माननीय प्रधानमंत्री जी और मुख्यमंत्री जी आपके द्वारा हम संविदा कर्मचारियों के लिए किसी प्रकार का कोई महंगाई भत्ता नहीं दिया जाता है कृपा कर संविदा कर्मचारियों के लिए एक किराने की दुकान खुलवाने की व्यवस्था करें जहां हमे सस्ता सामान मिल सकें
@CMMadhyaPradesh@INCMP@PMOIndia
NHM में हमें बजट की कमी बताकर 2 महीने से वेतन नही मिल रही जबकि राज्य संविदा और Regular की वेतन समय पर और DA भी उनके लिए बजट की कोई कमी नहीं लेकिन हमारे लिए इन्क्रीमेंट भी नाममात्र और महंगाई तो हमारे लिए बढ़ती ही नही है
यह भेदभाव नहीं तो क्या है
@CMMadhyaPradesh@INCMP@NHM_MP
महंगाई बढ़ती है तो सरकार नियमित कर्मचारियों का DA बढ़ा देती है..लेकिन वही महंगाई क्या संविदा कर्मचारियों को नहीं सताती
काम एक जैसा, जिम्मेदारी एक जैसी
फिर भी अधिकार अलग-अलग क्यों?
संविदा कर्मचारी भी इंसान हैं,उन्हें भी महंगाई भत्ता मिलना चाहिए यही सच्चा न्याय है
@CMMadhyaPradesh
महंगाई बढ़ती है तो सरकार नियमित कर्मचारियों का DA बढ़ा देती है
लेकिन वही महंगाई क्या संविदा कर्मचारियों को नहीं सताती?
काम एक जैसा, जिम्मेदारी एक जैसी
फिर भी अधिकार अलग-अलग क्यों?
संविदा कर्मचारी भी इंसान हैं
उन्हें भी महंगाई भत्ता मिलना चाहिए
यही सच्चा न्याय है
@CMMadhyaPradesh
जिनके पेट भरे है उन्हें ही और भोजन परोसा जाता है यह सरकार की कैसी नीति है..क्या हम संविदा कर्मचारियों के लिए महंगाई की कोई अलग व्यवस्था है या हम लोगों के लिए कोई अलग से दुकानें खुलवाई हो जहां हमें महसूस हो की महंगाई हमारे लिए नहीं बड़ी है वहां हमें सस्ती सौदा मिलती हो
@PMOIndia
#संविदाशोषण
संविदा कर्मचारियों को महंगाई भत्ता आखिर क्यों नहीं,महंगाई क्या सिर्फ रेगुलर कर्मचारियों की बढ़ती है क्या हम संविदा कर्मचारियों के लिए महंगाई नहीं बढ़ती, हम उसी भारत के नागरिक हैं जिस भारत के रेगुलर कर्मचारी है,सरकार का यह कैसा समानता का अधिकार
@PMOIndia@RahulGandhi
जिनके पेट भरे है उन्हें ही और भोजन परोसा जाता है यह सरकार की कैसी नीति है...क्या हम संविदा कर्मचारियों के लिए महंगाई की कोई अलग व्यवस्था है या हम लोगों के लिए कोई अलग से दुकानें खुलवाई हो जहां हमें महसूस हो की महंगाई हमारे लिए नहीं बड़ी है वहां हमें सस्ती सौदा मिलती हो..
माननीय मुख्यमंत्री महोदय हम संविदा स्वास्थ्यकर्मियों के साथ यह दोहरा रवैया आख़िर क्यो...?मंहगाई तो सबके लिए समान रूप से बढ़ती है हम भी आपके राज्य के ही निवासी हैं हमारे साथ यह गैरों जैसा व्यवहार क्यों...?
@DrMohanYadav51@rshuklabjp@AmitShah@jitupatwari@narendramodi
आदरणीय गृहमंत्री जी फ़र्ज़ी रिपोर्ट लिखने के पहले तस्दीक़ करने हेतू भी कोई कानून बनाया जाए बिना तस्दीक़ किए f.i.r दर्ज होने के बाद निर्दोष व्यक्ति से ही बेगुनाही के सबूत मांगे जाते हैं जिससे बहुत मानसिक तनाव झेलना पड़ता है मेरे साथ भी कुछ ऐसा ही हो रहा है
@AmitShah@narendramodi
आवेदन करने पर विभाग प्रमुख कहते हैं पता है तुम्हारा नाम फ़र्ज़ी लिखा गया है नाम हट जाएगा लेकिन हमारे यहाँ का कानून ही ऐसा है मैं कभी ऐसे लफड़ों में फंसा नहीं तो मेरे द्वारा सबूत के साथ विश्वास में लेकर ज़मानत के कागज़ों पर भी दस्तख़त ले लिए गए जबकि मेरे और गवाहों की बयान लिए गए
आदरणीय गृहमंत्री जी फ़र्ज़ी रिपोर्ट लिखने के पहले तस्दीक़ करने हेतू भी कोई कानून बनाया जाए बिना तस्दीक़ किए f.i.r दर्ज होने के बाद निर्दोष व्यक्ति से ही बेगुनाही के सबूत मांगे जाते हैं जिससे बहुत मानसिक तनाव झेलना पड़ता है मेरे साथ भी कुछ ऐसा ही हो रहा है
@AmitShah@narendramodi
आदरणीय गृहमंत्री जी फ़र्ज़ी रिपोर्ट लिखने के पहले तस्दीक़ करने हेतू भी कोई कानून बनाया जाए बिना तस्दीक़ किए f.i.r दर्ज होने के बाद निर्दोष व्यक्ति से ही बेगुनाही के सबूत मांगे जाते हैं जिससे बहुत मानसिक तनाव झेलना पड़ता है मेरे साथ भी कुछ ऐसा ही हो रहा है
@AmitShah@narendramodi
ऑस्ट्रेलिया में 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया बेन कर दिया है भारत मे बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करने हेतु ऐसे अच्छे निर्णय कब आएंगे..गन्दी reels बनाने की स्वतंत्रता भारत मे ही क्यों
कृपया ऐसी गन्दी reels बनाने बालों के लिए ठोस कानून कब
@narendramodi@AmitShah