इस पूरे आंदोलन में अगर किसी ने सबसे संतुलित, जिम्मेदार और समझदारी भरा रुख अपनाया है, तो वह भीम आर्मी सुप्रीमो एवं सांसद चंद्रशेखर @BhimArmyChief हैं।
वैचारिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन जिस संयम और जिम्मेदारी के साथ वह छात्रों से संवाद करते और स्थिति को समझाने का प्रयास कर रहे हैं, वह सराहनीय है।
दुर्भाग्य यह है कि यही भूमिका आंदोलन का नेतृत्व करने वालों को निभानी चाहिए थी। भीड़ को दिशा देने के बजाय वे स्वयं केंद्र में बने रहने की राजनीति में उलझे रहे, और असली मुद्दा धीरे-धीरे पीछे छूटता गया।
@BhimArmy_BEM #संसद_मार्च #CJP #CJPProtest #NEET #छात्र_आंदोलन #दिल्ली_पुलिस @narendramodi
Policy paralysed during UPA was fault of opposition - Raghuram Rajan
This is why it's important to talk about misdeeds of UPA rule otherwise these leftists will whitewash it...
@AamAadmiParty आम आदमी पार्टी में SC ST OBC का कितना नेतृत्व है ? अरविंद केजरीवाल ही क्यों संयोजक के पद पर बने हैं, जबकि पार्टी बनाते समय तो एक या दो बार से ज्यादा कोई संयोजक नहीं रह सकता था ?
आपने राज्यसभा में कितने SC ST OBC को भेजा ?
जितनी तेजी दतिया में कार्रवाई दिखाई गई है, क्या इतनी ही तेजी बांकीपुर की हार पर भी दिखाई जाएगी?
दतिया में तो जिला स्तर के पदाधिकारी को हटा दिया गया. बांकीपुर में तो राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वयं सम्मिलित थे.
तो क्या अब बांकीपुर की हार की भी जिम्मेदारी तय होगी?
क्या राष्ट्रीय अध्यक्ष @NitinNabin को भी पदमुक्त किया जाएगा?
या फिर जवाबदेही का नियम पद के साथ बदल जाता है?
सीखने का प्रयास जारी है.
इस बार झारखंड में चल रहे छात्र आंदोलन को समझने का प्रयास किया गया.
झारखंड के छात्रों की लड़ाई नौकरी भर की नहीं है.
यह लड़ाई है—पारदर्शी परीक्षा, निष्पक्ष भर्ती और अपने भविष्य के अधिकार की.
सालों इंतज़ार, परीक्षा में गड़बड़ियाँ और भर्ती प्रक्रिया की अनिश्चितता ने युवाओं को सड़क पर ला दिया है.
सरकार याद रखे—युवा सवाल पूछ रहा है, जवाब चाहिए. बहाने नहीं.
मैं खुद वहां मौजूद था। सामने वे युवा थे, जिन्होंने वर्षों किताबों में अपना भविष्य तलाशा है—और आज उसी भविष्य के लिए सड़क पर बैठे हैं.
नोट – एक बड़ी गलती हो गई है.जयपाल सिंह मंडल की जगह महतो बोल दिया हूं.उसके लिए क्षमाप्रार्थी हूं.
#jharkhand #StudentProtest #JPSC #JSSC #ranchi
#WATCH | JPSC-JSSC aspirants' protest in Ranchi | Ranchi: Student leader Ravindra Paswan says, "We called this press conference to address the confusion being spread in Jharkhand. We have been staging an indefinite sit-in protest for the past 15 days... We received an invitation from the govt for a delegation meeting, and our first round of talks with the govt delegation concluded yesterday, during which we presented our demands in detail and with logical reasoning, specifically, which exams we are demanding be cancelled and the reasons why, we are demanding a CBI investigation and why we are calling for reforms. The govt delegation listened to our demands very carefully and stated that they would place them before the Chief Minister for consideration and invite us for a second round of talks... what we have witnessed from the government's side today has left us very upset... look at the game the government is playing: today, they accepted memoranda from about 6-7 other organizations. Why are they doing this... What is their intention?... Why are they taking memoranda from NSUI? NSUI is the Congress student wing. What kind of demands would they make? Why are they not on the street protesting against the govt?.. The government is playing games, trying to fragment this movement into 2-3 different factions..."
He adds, "All the students of Jharkhand stand united on a single platform... The government must accept our legitimate demands as soon as possible; otherwise, for the 'Vidhan Sabha March' we have announced for the 10th, 50,000-100,000 students from across Jharkhand will arrive, and that protest will be decisive. This is what we want to convey to the government... Accountability must be fixed that day, and you will have to officially endorse our demands..."
@AdarshKuma70738@DevendraNathMa9 बिल्कुल. छात्र जिस तरह से आंदोलन कर रहे हैं वो सराहनीय है. हेमंत सोरेन को शाबाशी देनी चाहिए और उनकी मांगों को पूरा करके एक मिशाल पेश करें नई व्यवस्था बनाकर.
@HemantSorenJMM के पास सबसे अच्छा समय है खुद को स्थापित करने का.
भूख हड़ताल का 15वां दिन.
एक छात्र नेता, देवेंद्र नाथ महतो (@DevendraNathMa9), पिछले 15 दिनों से झारखंड के लाखों की मांगों के लिए अन्न का एक दाना तक ग्रहण नहीं कर रहे हैं.
हर गुजरता दिन उनके शरीर को कमजोर कर रहा है, लेकिन सरकार की संवेदनाएं अब भी जागती हुई नहीं दिख रहीं.
सरकार @HemantSorenJMM से सिर्फ एक सवाल -
क्या किसी छात्र की आवाज़ तब तक नहीं सुनी जाएगी, जब तक वह हमेशा के लिए खामोश न हो जाए?
लोकतंत्र में संवाद सबसे बड़ा हथियार होता है, लेकिन यहां छात्रों को अपनी बात मनवाने के लिए भूख को हथियार बनाना पड़ रहा है.यह किसी भी लोकतांत्रिक सरकार के लिए आत्ममंथन का विषय होना चाहिए.
देरी मत कीजिए. बातचीत कीजिए. समाधान दीजिए. कहीं ऐसा न हो कि इतिहास यह लिखे कि सरकार सुन सकती थी, लेकिन उसने सुनना नहीं चाहा.
नोट: छात्र की जान किसी भी राजनीतिक जिद से बड़ी है.
#Jharkhand #JharkhandStudents #StudentProtest #DevendraNathMahto
#JPSC
#JSSC @JmmJharkhand
झारखंड के आंदोलनरत साथियों से आज आग्रह नहीं कर रहा हूं, एक जरूरी चेतावनी दे रहा हूं. अपने संघर्ष की आत्मा को बचाइए.
अपने आंदोलन को ‘लाल सलाम’ की राजनीति से बचाइए.
आपने अब तक जो संघर्ष खड़ा किया है, वह किसी दल, विचारधारा या राजनीतिक संगठन की बपौती नहीं है. यह उन हजारों छात्रों की बेचैनी, तपस्या और भविष्य का संघर्ष है, जिन्होंने नौकरी, सम्मान, अवसर और न्याय का सपना लेकर सड़कों का रास्ता चुना है.
याद रखिए. आंदोलन की सबसे बड़ी ताकत उसकी निष्पक्षता होती है और सबसे बड़ा खतरा उसका राजनीतिक कब्ज़ा.
आप न CJP हैं, न वामपंथी.
न भाजपाई हैं, न कांग्रेसी.
आप छात्र हैं.
आपका झंडा किसी पार्टी का झंडा नहीं, आपके भविष्य का झंडा है.
आपका नारा किसी विचारधारा का नारा नहीं, आपके अधिकार की आवाज़ है.
जिस संघर्ष ने अब तक इतिहास में अपनी जगह बनाई है, उसे किसी राजनीतिक रंग में रंगकर छोटा मत होने दीजिए. आने वाली पीढ़ियां जब इस आंदोलन को याद करें तो उन्हें यह नहीं दिखना चाहिए कि किसी दल ने इसे अपने राजनीतिक विस्तार का माध्यम बना लिया था; उन्हें यह याद रहना चाहिए कि झारखंड के छात्रों ने अपने भविष्य के लिए सत्ता और व्यवस्था के सामने सिर झुकाने से इनकार कर दिया था.
इसलिए सावधान रहिए.
जो आपके संघर्ष में शामिल होने आए, उसका स्वागत कीजिए; लेकिन जो आपके संघर्ष की पहचान बदलने आए, उससे दूरी रखिए.
आपकी तपस्या बहुत बड़ी है, लेकिन आपका भविष्य उससे भी बड़ा है. इसे किसी राजनीतिक विचारधारा की भेंट मत चढ़ने दीजिए.
आंदोलन छात्र का है, मुद्दा छात्र का है और इसकी पहचान भी छात्र की ही रहनी चाहिए.
#IssBaarSochnaPadega #Jharkhand #StudentProtest #RanchiStudentProtest #JPSC #JSSC
@ArvindKejriwal अलग ही लेवल पर है बंदा.
चुनाव है 2027 के फरवरी–मार्च में. अगर E 20 से गाड़िया खराब हो रहीं है तो इतने महीने लोग कैसे चलेंगे ? गोवा चुनाव तक पैदल ? या आप जिस गाड़ी में घूमते हैं उसमें ? गोवा वैसे भी आप चार्टर प्लेन से गए होंगे ?
I wish I was making this up.
Months after Tarun Tejpal raped a junior colleague, Newslaundry published an open letter to the victim calling her a “bubblegum feminist” who was whining about a “small occurrence”.
And that was just the start.
Media to CPI(M) elected member: “Why did you join hands with the Congress party to pull down the BJP-led local body gov in Naranganam, Kerala?”
Answer: “Because they chanted ‘Bharat Mata Ki Jai’ while hoisting the national flag on Independence Day.”
The sheer fraud of the INDI Alliance, exposed in a single line. They aren’t just united against the BJP; they are united in their hatred for Bharat Mata itself.
तुलना भी ज्ञान से होती है, अज्ञान से नहीं.
कांवड़ यात्रा और सड़क पर नमाज़ की तुलना करने वाले पहले यह समझ लें कि कांवड़ एक यात्रा है, जिसका उद्देश्य ही पैदल चलकर गंतव्य तक पहुंचना है. इसलिए सड़क उसका स्वाभाविक माध्यम है.
वहीं नमाज़ इबादत है, जिसके लिए मस्जिदें हैं, घर हैं और निर्धारित स्थान हैं. अगर तुलना ही करनी है तो कांवड़ यात्रा की तुलना मुहर्रम के ताज़िया जुलूस से कीजिए. क्योंकि दोनों यात्राएं हैं और स्वाभाविक रूप से सड़कों से होकर ही निकलती हैं.
हर चीज़ में झूठी समानता खोजकर ज्ञानवान बनने की कोशिश मत कीजिए। इससे सिर्फ़ आपकी विषय की समझ पर सवाल खड़े होते हैं.