“मेरे पास पाँच मास्टर्स की डिग्रियाँ हैं। फ्रेंच फ़िलॉसफ़ी में मैंने फ़्रांस से मास्टर्स किया है, लेकिन मैं दावे के साथ कह सकता हूँ कि अगर मंडल कमीशन नहीं होता, तो मैं JNU में प्रोफ़ेसर नहीं होता। मेरिट के नाम पर हमारे अस्तित्व को ही अपराध बना दिया गया है।”
~ डॉ. Sharad Baviskar
अपने संघर्षों की कहानी "भूरा" में डॉ. @baviskar_sharad लिखते है:
“सामाजिक व्यवस्था सभी को समान संसाधन और समान अवसर उपलब्ध नहीं कराती; लेकिन यदि थोपी गई पहचानों से बाहर निकलना है, तो संघर्ष ही एकमात्र रास्ता है।”
@ErDurgeshPande7 तब आप किसे चूंनेंगे अपनी पार्टी बनाओ।
अपना घोषणापत्र जारी करो👇
1अगर सत्ता मे आई तो आरक्षण जड़ से उखाड़ फेंकेंगे।
2 प्राईवेट सेक्टर में केवल ब्राह्मण का दबदबा रहेगा।
3 मिडिया उनकी रहेगी।
4 जुडिशरी ब्राम्हणों की होगी।
@ErDurgeshPande7 तब आप किसे चूंनेंगे अपनी पार्टी बनाओ।
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3 मिडिया उनकी रहेगी।
4 जुडिशरी ब्राम्हणों की होगी।
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1अगर सत्ता मे आई तो आरक्षण जड़ से उखाड़ फेंकेंगे।
2 प्राईवेट सेक्टर में केवल ब्राह्मण का दबदबा रहेगा।
3 मिडिया उनकी रहेगी।
4 जुडिशरी ब्राम्हणों की होगी।