बहुत छोटा था मैं, हम सपरिवार ट्रेन में थे।
शायद राजधानी थी क्योंकि वहाँ एक आदमी ऐसे ही कुछ हैंडमेड म्यूजिक इन्स्ट्रमन्ट बजाता हुआ आया तो साथ की बर्थ वाली आँटी ने कहा था कि ‘हुँह अब राजधानी में भी भिखारी चढ़ जाते हैं, कोई रोकता नहीं इन्हें’
मुझे उस गाने वाले अंकल का चेहरा धुंधला-धुंधला याद है। उनकी आँखें थी ही नहीं, मतलब आँखों का साकिट ही खाली था। उनके साथ एक व्यक्ति और चल रहा था जो लोगों से चिल्लड़ कलेक्ट कर रहा था। हमारी बर्थ से भी पापा ने उनको 1 या 2 रुपये दिए होंगे... अमाउन्ट याद नहीं।
पर ये अच्छे से याद है कि जिन आँटी ने मुँह बिचकाया था, उनके साथ बैठे अंकल ने सूरदास को रोक लिया और वहीं (नीचे बैठकर) गाने को कहा। उन्होंने राम,
कृष्ण और शिवजी के कुछ भजन सुनाए। कोई आधा घंटा वो म्यूजिक सेशन चला और अंत में उन्हें अंकल ने एक नोट दिया, जो शायद 50 का होगा, या 100 का... पता नहीं, लेकिन उन अंकल के साथ चलते व्यक्ति के चेहरे की खुशी याद है।
उस भजन में जाने क्या सुर थे कैसी ताल, पर माँ बताती हैं कि मैं कई हफ़्ते तक घर में गुनगुनाता रहता था।
बड़े होने पर जब भी कभी ट्रेन में सफ़र किया और कोई गायक दिखा तो उसे जितनी सामर्थ हुई, दान ज़रूर दिया क्योंकि ये मुझे कभी भिखारी नहीं लगे।
मेरा मानना है कि ट्रेन में गाते ये अनाम गायक कलाकार हैं... इनमें कुछ भक्त हैं, कुछ फ़िल्मी दीवाने हैं और कुछ शायद सिर्फ धन कमाने के लिए करते हों, पर कलाकार तो हैं इनमें। इनकी आवाज़ और सुर, बार-बार लगातार गा-गा के पक्के हो गए होते हैं।
इन्हें इसलिए भिकारी नहीं कहा जा सकता कि ये ट्रेन में माँग रहे हैं। असल में इन्हें मंच नहीं मिला है।
अब देखिए सुनील लोधी को मंच मिला तो क्या ग़जब मिला कि हर तरफ़ इनकी बात हो रही है।
कमाल देखिए कि वह जिस भजन से प्रचलित हुए ‘मैंने तेरे ही भरोसे, हनुमान सागर में नैया डार दई’
उसी भजन ने उन्हें चीफ मिनिस्टर मोहन यादव तक पहुँचा दिया और उन्होंने सुनील लोधी की आँखों का इलाज करवाने का ऐलान भी कर दिया।
अब आप इसे भक्ति का चमत्कार कहिए, कलाकार की सही परख कहिए या इसे सिर्फ तुक्का और किस्मत का नाम दे दीजिए, पर रिजल्ट तो यही है कि जिसने उसके भरोसे सागर में नैया डार दी वो पार तो लग गया।
थैंक्स टू सुनील लोधी, अब अगली बार, जब आपको ट्रेन या बस में कोई गाता दिखेगा, तो यकीनन आप उसे सिर्फ़ भिखारी तो नहीं समझेंगे।
मित्र - सिद्धार्थ अरोड़ा 'सहर' की एफबी पोस्ट
सर, आपके बताए अनुसार मैने मूँगा और मोती लॉकेट में गले में इसी 17 को पहना और अगले दिन से मेरी लड़ाई शुरू हो गई मेरे सीनियर के साथ। क्या हुआ कुछ समझ नहीं पा रहा? आप कुछ सुझाए
The real cost of India's data boom isn't wasted time.
It's the quiet erosion of our ability to wait.
Cheap mobile data has given millions of young Indians unlimited entertainment in their pockets. Every notification, every reel and every swipe offers an instant reward. The brain adapts. Over time, it begins to expect that every worthwhile experience should arrive immediately.
That is where the real damage begins.
Books ask you to stay with one idea for hours. Newspapers ask you to understand context instead of headlines. Learning a skill demands months of practice. Building a business takes years. Investing requires patience. None of these activities deliver dopamine every few seconds.
Scrolling does.
India reached the smartphone age long before it reached widespread prosperity. We imported the world's most addictive digital products while we were still trying to build human capital. The result is a strange mismatch. We have first-world levels of digital stimulation, but we are still a country that desperately needs first-generation learners, skilled workers, entrepreneurs, scientists and readers.
The opportunity cost is enormous.
Every hour spent mindlessly scrolling is an hour not spent building knowledge that compounds for decades.
Reading is different. A book slows the mind down. It strengthens attention, curiosity and independent thinking. Newspapers teach you to connect events instead of reacting to isolated headlines. Productive learning develops skills that increase your earning power for life.
These are all compound investments.
Social media mostly compounds for the platform.
A nation does not become rich because it consumes the world's most data. It becomes rich because its people accumulate knowledge, skills and productive habits.
Perhaps we are measuring the wrong statistic.
Instead of celebrating data consumption per person, we should ask a different question.
How many books does the average young Indian read every year? How much uninterrupted time do they spend learning something difficult?
Those numbers will tell us far more about India's future than gigabytes ever will.
#वास्तुशास्त्र - पार्ट 1
प्राचीन भारत में वास्तु
वास्तु का जो वर्तमान स्वरूप है वो आधुनिक ग्रंथों से विकसित हुआ है, शुरुआती ग्रंथो में इसे बीज रूप में लिया गया है।
जैसे -
1. ऋग्वेद
वास्तोष्पते प्रति जानीह्यस्मान् स्वावेशो अनमीवो भवा नः।
यत्त्वेमहे प्रति तन्नो जुषस्व शं नो भव द्विपदे शं चतुष्पदे॥
हे वास्तोष्पति
हमारे इस घर को पहचानकर इसमें निवास करें। हमारे घर को रोग, क्लेश और अशांति से मुक्त रखें। हमारे परिवार तथा पशुओं का कल्याण करें।
इसमें निर्माण के संबंध में जिक्र नही है बल्कि वास्तोष्पति नामक देवता का जिक्र है जिसका आह्वान किया गया है घर में सुख समृद्धि के लिए।
2. अथर्ववेद - इसमें गृह सूक्त है , मेने पढ़ा है उसमे भी वास्तु को लेकर विस्तृत जिक्र नही है, बस कामना की गई है कि घर इसमें रहने वालो सुख सुविधा दे और रक्षा करे।
3. रामायण -
वाल्मीकि रामायण में वास्तु शब्द कम आता है, पर नगर निर्माण, भवन योजना और दिशा-विन्यास का अत्यंत सुंदर वर्णन है।
बालकाण्ड का श्लोक
आयता दश च द्वे च योजनानि महापुरी।
श्रीमती त्रिणि विस्तीर्णा सुविभक्ता महापथा॥
अयोध्या बारह योजन लंबी और तीन योजन चौड़ी थी। उसके मार्ग सुव्यवस्थित थे।
यह नगर-योजना (टाउन Planning) का उत्कृष्ट उदाहरण है।
इसके अलावा भगवान राम चित्रकूट में लक्ष्मण को एक कुटिया निर्माण का कहते है उसके बारे में एक श्लोक है। ये अयोध्या काण्ड में है।
ततोऽब्रवीन्महातेजा लक्ष्मणं रघुनन्दनः।
इहैव क्रियतां सौम्य पर्णशाला ममानघ॥
इसके बाद लक्ष्मण जलस्रोत के निकट, समतल और रमणीय स्थान पर कुटिया का निर्माण करते हैं।
भगवान ये भी बोलते है कि गृह निर्माण के बाद देव पूजन जरूरी है, जिसे आजकल वास्तु पूजन में बदल दिया गया है।
इसके अलावा लंका निर्माण का श्रेय मय ऋषि ( मय दानव ) को दिया जाता है।
एक भ्रम इंटरनेट पर चलता है कि राम , लक्ष्मण को कहते है कि इस जगह का दक्षिण ऊंचा है और उत्तर नीचा तो यहां कुटिया बनाओ
हालांकि वाल्मिकी रामायण में ऐसा कुछ नही है , हो सकता है बाद में किसी ने किष्किन्धाकाण्ड में ये जोड़ा हो या रामायण पर टीका लिखी हो उसमे ये लिखा हो।
4. महाभारत - महाभारत में मय ऋषि द्वारा निर्मित सभा का उल्लेख मिलता है, जो कि दुर्योधन के अपमान का कारण बनी थी, इसके अलावा इंद्रप्रस्थ भी अच्छे वास्तु नियोजन के नमूने के रूप में सामने आता है।
5. पुराण - इनमे वास्तु का विवरण अधिक है, मत्स्यपुराण में पूर्व मुखी घर को बेस्ट बताया गया है और अग्नि पुराण में तो मापदंड भी दिए गए है।
6. आधुनिक ग्रंथ - आधुनिक ग्रंथों में पहला बड़ा विवरण राजा भोज के समरांगन सूत्रधार में है इसमें 80+ चेप्टर इस पर है।
राजस्थान में वास्तु पर सबसे ज्यादा ध्यान महाराणा कुम्भा ने दिया, उन्होंने बिल्डिंग्स को चारो तरफ से खुला, दक्षिण पश्चिम में कुलदेवी का मंदिर, दक्षिण पश्चिम ऊंचा, उत्तर पूर्व में तालाब आदि अपने किलों में बनवाए, अच्छे वास्तु का फायदा कुम्भा को मिला भी, वो अधिकांश युद्ध में जीते भी और सबसे कम संपति हारी मुगलों से, उनके काल में राजस्थान में सबसे ज्यादा दुर्ग बने और स्थापत्य कला बहुत विकसित भी हुई।
यानी आजकल प्रचलित अनेक लोकप्रिय "वास्तु नियम" (जैसे रसोई केवल दक्षिण-पूर्व में हो, शौचालय केवल xyz दिशा में हो आदि) सीधे वेद, रामायण या महाभारत के श्लोकों में नहीं मिलते। वे मुख्यतः आधुनिक ग्रंथों और परंपराओं से विकसित हुए हैं।
चीनी वास्तु - इस पर मेने एक पोस्ट की थी, कि अच्छी वास्तु स्थिति का फायदा चीन को केसे हुआ है।
लिंक -- https://t.co/Bv06DTw9jy
बाकी आधुनिक वास्तु शैली और बनावट पर बात अगली पोस्ट में करेंगे।
इस पोस्ट में जो नक्शा अटैच किया है वो भगवान जगन्नाथ मंदिर का है जो वास्तु के आधार पर बना है, इस पर अगली पोस्ट में लिखूंगा, बहुत बड़ी हो गई पोस्ट।
इसको रीट्वीट जरूर करना 🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏
क्या आपको वास्तु शास्त्र में रुचि है ??????
हाल ही के दिनो मे देख रहा हूं, घर के वास्तु अनुकूल नक्शे बनाने के भी कुछ वास्तुविद लाखो रुपए चार्ज कर रहे हैं।
हालांकि मुद्दा पैसा नही है, बल्कि वो लोग वास्तु को स्टीरियो टाइप कर रहे है।
जो कि उतना मुश्किल काम नही है और कई बार क्रॉस क्वेश्चन कर दो तो उनके पास जवाब नही होता।
वास्तु जीवन का अहम पहलू है, कई बार कुंडली अच्छी हो तब भी वास्तु के कारण समस्या बनी रहती है और इंसान मंत्र और रत्न पहन पहन कर थक जाता है।
इसलिए मेरा विचार है कि कल आप सबके लिए एक विस्तृत पोस्ट करूंगा वास्तु पर और रेफरेंस के लिए एक प्रसिद्ध वास्तु से बनी जगह को उदाहरण देकर समझाऊंगा।
इसके बाद आप खुद के घर में वास्तु संबंधी दोष आसानी से समझ पाएंगे और इसे लेकर दूसरो पर निर्भर नही रहना पड़ेगा।
अगर आप इंट्रेस्टेड हो कि इस विषय पर तो इस ट्वीट को रीट्वीट करना और मुझे फॉलो करना
और कल जो पोस्ट डालू उसे रीट्वीट करना ।
#वाराणसी
#vastu
#astrología
#Nifty
#Giftnifty
@FinancialAstro0 सर, मैं सिर्फ जानने की कोशिश कर रहा हूं। आपको कॉन्ट्रडिक्ट करने का इरादा नहीं था।
और आपने सही बताया कि चंद्र में राहु की अन्तर्दशा थी उस समय। आपकी सारी बातें सही हैं मेरे लिए।
क्या अब मैं मूँगा, मोती और पुखराज गले की चैन में पहन सकता हूं?
2011 में मूँगा पहना था चंद्र की महादशा में। 18 साल का था तब। बहुत एग्रेसिव हो गया था मैं मूँगा पहनने के बाद। कालेज में बहुत लड़ाई करने लग गया था और बाइक से 2 बार एक्सीडेंट हो गया था 1 साल में। फिर रिंग उतार दी और धीरे धीरे नॉर्मल हुआ।
सितम्बर 1993 का जन्म है, मूंगा पहनना चाहिए था मंगल मृत्यु राशि में है
अब मूंगा और मोती पहन लो, आगे शनि स्त्रोत करना, राहु अनुरुद्ध में है तकलीफ कम देगा
@micchamasala मेरे पैर में चोट लगी थी। राजीव चौक मेट्रो में चढ़ा 2 दोस्तों के साथ। भीड़ थी और जहाँ मैं खड़ा था उस लाइन में सारी लेडीज बैठी थी लेकिन किसी ने पट्टी देखकर भी अपनी सीट ऑफर नहीं की और मैं 30 मिनट तक एक पैर पर खड़ा होकर गया था। उस दिन के बाद से मैंने अपनी सीट ऑफर करना बंद कर दिया है।
सितम्बर 1993 का जन्म है, मूंगा पहनना चाहिए था मंगल मृत्यु राशि में है
अब मूंगा और मोती पहन लो, आगे शनि स्त्रोत करना, राहु अनुरुद्ध में है तकलीफ कम देगा
कुछ लोग म्यूचुअल फंड से निकलने की सलाह दे रहे।
पर मेरा मानना है ये स्वर्ग की सीढ़ी जैसा है जिसपर रोज एक स्टेप बनाकर चढ़ना होता
आपने 100 स्टेप बनाई और फिसल कर गिर गए तो भी दिक्कत नही, क्युकी 100 स्टेप सीढ़ी के तो बन चुके है भागकर उतना चढ़ना है फिर आगे से रोज एक नया स्टेप
वैसे ही म्यूचुअल फंड है ये लॉन्ग टर्म में रिटर्न होल्ड जरूर करेगा
@FinancialAstro0 Sir, stock market se thoda bhi benefit nhi ho rha h.
Meri Mangal mahadasha khatam and Rahu mahadasha 2027 January sector start hone ja rhi h