#न_जन्म_हुआ_न_मरा_क🪷🪷🪷🪷
♦️ कबीर साहेब माता के गर्भ से जन्म नहीं लेते। वे सन् 1398, विक्रमी संवत् 1455 में, काशी के पवित्र लहरतारा तालाब में खिले कमल के पुष्प पर शिशु रूप में सशरीर प्रकट हुए थे। यह कोई सामान्य जन्म नहीं, बल्कि साक्षात् परमात्मा का प्राकट्य था।
#न_जन्म_हुआ_न_मरा_कबीरा
ज्येष्ठ पूर्णिमा, विक्रमी संवत् 1455 (सन् 1398) की ब्रह्म मुहूर्त की वह घड़ी जब कबीर परमेश्वर सतलोक से सशरीर चलकर लहरतारा तालाब के कमल पर शिशु रूप में प्रकट हुए। उसी पावन घड़ी की स्मृति में संत रामपाल जी महाराज की
#न_जन्म_हुआ_न_मरा_कबीरा
कबीर साहेब माता के गर्भ से जन्म नहीं लेते। वे सन् 1398, विक्रमी संवत् 1455 में, काशी के पवित्र लहरतारा तालाब में खिले कमल के पुष्प पर शिशु रूप में सशरीर प्रकट हुए थे। यह कोई सामान्य जन्म नहीं, बल्कि साक्षात् परमा
2Days Left Kabir Prakat Diwas
#न_जन्म_हुआ_न_मरा_कबीरा
600 साल पुराना रहस्य आज भी काशी की धरती गवाह है!
कबीर साहेब वह अविनाशी परमात्मा हैं जो हर युग में जन्म नहीं लेते बल्कि सशरीर प्रकट होते हैं।
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#InvitingTheWorldWithRespect
संत रामपाल जी महाराज की पावन उपस्थिति में 629वां कबीर परमेश्वर प्रकट दिवस 27, 28 व 29 जून 2026 को नेपाल सहित भारत के 14 सतलोक आश्रमों में भव्य रूप से मनाया जा रहा है।
3Days Left Kabir Prakat Diwas
#निमंत्रणसंसारको_सम्मानकेसाथसपरिवार
जगत गुरू तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज जी की पावन उपस्थिति मे कबीर साहेब प्रकट दिवस के उपलक्ष मे सभी सतलोक आश्रमों 27,28,29
June 2026 को तीन दिवसीय समागम का आयोजन किया जा रहा है जिस आप सपरिवार आंमत्रित है।
जिसके जन्म का कोई प्रमाण
नहीं है वह केवल पूर्ण ब्रह्म कबीर साहेब है।
गरीब,
मात पिता जाके नहीं, नहीं जन्म प्रमाण।
यौह पूर्ण ब्रह्म कबीर है, करता हंस अमान।।
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7#संतरामपालजी_का_वरदान
#शुद्ध_जल_पियेगा_हिंदुस्तान
बिधलान गांव को मिली बड़ी राहत
सोनीपत के बिधलान गांव की वर्षों पुरानी पेयजल समस्या और प्रदूषित तालाब की निकासी का हुआ स्थायी समाधान। ग्राम पंचायत की प्रार्थना के मात्र 12 से 15 घंटे के
#GodMorningSaturday
धार्मिक ज्ञान
कबीर, मात पिता सो शत्रु हैं,बाल पढ़ावै नाहिं।
हंसन में बगुला यथा,तथा अनपढ़ सो पंडित माहीं।।
जो माता-पिता अपने बच्चों को पढ़ाते नहीं, मुझे अपने बच्चों के शत्रु हैं। अशिक्षित व्यक्ति शिक्षित व्यक्तियों में ऐसा होता है जैसे हंस पक्षियों में बगुला।
#InvitingTheWorldWithRespect
🙏सादर आमंत्रित हैं आप सभी सपरिवार 629वें कबीर परमेश्वर जी के प्रकट दिवस पर होने वाले विशाल भंडारे में।👇️
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#DrugsFreeBharat
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इसके जीवंत साक्ष्य आज भी लहरतारा तालाब, काशी में विद्यमान हैं। संत रामपाल जी महाराज की पावन उपस्थिति में कबीर साहेब प्रकट दिवस, 27-29 जून को भव्य रूप से मनाया जा रहा है। आइए, सब मिलकर इस ऐतिहासिक अवसर के साक्षी बनें।
#न_जन्म_हुआ_न_मरा_कबीरा🪷🪷🪷🪷
♦️वेद कहते हैं, परमात्मा सशरीर आता है!
ऋग्वेद मण्डल 9, सूक्त 93, मंत्र 2 के अनुसार परमात्मा सशरीर पृथ्वी पर आता है, वही साक्षात् रूप कबीर साहेब का है, जिनका जन्म नहीं हुआ बल्कि सशरीर प्राकट्य हुआ।
#न_जन्म_हुआ_न_मरा_कबीरा
🍁👉He manifests bodily. He appeared on a lotus flower in Kashi's Lahartara pond on Jyeshtha Purnima, Vikram Samvat 1455 (1398 СЕ).🍁⤵️
🪷👉This truth and its proofs, preserved in Kashi, have now been revealed to the world by Sant Rampal Ji Maharaj.🪷
#संतरामपालजी_का_वरदान#शुद्ध_जल_पियेगा_हिंदुस्तान खराब भूजल और महंगे पानी के खर्च से गांव मेहरड़ा को मिली मुक्ति
खारे और प्रदूषित भूमिगत जल के कारण प्रति माह मोल का पानी खरीदने को मजबूर गरीब परिवारों के लिए मीठे पानी की व्यवस्था।
#न_जन्म_हुआ_न_मरा_कबीरा
गरीब, साहिब पुरुष कबीर कूँ, जन्म लिया नहीं कोय।
शब्द स्वरूपी रूप है, घट घट बोलै सोय।।
ज्येष्ठ पूर्णिमा, विक्रमी संवत् 1455 (सन् 1398) की ब्रह्म मुहूर्त की वह घड़ी जब कबीर परमेश्वर सतलोक से सशरीर चलकर लहरतारा तालाब के कमल पर शिशु रूप में प्रकट हुए।
#सत_भक्ति_संदेश
कबीर परमेश्वर जी ने एक जुलाहे के रूप में जीवन व्यतीत किया। 🧵
उन्होंने दिखाया कि भगवान को पाने के लिए धन, दौलत या उच्च जाति की ज़रूरत नहीं होती। ❌💰
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#Bhagyaraj
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वेदों में लिखा है परमात्मा शरीर सहित प्रकट होता है,, कबीर साहेब जी के अतिरिक्त कोई नहीं जो प्रकट हुआ हो.....
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कबीर साहेब प्रकट दिवस" वह पावन दिन है, जब सर्व ब्रह्मांडों के रचनहार स्वयं कबीर परमेश्वर सत्यलोक से चलकर, हम भटकती हुई जीवात्माओं को तारने के लिए पृथ्वी पर सशरीर अवतरित हुए।
पांच तत्त्व की देह ना मेरी, ना कोई माता जाया।
जीव उदारन तुम को तारन, सीधा
#न_जन्म_हुआ_न_मरा_कबीरा
कलियुग में वे काशी के लहरतारा तालाब में, कमल के फूल पर, विक्रमी संवत् 1455 (सन् 1398) की ज्येष्ठ पूर्णिमा को सशरीर प्रकट हुए और इसके साक्ष्य आज भी काशी में मौजूद हैं। जिन्हें संत रामपाल जी महाराज ने उजागर किया है।
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