला जाता है….
तमाशबीनों की दुनिया….!!!
राजस्थान मुख्यमंत्री @BhajanlalBjp जी,
यह 'सुनिता महिला एवं जनरल हास्पिटल' की लापरवाही ने एक ग'र्भवती महिला और उस बच्चे को निगल लिया |
यह हास्पिटल 'डॉ अमरचंद्�� शर्मा" का है । डॉ अमरचंद शर्मा, चौमू के पुर्व @BJP4Rajasthan विधायक रामलाल शर्मा जी ( @ramlalsharmabjp )के भाई हैं |
जिनके घर आप तिलक व विवाह समारोह में जाते रहते हैं, यह धौंस और हाईकमान तक पकड़ देखकर पीड़ीत परिवार डा अमरचंद शर्मा के खिलाफ आवाज उठाने और न्याय मांगने में भयभीत हैं |
क्या पीड़ीत परिवार को न्याय मिलेगा ?
या स्वजातिय अस्पताल मालिक के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होगा ?
#मोनिका_कंवर_को_न्याय_दो
हमारा मकसद सिर्फ एक ही, बाईसा को न्याय मिले,
इसमें नहीं हमारे को किसी नेताओं से कुछ लेना देना, नहीं ठेकेदारों से,
बाकी इस पीड़ित की आवाज बनने के लिए, जो भी नेता, जिस भी समाज का जो भी आगे आए, तो उनका स्वागत है,
बाकी जबरदस्ती किसी की विचारधारा और मकसद बदला नहीं जा सकता,
बाकी राजा साहे�� ने और बन्ना जी ने कितने समाज के हित के लिए और शोषित पीड़ितों के लिए आवाज उठाई,
वो हमसे छुपी नहीं है,
क्यों मुंह खुलवाओ,
ये जो भी आज रावला बन्ना बनके बैठे हैं, ना उन आम राजपूतों की ही देन है,
इनका हक बनता है आगे आने का,
#मोनिका_कंवर_को_न्याय_दो
📌
अस्पताल की लापरवाही ने छीन ली माँ और बच्चे की दोहरी जिंदगी…
आज एक मासूम की किलकारी और एक माँ का चेहरा हमेशा के लिए खो गया।
क्या किसी माँ की मौत इतनी सस्ती है?
क्या एक बच्चे की सांसों की कोई कीमत नहीं?
#मोनिका_कंवर_को_न्याय_दो
पोस्ट: रिपोस्ट करते जाहिए
और ज़्यादा से ज़्यादा “समाज के नेताओं को टैग कीजिए।
घटना ‘‘डॉक्टर की लापरवाही से नवविवाहिता व नवजात की मौत।
नागौर जिले के उबासी गांव की रहने वाली मोनिका कंवर (पत्नी दीपक सिंह राठौड़) अपने मायके ग्राम रोजदा (जिला जयपुर) आई हुई थी।
19 सितंबर ���ी रात 12 बजे प्रसव पीड़ा होने पर परिवारजन उन्हें रायथल स्थित निजी अस्पताल (डॉ. सुरेश चौहान) के पास ले गए।
डॉक्टर ने कहा नॉर्मल डिलीवरी हो जाएगी और खुद इलाज छोड़कर चले गए।
सुबह 4 बजे तक आश्वासन देते रहे, लेकिन तब तक गर्भस्थ शिशु की मौत हो चुकी थी।
डॉक्टर ने कहा “घबराने की बात नहीं, मैं मां को बचा लूंगा।”
6 बजे तक सर्जरी न करने से मोनिका की हालत बिग��़ गई।
हालत गंभीर होने पर उन्हें चोमू के के.आर. हॉस्पिटल (भाजपा के पूर्व विधायक रामलाल शर्मा का) ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।
इसके बाद डॉ. सुरेश चौहान फरार हो गया।
पुलिस व प्रशासन की लापरवाही
हंगामे के बाद शव को चोमू अस्पताल में पोस्टमार्टम हेतु भेजा गया।
एफआईआर दर्ज करवाने पहुंचे परिजनों को चौमू थाने से कालाडेरा थाने भेज दिया गया।
आखिरकार कालाडेरा पुलिस ने मामला दर्ज किया और पोस्टमार्टम करवाकर शव परिजनों को सौंपा।
डॉक्टर सुरेश चौहान बिना डिग्री व बिना सुविधाओं के अस्पताल चला रहा है।
अस्पताल में न सर्जन है, न ऑपरेशन थिएटर, न ब्लड बैंक।
ग्रामीणों के अनुसार, पता चला डॉक्टर शराबी है और अवैध रूप से प्रसव व सोनोग्राफी कराता है।
जयपुर के नजदीक होते हुए भी यह अवैध अस्पताल वर्षों से चल रहा है।
डॉक्टर की पुत्री सुनीता रोजदा में भी अवैध महिला अस्पताल चला र���ी है।
मोनिका कंवर और उसके नवजात की मौत डॉ. सुरेश चौहान की लापरवाही और अवैध अस्पताल संचालन के कारण हुई।
फिर भी अब तक अस्पताल को सील नहीं किया गया और जिम्मेदार विभाग व पुलिस कार्रवाई से बचते दिख रहे हैं।
@RavindraBhati__
@Rajendra4BJP
@PSKhachariyawas
फांसी पर अंकुर सिंह की लाश नही�� लटकी है। ये वो नकारा सिस्टम का हाल है जिसके कारण अपने माँ-बाप का इकलौता लड़का आत्महत्या करने ��े लिए मजबूर हो गया।
SC-ST एक्ट में केस के बदले अंकुर से 2 लाख रुपए मांगे जा रहे थे। उसे लगातार प्रताड़ित किया जा रहा था। अंकुर ने बाप की जमीन बेचने कु जगह फांसी का फंदा लगा लिया।
हैरानी ये कि किसी TV डिबेट में इसकी कोई बहस नहीं। ये कोई मुद्दा नहीं? ये उगाही का धंधा कितनी जानें लेगा? मामला UP के बलिया का। ये शर्मनाक है। आप चुप रहेंगे तो आवाज कौन उठाएगा?
बेहद शर्मनाक और दर्दनाक...
मेरे आँखों से आंसू नहीं आते. मैं ब्राह्मण, राजपूत और यादव लड़कों से कहना चाहता हूं SC ST एक्ट से बचकर रहना. यह आपको बर्बाद करने के लिए है
बलिया, उत्तर प्रदेश के अंकुर सिंह ने मौत को गले लगाने से ठीक पहले यह वीडियो संदेश जारी किया है। अब आप सोचिए कि एक कानून कैसे किसी की जान ले लेता है। इस एक कानून का डर दिखाकर आप किसी का चरित्र खराब कर सकते हैं। इस एक कानून का डर दिखाकर आप किसी से पैसा हड़प सकते हैं और दवा यह ���ै कि हमें यह हक संविधान ने दिया है।
इस देश को तबाह होने से ��ोई नहीं बचा सकता
@narendramodi जी, इस हत्या का दोष किसके सर आएगा? कृपया अगली "मन की बात" में इसका जिक्र जरूर कीजिएगा।
SI भर्ती पर विधानसभा में मेहनती अभ्यर्थियों की भाटी ने उठाई आवाज
भाटी बोले ; "जो अपराधी थे, जिन्होंने गलत किया था, उनको सजा मिली या नहीं मिली ?"
पर..."जो लोग, जो बच्चे, अपनी मेहनत के बलबूते पे, खून पसीने की कमाई से, कोचिंग करके, बड़े शहरों में रहके, अपनी पूरी पूंजी लगाकर जो नौकरी लगे...जो साधारण बच्चे थे, जो ग्रामीण परिवेश ��े आने वाले थे...उन सभी की हत्या आप लोगों ने की है, आपके हाथ भी रंगे हुए हैं।"