भैराणा संत आंदोलन के पीछे IAS शिखर अग्रवाल?
सूत्रों के मुताबिक, जब संतों का प्रतिनिधिमंडल ACS रीको शिखर अग्रवाल से मिलने गया, तो उनके कथित दुर्व्यवहार और संतों के अपमान के बाद ही आंदोलन ने उग्र रूप लिया!
CMO में 2 साल के कार्यकाल के दौरान भी सरकार की छवि को नुकसान पहुंचाने के आरोप उन पर लगते रहे हैं। चर्चा है कि रीको जैसे महत्वपूर्ण विभाग में उनकी कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं। क्या केंद्र सरकार उनकी संपत्ति की जाँच करेगी
क्या सरकार उनके विभाग बदलने पर विचार करेगी?
संतो को अपमान नहीं सहेगा राजस्थान.......
#RajasthanPolitics
@PMOIndia@HMOIndia
प्रदेशाध्यक्ष का रास्ता रोकने पर रातों -रात SP ज्ञानचंद यादव को हटा दिया,,,
कार्यकर्ताओं को जमानत देने वाले SDM को हटा दिया!
लेकिन कैबिनेट मंत्री किरोड़ी मीणा को ऑन कैमरा बेज्जत करने वाली महेश नगर SHO कविता शर्मा का मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने बाल बांका नहीं होने दिया था!
देख रहे हो मुख्यमंत्री के जातिवाद की पराकाष्ठा?
जबकि कैबिनेट मंत्री किरोड़ी मीणा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके SHO कविता शर्मा के फर्जीवाड़े से नौकरी लगने तक के सबूत भी दिए थे!
एक मुख्यमंत्री जैसे पद पर बैठे व्यक्ति को ये सब शोभा नहीं देता है!
राजनीति में मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन अगर किसी जनप्रतिनिधि की सुरक्षा को ही राजनीति का हथियार बना दिया जाए तो यह बेहद चिंताजनक है।
नागौर सांसद श्री @hanumanbeniwal जी की सुरक्षा कम करना केवल एक व्यक्ति का मुद्दा नहीं, बल्कि लोकतंत्र में विपक्ष की आवाज़ को दबाने जैसा संदेश देता है।
क्या राजस्थान सरकार और प्रशासन अब निष्पक्षता छोड़ राजनीतिक दबाव में काम कर रहे हैं?
अगर किसी नेता की सुरक्षा उसकी विचारधारा या सरकार की आलोचना पर तय होने लगे, तो यह लोकतंत्र के लिए खतरनाक संकेत है।
भजनलाल सरकार को राजनीतिक विरोध ���र जनप्रतिनिधियों की सुरक्षा व्यवस्था को अलग-अलग रखना चाहिए। मैं केंद्र सरकार से मांग करता हूँ कि सांसद श्री #HanumanBeniwal की सुरक्षा की निष्पक्ष समीक्षा कर उन्हें उचित सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए। @PoliceRajasthan @Rajeev_ips @RajCMO @PMOIndia @AmitShah
राजनैतिक टिप्पणी करने के कारण हनुमान बेनिवाल जी को दी हुई सुरक्षा व्यवस्था हटाना, क्या दिमाग़ी दिवालियेपन का प्रमाण नहीं है ?
राजस्थान के मुख्यमंत्री के साथ-साथ क्या पुलिस अधिकारी भी अपनी निष्पक्षता भूल चुके है ?
हनुमान बेनिवाल जी कि सुरक्षा की ज़िम्मेदारी राज्य सरकार ओर पुलिस प्रशासन की है उनकी सुरक्षा से ख��लवाड़ मुख्यमंत्री @BhajanlalBjp जी की निजी खीज दिखाई देती हैं…
हनुमान जी के कुछ भी हुआ तो इसके ज़िम्मेदार भजनलाल जी होंगे…
मैं केन्द्र सरकार से हनुमान बेनिवाल जी को केन्द्रीय सुरक्षा बल की सुरक्षा देने की मांग करता हूँ
@AmitShah @Rajeev_ips @PMOIndia
@hanumanbeniwal @RLPINDIAorg @INCRajasthan
OMR घोटाले में “सीक्रेट मीटिंग” की चर्चा तेज… आखिर किस बात पर बनी सहमति?
राजस्थान के चर्चित कथित OMR घोटाले को लेकर अ�� नई चर्चाओं ने बाजार गर्म कर दिया है। जानकार सूत्रों के अनुसार दो खुलासे के बाद ही घबराए आरोपी के साथ स्वंभू नेता से एक “महत्वपूर्ण मीटिंग” हुई, जिसमें राजस्थान बेरोजगारों के स्वयंभू बेरोजगार नेता, SOG में दर्ज 2025 की FIR के अनुसार नामजद मुख्य आरोपी और एक पूर्व प्रमोटी अधिकारी के शामिल होने की चर्चा है।
सूत्रों का दावा है कि इस बैठक में पूरे मामले को ज्यादा हवा नहीं देने और सोशल मीडिया पर इसको सीमित रखने को लेकर सहमति बनी। सवाल यह उठ रहा है कि आखिर बेरोजगारों की लड़ाई लड़ने का दावा करने वाले लोग अचानक नरम क्यों पड़ गए?
चर्चा यह भी है कि यह पूरी कवायद किसी “तारों की छत्रछाया” में हुई। बड़ा सवाल है कि क्या बेरोजगारों की आवाज उठाने का दावा करने वाले कुछ चेहरे पर्दे के पीछे समझौते की राजनीति कर रहे हैं? क्या खुलासे की आड़ में सौदेबाजी हुई?
सूत्रों की मानें तो जांच एजेंसी को सांगानेर तहसील कार्यालय का रुख जल्दी करना चाहिए...वहां से कुछ अहम कड़ियां मिलने की चर्चाएं तेज हैं।
बेरोजगार युवा अब सिर्फ एक सवाल पूछ ��हे हैं —
“हमारी लड़ाई लड़ने वाले आखिर हमारे साथ हैं… या किसी और के?”
#पीटीआई_भर्ती_2022
इस भर्ती में जिस तरीके का फर्जीवाड़ा हुआ है शायद ही ऐसा कोई त��ीका बचा हो जो बाकी रहा हो ।
नाम :- सुनीता चौधरी
पीटीआई पोस्टिंग :- धौलपुर
बीपीएड :- माधव यूनिवर्सिटी सिरोही(2020)
बीएड :- पंडित दीनदयाल यूनिवर्सिटी(2020)
दोनों रेगुलर कोर्स
कर्मचारी चयन बोर्ड और शिक्षा विभाग का कोई भी अधिकारी ये अवगत करवा सकता हैं,क्या ये संभव है ??
ये एक उदाहरण है, ऐसे सैकड़ों कैंडिडेट हैं जिन्होंने बैक डेट से डिग्री लेकर गलत तरीके से चयन प्राप्त किया ।
माधव यूनिवर्सिटी से कई बार न��यूज चैनलों के माध्यम से दावा किया कि वो बैक डेट से किसी भी कैंडिडेट को डिग्री नहीं दी , इसका जवाब भी माधव यूनिवर्सिटी ��े पास होना चाहिए, क्यों कि पंडित दीनदयाल यूनिवर्सिटी ने तो बैक डेट से डिग्री दी नहीं , इस यूनिवर्सिटी ने तो सरकारी काउंसलिंग के माध्यम से एडमिशन दिया ।
माननीय मुख्यमंत्री @BhajanlalBjp जी, शिक्षा मंत्री @madandilawar जी निवेदन है कि ऐसी यूनिवर्सिटी पर ठोस कदम उठाएं।
***विशेष :- मेजर जनरल साहब @alokrajRSSB जी निवेदन है पीटीआई भर्ती 2022 में 33000 से ज्यादा बैक डेट डिग्रियां जो अनेक यूनिवर्सिटी से आई हैं जिनका 2022 की भर्ती में चयन नहीं हुआ उनका निस्तारण करे , अन्यथा 2026 वाली भर्ती में यही हालत होंगे ।
उदाहरण के लिए js यूनिवर्सिटी के कैंडिडेट 2022 की भर्ती में 2500 के लगभग फॉर्म थे जिनमें से 206 कैंडिडेट सिलेक्ट हुए, बाकि की डिग्रियां 2026 में बिना मिसमैच फॉर्म भरेंगे क्यों कि उन्होंने तो 2022 में ही डिग्री ले ली , उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी ।
* 2022 की तरह बोर्ड शिक्षा विभाग को दोषी बताएगा और शिक्षा विभाग बोर्ड को और रोएगा जो मेहनत के बावजूद वंचित रहेगा ।
@rajeduofficial से निवेदन है ऐसे सुनीता जैसे सैकड़ों फर्जी कैंडिडेट ��ा पीटीआई भर्ती 2022 में फिक्सेशन जल्दी से जल्दी करे ताकि वो बच सके और बिना कोई डर आराम से नौकरी करे , और बेरोजगार ऐसे ही कीड़े मकोड़े की तरह फॉर्म भरते रहे ।
@TheLallantop @pantlp @News18Rajasthan @HITEN_RAJASTHAN @hemantkumarnews @1K_Nazar @ABPNews @educationnagari @vijaysharmahnd @saten_08 @sarviind
“ये सिर्फ views नहीं हैं…
ये पत्रकारिता के गिरते स्तर और देखने वालों की बदलती मानसिकता—दोनों का आईना हैं।”
आज देश में बेरोज़गारी, शिक्षा, किसानों, युवाओं के भविष्य और व्यवस्था जैसे गंभीर मुद्दे खड़े हैं…
लेकिन हम क्या देख रहे हैं?
तीन दिनों से एक ऐसे विषय पर बहस चल रही है
जिसका समाज और देश के विकास से शायद कोई वास्तविक संबंध ही नहीं है।
सबको सिर्फ views चाहिए…
और views की इस भूख ने
धीरे-धीरे हमारी सोच, हमारे आदर्श और हमारी संवेदनाओं का स्तर गिरा दिया है।
मनोविज्ञान कहता है—
“जिस समाज का ध्यान बार-बार तुच्छ चीज़ो��� की ओर मोड़ दिया जाता है,
वह धीरे-धीरे गंभीर मुद्दों पर सोचना छोड़ देता है।”
और शायद ��ही सबसे बड़ा खतरा है।
डॉ. धीर सिंह धाभाई
#melody
"RGHS - चोर का दंड फकीरों को"
आरजीएचएस योजना आज गंभीर अव्यवस्थाओं का शिकार होती नजर आ रही है। मरीज दर-दर भटकने को मजबूर हैं, कर्मचारी आंदोलन कर रहे हैं और अस्पताल महीनों से भुगतान का इंतजार करते हुए आर्थिक संकट झेल रहे हैं। विडंबना यह है कि कर्मचारिय���ं के वेतन से हर महीने नियमित रूप से RGHS की कटौती हो रही है, लेकिन इलाज के समय उन्हीं कर्मचारियों और पेंशनर्स को अपनी जेब से हजारों रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं।
दवाओं और जांचों की सूची लगातार सीमित की जा रही है, उपचार सुविधाएं घटती जा रही हैं और दूसरी ओर चिकित्सा मंत्री श्री @GajendraKhimsar जी इसे 800 करोड़ रुपये की “बचत” बताकर उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर यह ब��त किस कीमत पर हुई? क्या कर्मचारियों, पेंशनर्स और मरीजों की परेशानियां बढ़ाकर की गई बचत को ��पलब्धि माना जा सकता है?
यदि योजना में कहीं पर गड़बड़ियां थीं तो जिम्मेदार गड़बड़ी करने वाले लोगों पर कार्रवाई होनी चाहिए थी, लेकिन दुर्भाग्य से पूरी व्यवस्था का बोझ ईमानदार कर्मचारियों, पेंशनर्स और मरीजों पर डाल दिया गया। आज स्थिति यह बन गई है कि नियमित कटौती के बावजूद मरीजों को समय पर इलाज, दवाइयां और जांच तक उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं। अस्पताल भुगतान न मिलने से RGHS मरीजों का इलाज करने से भी ��िचक रहे हैं।
माननीय मुख्यमंत्री @BhajanlalBjp जी सच तो यह है कि RGHS योजना में वर्तमान हालात “चोर का दंड फकीरों को” जैसी स्थिति पैदा कर चुके हैं। गड़बड़ियां किसी और ने कीं, लेकिन उसकी सजा कर्मचारी, पेंशनर्स और आम मरीज भुगत रहे हैं। सरकार को चाहिए कि वह इस योजना की कमियों को दूर करे, अस्पतालों का लंबित भुगतान तुरंत जारी करे, दवाओं और जांचों की सुविधाएं बहाल करे तथा कर्मचारियों और पेंशनर्स का भरोसा फिर स��� कायम करे।
#RGHS #आरजीएचएस #कर्मचारी_हित
@ashokgehlot51 @GovindDotasra @TikaRamJullyINC @svoruganti1466 @DrSatishPoonia @AvinashGehlot_ @officialRGHS @artizzzz @Nathmal70602774 @drarushimalik@IASNJ @AshishModiIAS
लाइब्रेरियन ग्रेड-II भर्ती मामले में हाईकोर्ट में महत्वपूर्ण सुनवाई हुई-कोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा कि डिग्री वेरिफिकेशन में इतना ज्यादा समय क्यों लग रहा है।
यूनिवर्सिटी मान्यता प्राप्त,अभ्यर्थ��यों की डिग्री वैध है।पहले नियुक्ति मिल चुकी है, फिर वर्तमान अभ्यर्थियों को क्यों रोका
अब PTI भर्ती फॉर्म भरवाने के वक्त कैंडिडेट्स को अपनी डिग्री, खेलकूद के सर्टिफिकेट्स सब पहले से ही अपलोड करने होंगे।
यानि फर्जीवाड़ा करना हो तो पहले से ही खरीदने होंगे दलालों से।
फिर पास नहीं हुए, पकड़े गए तो पैसे भी गए और नौकरी भी, debar, हवालात अलग।
सीधे चलो।
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RGHS योजना से सरकार पर व्यय भार ज्यादा आ रहा है बहुत सी गडबडियाँ और लीकेज है - गजेन्द्र सिंह खिंवसर चिकित्सा मंत्री
माननीय आपके बताने की जरूरत नही है आपके इरादें पहले से ही नेक नही है बंद करने की फिराक में हों लेकिन योजना से छेडछाड की कोशिश की गई तो ईंट का जवाब भाटे से दिया जायेगा.😡