महिलाओं की नई मुहिम...
कोई महिला कंसर्ट देख रही है या कोई फिल्म देख रही है या अपने ऑफिस में काम कर रही है या यात्रा कर रही है । ऐसे में अगर अनपेक्षित पीरियड शुरू हो जाए और गलती से उसके पास नैपकिन नहीं हो तो क्या विकल्प बचता है? सारे काम छोड़कर घर चली जाए या जो साथ है उनको बताएं कि नैपकिन की जरूरत है या चुपचाप इंतजार करें या वॉशरूम में जाकर कोई सा भी कपड़ा काम में ले ले?
बात छोटी सी है पर गंभीर है। भारत में पीरियड्स आज भी खुलेआम कही जाने वाली बात नहीं है। तो महिलाएं ऐसे समय में यात्रा करना या लंबे समय तक घर से बाहर रहना अवॉइड करती हैं।
इसी मुद्दे को लेकर मरुधर नारी सशक्तिकरण संगठन (MaNSSa) ने भारत के प्रधानमंत्री, राजस्थान के मुख्यमंत्री, चीफ सेक्रेटरी, राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष एवं राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष को जोधपुर जिला कलेक्टर के माध्यम से ज्ञापन दिया है कि सारे मॉल, कंसर्ट हॉल, सिनेमा हॉल, ऑफिस, हाईवे के पेट्रोल पम्प, रेस्टोरेंट मोटेल आदि के महिला वॉशरूम के भीतर Paid सेनेटरी नैपकिन वेंडिंग मशीन लगवाई जाए। हमें कुछ भी निःशुल्क नहीं चाहिए लेकिन भारतीय परिवेश में हमारी सुचिता एवं गरिमा के लिए यह जरूरी है।
किसी भी नए विचार की शुरुआत कहीं ना कहीं से होती है। ऐसे ही किसी एक विचार की शुरुआत हुई होगी कि पेट्रोल पंपों पर वॉशरूम की व्यवस्था होनी चाहिए और फाइनली आज समस्त पेट्रोल पंपों पर अनिवार्य तौर पर वॉशरूम की व्यवस्था की जा चुकी है। उम्मीद है, महिलाओं के इस जरूरी विषय पर भी बात कहीं ना कहीं से शुरू हुई है और परिणाम कभी ना कभी आएगा। खुशी की बात यह है कि यह विचार जोधपुर की महिलाओं ने सबसे पहले रखा है।
@narendramodi@BhajanlalBjp@VijayaRahatkar
SIR related order
सभी PEEO/UCEEO को मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण कार्य का HELP DESK प्रभारी नियुक्त किया गया है।
सभी PEEO/UCEEO को पालनार्थ प्रेषित।
स्कूल चलाने वालों की पीड़ा...
6 दिसंबर के बाद होने वाली अर्धवार्षिक परीक्षा 15 नवम्बर से है। BLO पहले से नहीं आ रहे ऊपर से यह एक्स्ट्रा काम।
कोर्स कैसे करवाएंगे?
@madandilawar@RajCMO
प्रिंसिपल, वाइस प्रिंसिपल, लेक्चरर, अध्यापक, प्री प्राइमरी टीचर को बनाया BLO
एक ही स्कूल से 4-4 टीचर को लगाया BLO कार्य के लिए
शिक्षा विभाग के लोग हैरान भी हैं और परेशान भी। हालांकि बोलने की हालत में नहीं हैं।
विद्यालय व्यवस्थाओं को बनाए रखते हुए ही चुनाव कार्य होना चाहिए
गरीब को जितना दबाओ, उतना कम...
यह कहावत यूं ही नहीं बनी। और इस कहावत को स्थापित करने और निरंतर मान्यता देने के लिए कुछ लोग विशेष प्रयास करते हैं। नीचे आप जो लिस्ट देख रहे हैं, ये दरें प्रतियोगी परीक्षा में सवेरे 7 बजे से शाम 6 बजे तक तैनात सरकारी कार्मिकों को मिलने वाले मानदेय की है। चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को पूरे दिन के 190 रुपए दिए जा रहे हैं। लेकिन इतना ही काफी नहीं है। उसे दो पारी की परीक्षा के बाद रुककर स्कूल में सफाई भी करनी पड़ेगी। बाकी कर्मचारियों और अधिकारियों के मानदेय भी देखने लायक है।
श्रमिक कानूनों का उल्लंघन करने पर राजस्थान लोक सेवा आयोग और कर्मचारी चयन बोर्ड पर कार्रवाई का कोई प्रावधान है भी या सरकार की सहमति से यह शोषण हो रहा है?
@RPSC1@alokrajRSSB
@arvindchotia हम तो शुक्रगुजार हैं विभाग के कि जीते जी अंगदान के आदेश जारी नहीं किए वरना ज्यादातर शिक्षकों को टारगेट पूरा करने के लिए एक आंख, एक किडनी, रक फेफड़े से कम चलाना पड़ता ।
@blockbylibrandu@arvindchotia बच्चे बिल्डिंग के अंदर नही बैठेंगे यह किसने कहा कि बच्चों को पढ़ाया नहीं जाएगा ।
भारत मे शिक्षकों को पेड़ के नीचे पढ़ाने की आदत है
केवल इतना ही कर दो, जब तक सुरक्षा प्रमाण पत्र नहीं मिलता, कोई संस्था प्रधान बच्चों को कक्षा कक्ष में बैठने की अनुमति नहीं देगा।
चाहे भवन नया ही क्यूं न बना हो
इसे ही आंदोलन बना लो
(शिक्षकों के बीच चल रहा एक मैसेज)
@arvindchotia बताया जा रहा है 2022 में पंचायत द्वारा रिपेयर कार्य हुआ था
निर्माण की मोनिटरिंग करने वालों को सस्पेंड किया तो निर्माण से जुड़े व्यक्तियों अब तक पर 7 बच्चों की हत्या का मुकदमा दर्ज क्यों नहीं हुआ
@Khurpench_ क्योंकि वहाँ बलि चढ़ने के लिए कोई शिक्षक नहीं है।
शिक्षक झाड़ू लगा दे, टॉयलेट साफ कर दे बिल्डिंग रिपेयर कर दे, बिल्डिंग गिरे तो जिंदा न बचे
और जिनकी इन कामों के लिए बजट देने की जिम्मेदारी है वो क्या करें?
@vishal6109@arvindchotia क्यों शिक्षक अपनी सेलेरी क्यों देंगे
शिक्षकों ने मरम्मत के बजट को रोक रखा था ?
शिक्षक झाड़ू लगा दे, टॉयलेट साफ कर दे बिल्डिंग रिपेयर कर दे, बिल्डिंग गिरे तो जिंदा न बचे
और जिनकी इन कामों के लिए बजट देने की जिम्मेदारी है वो क्या करें
आज स्कूलों में रौनक लौट आई...
स्कूलों में प्रवेशोत्सव मनाया गया। दृश्य जोधपुर के राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय भाकरासनी का है। सभी बच्चों के थंब इंप्रेशन विविध रंगों में इस प्रतीक रूप में लिए गए कि शिक्षक अपने ज्ञान का बीजारोपन कर इस बीज से बने एक विशाल वृक्ष की शाखाओं और पत्तियों के रूप में अपने शिक्षार्थियों को देखता है।
बहुत सुंदर और सकारात्मक। सरकारी स्कूलों में स क्रिएटिविटी उम्मीद बढ़ाने वाली है।