राजेन्द्र राठौड साहब सबकुछ लूट चुका😳 और अब उनको तो मना ही कर देना चाहिए मैने BJP का क्या ले लिया जो मेरे को BJP प्रेस कांफ्रेंस करा रही है लेकिन #अरूण_चतुर्वेदी की टिकिट काट दी उससे प्रेस कांफ्रेंस करा रहे है #राजेन्द्र_राठौड का सबकुछ सल्टा दिया😲 फिर प्रेस कांफ्रेंस करा रहे है
#मदन_राठौड से कराओ ना देखे पता लग जाए क्या बोलते है श्रीगणेश हो गया पेपर आऊट का भाई साहब श्रीगणेश नही हुआ अन्याय हो गया लूट गए बच्चे
- गोविंदसिंह डोटासरा
मोक्ष प्राप्ति के बड़े-बड़े भाषणों से राजपूत समाज को क्या मिला? यदि कुछ हासिल हुआ, तो वह केवल गजेंद्रसिंह शेखावत का राजनीतिक प्रमोशन था - राजेंद्रसिंह गुढ़ा
7 बार का MLA, 4 बार का मंत्री राजेंद्र राठौड़ कुकुडू बना बैठा है और एक बार MLA सतीश पुनिया सीधा राज्यसभा..क्यों ..??
जाट बम्बू ठोके हैं .. जाट से राजनीति सीखो ..!
जाट नाराज हो जायेगा.. राज्यसभा भेजो उपराष्ट्रपति बनाओ.. प्रदेश अध्यक्ष बनाओ..! गुर्जर नाराज हो जायेगा तो अल्का गुर्जर ने राज्यसभा भेजो.!
राजपूत तो जड़ खरीद गुलाम है नाराज तो हो ही नहीं सकता..!
-राजेंद्र गुढ़ा पूर्व मंत्री
बंदे में दम है इसलिए खुलेआम बोल रहा है
गुलाम 🔔 तो बोहत है भाजपा में अपने वाले जो खुद तो आम नही खा पाते लेकिन समाज को भी बेच ङालते है दला,ल
जय हो गुढ़ा सरकार समाज को ऐसे नेता की जरूरत है
राजस्थान के क्षत्रिय अपने को बड़ी शान से राजपूत कहते हैं लेकिन राजनीती का उन्हें 'र' भी नहीं आता। अगर उन्हें राजनीती आती तो राजपुताना से राजस्थान हुए प्रदेश पर सदा उनका ही वचंस्व रहता। सर्वाधिक सांसद और विधायक तो होते ही, अधिकतर सीएम भी राजपूत ही बनते।
राजस्थान को राजपूतो ने अपने खून से सींचा है। इसकी कतरा कतरा भूमि पर उनका अधिकार है लेकिन यहाँ वर्चस्व तो दूर की बात राजपूत सत्ता में ठीक से भागीदार भी नहीं है। उनके पास कुछ पद तो हैं लेकिन शासन प्रशासन में सुनवाई नहीं। हिसाब से देखा जाये तो राजस्थान का पहला सीएम किसी राजपूत को ही होना चाहिए था लेकिन राजस्थान को पहला राजपूत सीएम मिला आठवे नंबर पर भैरो सिंह शेखावत के रूप में।
1952 के पहले विधानसभा चुनाव में कुल 160 सीटों में 54 सीटों पर राजपूत विधायक जीते थे और 2023 में 200 में से 20 विधायक।प्रदेश में जब तक कांग्रेस का वर्चस्व रहा, ब्राह्मण और कायस्थ का वर्चस्व रहा। उस समय जनसंघ और भाजपा पूरे देश की तरह राजस्थान में भी अपनी जड़े ज़माने की कोशिश कर रहे थे। राजस्थान में उन्हें इस काम के लिए किसी राजपूत नेता की जरुरत थी क्यूंकि ब्राह्मण उस समय कांग्रेस के साथ थे।
राजपूत राजस्थान के परंपरागत शासक तो थे ही कांग्रेस विरोधी मानसिकता से थे। ऐसे में भाजपा संघ ने एक साधारण राजपूत परिवार के भैरोसिंह शेखावत को प्रदेश की कमान दी और सत्ता भी हासिल की।
राजपूतो ने दिल खोलकर बीजेपी का समर्थन किया, लेकिन जैसे ही बीजेपी बाद में मजबूत हुई, बीजेपी ने राजपूतो को मानसिक रूप से अपना प्यादा बनाकर साइड करना शुरू कर दिया या पिछलग्गू टाइप के राजपूतो को ही आगे बढ़ाया, या दिया कुमारी सिद्धि कुमारी जैसी महिलाओं नेत्रियों को जिससे बीजेपी की राजनीती को कोई खतरा नहीं। इसमें भैरो सिंह शेखावत की अदूरदर्शिता या कहिये दूसरा राजपूत नेता ना पनपने देने की मंशा भी रही होगी इसीलिए उन्होंने वसुंधरा राजे को प्रमोट किया।
आज राजस्थान बीजेपी पूरी तरह से ब्राह्मण बनिया पार्टी बन चुकी है। राजपूतो से चित्तौड़गढ़ सीट तक छीनी जा चुकी है। मुख्यमंत्री तो दूर प्रदेशाध्यक्ष का पद भी राजपूत को नहीं मिलता। कुल मिलाकर राजपूत राजस्थान की राजनीती में निर्णय लेने वाला नहीं केवल वोट देने वाला है। अब इसमें दोष ना तो ब्राह्मण बनियो का है और नाही बीजेपी का। दोष केवल राजपूतो का ही है जो राजनीती करना ही नहीं जानते। केवल भावुक होकर शिकायत करना जानते हैं। राजपूत दिनभर धर्म के रक्षक बने घूमते हैं लेकिन उन्हें युगधर्म का अता पता भी नहीं है।
आम राजपूत मतदाता की बात छोड़िये, राजस्थान के राजपूत नेताओं का पोलिटिकल ओरिएंटेशन भी बहुत कमजोर रहा है। ।
@gssjodhpur@Rajendra4BJP
आनंद मोहन जी ने बिहार में क्षत्रिय राजनीति के साइडलाइन होने का मुद्दा जोर शोर से उठाया, इसका फायदा भले उन्हें न हुआ हो लेकिन समाज को जरूर हो गया।
बीजेपी युवा मोर्चा के अध्यक्ष जितेंद्र सिंह बने
बीजेपी से एमएलसी पवन सिंह बने
राजद से एमएलसी सुनील सिंह बने
#Bihar#Rajput
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घनश्याम तिवाडी ने बगावत की... मिला राज्यसभा का रास्ता और उपसभापति का सम्मान।।
मदन राठौर ने तेवर दिखाए... मिला राज्यसभा और प्रदेश अध्यक्ष का पद।
राजेन्द्र राठौड़ ने पार्टी को मां माना, पूरी निष्ठा से साथ निभाया... और बदले में मिला क्या 🔔
राजस्थान की राजनीति का शायद यही उसूल है
— यहाँ अक्सर तेवरों की कीमत लगती है, वफादारी की नहीं।🤭
"बागियों की आवाज़ सुनी जाती है, गुलामों की नहीं..." 🔥
@Rajendra4BJP@BJP4Rajasthan
घनश्याम तिवारी ने बगावत की तो राज्यसभा सीट और राज्यसभा उपाध्यक्ष पद मिला...?
मदन राठौङ तेली ने बगावत की तो राज्यसभा और प्रदेश अध्यक्ष पद मिला...?
राजेन्द्र राठौर पार्टी को मां माना और मिला क्या 🔔...?
🤭 #राजस्थान
बागी होने के तेवर होते है, गुलामो के नही...
@Rajendra4BJP
बेचारे राठौड़ साहब!!
अखंड पार्टी गुलामी के बावजूद भाजपा ने राज्यसभा नहीं भेजा।
भाजपा शीर्ष नेताओं को खुश करने के लिए रविन्द्र सिंह भाटी पर आपत्तिजनक टिप्पणी की,
महाराज जयचंद को बार बार गद्दार कहा,
पार्टी के लिए प. बंगाल तक दरी बिछाई फिर भी पार्टी खुश नहीं हुई 😭
विचारधारा की लड़ाई अलग है पर जिस तरह से भाजपा और जनसंघ की धुरी अकेला राजपूत समाज रहा है आज उसी समाज को RSS ने सिरे से नकार दिया है।
क्या किसी समाज के साथ इस तरह से धोखा करना जायज है जिसने एक विचारधारा - पार्टी को सिंचा हो?
क्या गुजराती लॉबी अब उत्तर भारत में प्रभावशाली जातियों को हाशिए पर धकेल कर हर जगह ब्राह्मण और बनिया वर्ग को सत्ता सौंपने वाली है?
हां तो भाजपा ने राजपूत समाज से राज्यसभा में किसे भेजा?
Power Centre @SSKharaBJP जी को?
समाज के युवा नेताओं को नौटंकीबाज कहने वाले @Rajendra4BJP जी को ?
और कौन थे रेस में मैने तो इन दो के ही नाम सुने थे।
@pramendrapalri जी बाबोसा का नया कुर्ता पहनने का मौका नहीं मिला अब दिवाली मे
जाटों ने भाजपा को विधानसभा एवं लोकसभा में बुरी तरह से हराया था जबकि राजपूतों ने एकतरफा बीजेपी के लिए वोटिंग की है।
इसके बावजूद भाजपा ने सतीश पूनिया को राज्यसभा भेजा है जबकि कद्दावर राजपूत नेता राजेंद्र राठौड़ तमाम प्रयासों के बावजूद राज्यसभा नहीं पहुंच पाए हैं।
राजस्थान में भाजपा की अगर धुरी कोई समाज रहा है तो वो राजपूत समाज रहा है, लेकिन क्या अब RSS द्वारा राजस्थान बीजेपी में पकड़ बनाने एवं ब्राह्मण मुख्यमंत्री के बाद राजपूतों को बीजेपी में हाशिए पर डाला जा रहा है?
बाबोसा को राज्यसभा उम्मीदवार घोषित करने पर भाजपा को हृदय की अनंत गहराइयों से धन्यवाद एवं आभार....
राजेंद्र राठौड़ साब को प्रधानमंत्री बनाएगी बीजेपी.....
मुझे तो यही लग रहा है.....
#राज्यसभा#राजस्थान
लोग जहां गिरल आन्दोलन को जाति का रंग देने की बात कर रहे हैं,
वहां सुरेन्द्र चौधरी जैसे युवा ने गरीब मजदूरों के दर्द को समझा।
समाज तभी मजबूत होगा जब बात गरीब की होगी।
अमीर चार पैसे फेंककर आपको यूज में लेंगे और समय आने पर दूध में से मक्खी की तरह निकाल फेंकेंगे।
“यूपी जैसे विशाल राज्य में क्षत्रिय समाज को कैबिनेट में शून्य प्रतिनिधित्व देना क्या सामाजिक संतुलन और सम्मान की राजनीति है, योगी जी?
जिस समाज ने हमेशा नेतृत्व और बलिदान दिया, उसे पूरी तरह नजरअंदाज करना कई सवाल खड़े करता है।”
@myogiadityanath
Keshav Prasad Maurya — मौर्य/कुशवाहा (OBC)
Brajesh Pathak — ब्राह्मण
Suresh Khanna — खत्री/वैश्य
Swatantra Dev Singh — कुर्मी (OBC)
Baby Rani Maurya — जाटव/SC
Om Prakash Rajbhar — राजभर (OBC)
AK Sharma — भूमिहार ब्राह्मण
Dharampal Singh — लोध/लोधी (OBC)
Surya Pratap Shahi — भूमिहार/ब्राह्मण
Jitin Prasada — ब्राह्मण
Anil Rajbhar — राजभर (OBC)
Girish Chandra Yadav — यादव (OBC)
Pankaj Chaudhary — कुर्मी/OBC
Rakesh Sachan — कुर्मी (OBC)
Sanjeev Gond — गोंड/ST
और भी पोस्ट में कुछ त्रुटि रह गई हो तो उसका सुधार करे।
सुवेंदु अधिकारी ने जताया राजेंद्र राठौड़ का आभार, राजस्थान के दिग्गज नेता हैं राजेंद्र राठौड़
◆ 'राजेंद्र राठौड़ ने इस जीत का पथ प्रशस्त किया'-सुवेंदु अधिकारी....