प्रदेश के गृहराज्यमंत्री आदरणीय श्री जवाहर सिंह बेढम जी को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं प्रकृति आपको स्वस्थ रखें खुश रखें हम आपके दीर्घायु जीवन की कामना करते है। @jawaharbedam
पूर्व मंत्री आदरणीय @Hemaram_INC जी ने अपने सुपुत्र स्व. वीरेन्द्र चौधरी जी की स्मृति में अपनी भूमि को सामाजिक सरोकार से जोड़ते हुए छात्रों के लिए 'वीरेंद्र धाम' हॉस्टल की स्थापना की। यहाँ ज़रूरतमंद छात्र नि:शुल्क रहकर अपनी पढ़ाई पूरी कर सकते हैं।
बाड़मेर दौरे पर 'वीरेंद्र धाम' में छात्रों एवं युवा शक्ति से मुलाकात कर उनके भविष्य से संबंधित विभिन्न मुद्दों पर संवाद किया।
हेमाराम जी और @AdvSunita_ जी को इस नेक कार्य के लिए हार्दिक बधाई। आने वाली पीढ़ियों के लिए यह एक प्रेरणादायी पहल है और इसका लाभ क्षेत्र के विद्यार्थियों को मिलेगा।
@UmmedaRamBaytu@Barmer_Harish@LaxmanGodaraINC
पूर्व मंत्री हेमाराम चौधरी की बेटी ने सचिन पायलट को बाँधी राखी, कहा- भाई वीरेंद्र की मृत्यु के के बाद कीसी को अब तक राखी नहीं बांधी थी।
मंत्री हेमाराम चौधरी और पूर्व डिप्टी CM के रिश्ते काफी गहरे रहे हैं। इस पल ने एक बार फिर हेमाराम चौधरी के परिवार को भावुक कर दिया।
जयपुर नगर निगम में गुर्जर समाज को एक टिकट न देना और प्रतिनिधित्व के सवाल पर चुप रहना—अब विचार करने का समय है। ✍️
मुर्गा अगर बार-बार कसाई के पीछे दौड़े, तो कसूर किसका है? वोट आपका है, फैसला भी आपका होना चाहिए।
कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष श्री @SachinPilot साहब के हम आज भी आभारी हैं कि उन्होंने पहली बार निकाय के चुनाव में प्रभारियों की रिपोर्ट और अनुशंसा पर टिकिट बाँट थे ।। @RahulGandhi@kharge@kcvenugopalmp
“Break the Cage” सिर्फ एक विचार तक सीमित नहीं है, बल्कि हर महिला को अपनी पहचान बनाने, अपने सपनों को हासिल करने का एक संकल्प है। पुणे में आयोजित कार्यक्रम में @RahulGandhi जी का संवाद इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
वास्तविक बदलाव तभी आएगा, जब हम gender stereotypes को चुनौती देंगे, जो लड़कियों और लड़कों के लिए अलग-अलग रास्ते तय करते हैं। महिलाओं को सम्मान और अवसर देना एक प्रगतिशील समाज की शुरुआत है — Break The Cage!
@kcvenugopalmp@priyankagandhi@INCIndia
लोकतंत्र में सवालों पर पहरा नहीं, जवाब जरूरी हैं।
सरकार का काम सच्चाई सामने आने से रोकना नहीं, अपनी कमियों को दूर करना है।
व्यवस्थाओं की खामियों पर पर्दा डालने से समस्याएं खत्म नहीं होतीं—वे और गहरी होती हैं।
जनता को डर नहीं, जवाबदेही चाहिए।
कांग्रेस हमेशा विद्यार्थियों के हितों के साथ खड़ी रही है और आगे भी उनके अधिकारों की हर लड़ाई में उनके साथ मजबूती से खड़ी रहेगी।
@RahulGandhi@INCIndia
पहले गन्ने से इथेनॉल बनाया। E 20 की नीति बनाकर आम जनता की गाड़ियाँ ख़राब कर दी और आज तक स्वीकार नहीं किया कि, ये नीति ग़लत है।अब जिस गन्ने से चीनी बननी थी उससे इथेनॉल बना दिया।अब महंगी चीनी आयात कर रहे है।सरकार की इन दोनों ही नीतियों ने जनता का आर्थिक नुक़सान किया है…
ये सब तो ठीक है विपक्ष में हैं तो सत्ता पक्ष पर सवाल उठाइए @GovindDotasra लेकिन ये बताइए कि अपने बेटे को @Khalbaali हैंडल की आड़ में अपनी पार्टी के नेताओं के ख़िलाफ़ ऐसे भ्रामक प्रचार करने से मना किया है या नहीं? राजस्थान के कई पत्रकारों के मुताबिक़ हैंडल आपके बेटे के ही इशारे पर चलता है। ऐसे ट्वीट अभी तक डिलीट भी नहीं किए गए हैं।
@RahulGandhi@AlankarSawai@kcvenugopalmp
पढ़ाई छोड़कर जब विद्यार्थियों को अपने हक और बुनियादी सुविधाओं के लिए सड़क पर उतारकर धरना देना पड़े, तो यह शिक्षा प्रणाली और व्यवस्था पर गंभीर सवाल है।
मूलभूत सुविधाओं से रहित और असुरक्षित स्कूल भवनों में पढ़ने को मजबूर छात्रों को अब स्कूलों पर तालाबंदी करने की नौबत आ गई है। जिम्मेदार अधिकारियों और मंत्री ने आँखें मूँद रखी हैं।
सरकार को इस पर गंभीरता से विचार करते हुए तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए।
प्रदेश की स्थिति यह है कि भाजपा सरकार में मंत्री ही अपनी सरकार के खिलाफ धरने पर बैठने को मजबूर है।
अलवर से आज जो तस्वीर सामने आई है, वह भाजपा सरकार के फेलियर की पोल खोलती है।
जब सरकार के वन मंत्री को ही अधिकारियों के खिलाफ धरने पर बैठना पड़े और यह कहना पड़े कि “सरकार के आदेश के बाद भी नियुक्ति पत्र क्यों नहीं दिए जा रहे?”, तो सवाल पूरी शासन व्यवस्था का है।
आखिर अफसरशाही इतनी हावी है तो सरकार कौन चला रहा है? सोचिए, आम जनता किस हाल मे जी रही होगी…
सरकार को सफाई कर्मचारियों को नियुक्ति पत्र जारी करना चाहिए।
प्रदेश में जर्जर सरकारी स्कूलों की स्थिति पर हाईकोर्ट को सख्ती दिखानी पड़े, इससे ज्यादा शर्मनाक सरकार के लिए और क्या हो सकता है? जिन स्कूलों में प्रदेश के बच्चे पढ़ते हैं, उनकी इमारतों और बुनियादी सुविधाओं को सुरक्षित रखना सरकार की पहली जिम्मेदारी है।
पिछले वर्ष पीपलोदी में हुई दुखांतिका आज भी दिल दहला जाती है। उसके बाद सरकार ने व्यवस्था सुधारने के कई दावे किए, लेकिन वे सभी जमीनी हकीकत से दूर ही नजर आ रहे हैं।
यह सरकार के गवर्नेंस मॉडल की विफलता है। जर्जर स्कूल भवनों का तत्काल सुरक्षा ऑडिट कराने, वैकल्पिक व्यवस्था होने तक बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और स्कूलों की मरम्मत एवं निर्माण के लिए स्वीकृत फंड के समुचित उपयोग जैसे कई बड़े दावे किए गए थे। हकीकत यह है कि ये दावे — कागजों पर ज्यादा और धरातल पर कम नजर आ रहे हैं।