#काला_कानून_वापस_लो
जिसकी आजीविका पर प्रश्न चिन्ह लग गया हो वह किस बात का जश्न मनाए और टूटे मन से कैसा जश्न !!
माननीय सुप्रीम कोर्ट के निर्णय से दुःखी लाखों शिक्षक नहीं मनायेंगे शिक्षक दिवस ।
01 सितम्बर 2025 को माननीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिये गये आदेश से देश भर में 10 लाख से अधिक सरकारी शिक्षकों की नौकरी पर संकट मँडरा गया है ।यदि आदेश को निजी स्कूलों पर लागू किया गया तो इससे प्रभावित शिक्षकों की सम्भावित संख्या करोड़ में होगी ।इसके निर्णय के शिक्षक दुःखी एवं चिन्तित हैं ।
सदैव की भाँति कल 5 सितम्बर को देश एवं सभी प्रदेश की सरकारें मंच सजाकर चंद शिक्षकों को चंद लम्हों का सम्मान देंगी ।उनमें कुछ ऐसे शिक्षक भी होंगे जिन्हें भारत सरकार द्वारा tet को लेकर बनाये गये कानून के कारण दो साल बाद सेवा से निकालने की चिंता सता रही होगी ।क्या ऐसे विषम परिस्थिति में मिलने वाले उस सम्मान को शिक्षक मन से स्वीकार करेगा ।भारत सरकार द्वारा tet को लेकर बनाये गये कानून के क्रम में मा सुप्रीमकोर्ट द्वारा दिए गये निर्णय से देश भर के दस लाख से अधिक सरकारी शिक्षकों के सामने दो वर्ष बाद सेवा से बाहर किए जाने का खतरा उत्पन्न हो गया है इसलिए हम माननीय प्रधानमंत्री जी एवं केन्द्रीय शिक्षा मंत्री जी से अनुरोध करते हैं कि शिक्षकों के साथ न्याय करने की घोषणा करने की कृपा करें ।आपकी घोषणा ही शिक्षकों के लिए वास्तविक सम्मान होगा।
#Justiceforschoolschildren
सरकार 50 से कम छात्रों वाले स्कूलों को बंद करके ग्रामीण बच्चों को शिक्षा से वंचित कर रही है ।साथ ही 149 तक की छात्र संख्या वाले प्राथमिक एवं 99 तक की संख्या वाले उच्च प्राथमिक स्कूलों में प्रधानाध्यापक के पद समाप्त कर रही ह�� अर्थात् अब स्कूल बिना हेड मास्टर के चलाने की योजना है,जिससे शिक्षकों की पदोन्नति के अवसर ही समाप्त हो गए हैं ।स्कूल बंद होने से हजारों रसोइयों की सेवा समाप्त होगी साथ ही भविष्य में शिक्षक बनने की उम्मीद लगाये बैठे DelEd/बीटीसी उत्तीर्ण अभ्यर्थियों की भर्ती नहीं हो पायेगी ।
प्रत्येक तिमाही पर रिकॉर्ड जीएसटी संग्रह पर गर्व करने वाली सरकार को इस प्रकार का निर्दयी /क��ोर निर्णय वापिस लेना चाहिए ।
हमारी माँग है कि कोई भी विद्यालय बंद न किया जाये ।यदि सरकार वास्तव में शिक्षा का हित चाहती है तो प्रत्येक कक्षा पर एक सहायक अध्यापक एवं प्रत्येक विद्यालय में एक प्रधानाध्यापक अनिवार्य रूप से नियुक्त किया जाये ।
सरकार के इस निर्णय से प्रभावित सभी साथियों से अनुरोध है कि 8 जुलाई को संबंधित जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी के कार्यालय पर प्रस्तावित धरने में उपस्थित हो��र अपनी मांगों का समर्थन करें ।
प्रश्न: सरकारी स्कूलों में नामांकन कम क्यों हैं ?
आसान जवाब: दोष सरकारी शिक्षकों पर मढ़ दिया जाए, कि वह पढ़ाता नहीं है
��गर ...
जब सरकारी स्कूल है तो निजी विद्यालयों को मान्यता क्यों दी जा रही है। इसके बावजूद सीमित संसाधनों में सरकारी स्कूल टक्कर दे पा रहे हैं , वह बड़ी बात है।