कैमरे के सामने झूठ बोलने चले थे अखिलेश! 😄
पत्रकार ने ऐसा सवाल दागा कि हो गया पूरा "मोए मोए"! 🤣🤣
तथ्यों और सवालों की बौछार के सामने बयानबाज़ी ज्यादा देर तक टिक नहीं पाई।
देखिए कैसे कैमरे पर ही खुल गई पूरी कहानी और छूट गई बोलती! 🔥
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@yadavakhilesh
शहनाज अख़्तर को देश भगवान राम और माँ सीता को लेके ऐसी अभद्रता करने की आजादी देता है तो हिंदुओं को भी खुले मंच से मोहम्मद और अलाह की ऐसी ही तारीफ़ शुरू कर ��ेनी चाहिए।
अब शहनाज ने तारीफ़ की है तो हिंदुओं का भी दायित्व बनता है ना की वो मोहम्मद की शान में कसीदे पढ़े।
क्या बोलते हो हिंदुओं ?
मस्जिद बनाई हथियार रखने के लिए
मदरसे बनाये ट्रेनिंग देने के लिए
बुरका पहनाया पहचान छुपाने के लिए
टोपी पहनी पहचान बनाने के लिए
बकरे कTवाये निर्दयी बनाने के लिए
मातम मनाया खून ख़राबे के लिए
कब्र बनायी ज़मीन हथियाने के लिए
जनसंख्या बधा�� देश पे कब्ज़ा करने के लिए
आतंकवादी बनाये डराने के लिए
लव जिहाद लाया हिंदू लड़कियों को फ़साने के लिए
झूठा भाईचारा दिखाया हिंदुओं को चारा बनाने के लिए।
एक और हिंदू को
तीन मुस्लिम राक्षसों ने चाकूओं से गोद डाला...
जी हाँ.. हाज़ीअली दरगाह के बाहर हिंदू युवक
के हाथ पर जय श्री राम का टैटू देखकर भड़के मुस्लिम दरिंदो ने उसे हिन्दुओं की भीड़ के सामने
चाकूओं से गोद डाला....
सोते रहो हिन्दुओं 🚨
पहली बात तो ये जो गा रहे है वो हनुमान चालीसा नहीं है और दूसरी बात ये की रील्स वायरल करने के लिए इस प्रकार के उद्दंड करने से कुछ नहीं होता है हिंदू युवाओ का काम हिंदुओं को संगठित करना होना चाहिए बिना आवाज किए चुप चाप जैसे RSS कर रहा है ये सब करने से क्या हासिल कर लोगे कहीं पे भी अपने भगवान के पवित्र भजन गाना शुरू कर देते हो बिना ये जाने की वो जगह कितनी शुद्ध है या नहीं यदि ईश्वर के इतनी ��ी आस्था उमड़ के बाहर आ रही है तो जो लोग हिंदू विचारधारा और आध्यात्म से दूर हो रहे है उनको प्रोत्साहित करो अपने मंदिर जाने के लिए, वहाँ भजन गाइए, आपके मंदिर तो वीरान पड़े है “एक बार राजस्थान के एक गाँव के एक मंदिर में गया था वीरान पड़ा था केवल पुजारी था वहाँ और जब मैंने उनसे बात की तो उन्होंने कहा की आजकल हिंदुओं को मंदिर आने का वक़्त नहीं है मेरी आजीविका इसी से चलती थी अब वो भी मुश्किल से चल रही है और उसके आँखो में आँसू आ गए” ये स्थिति है और इनको यहाँ रीलबाज़ी करनी है।
मोहन भागवत जी ने सही कहा था हर मस्जिद के नीचे मंदिर ढूँढना बंद करो अपने जितने मंदिर अभी वजूद में है उनको सरंक्षित कर लो बहुत है।
इतना मंदिर धर्म का केंद्र बिंदु होते है धर्म से जुड़ना है तो मंदिरों को जीवन में प्राथमिकता देना शुरू करो।
आस्था को रील और मजाक बनाना बंद करो।
"जय श्री राम" कहने पर एक हिंदू छात्र को प्रताड़ित करने वाले मुस्लिम छात्रों की हिंदुओं ने बेल्ट से अच्छी तरह रेल बनाई🔥
बंगाल अब हिंदुओं के अपमान को बर्दाश्त नहीं करेगा।
RSS की स्थापना भारत की आजादी से पहले 1925 में हुई,देश में हिन्दू तब भी थे ।
लेकिन वो RSS के साथ नहीं, महात्मा गाँधी के साथ चले।
इस साथ के बदले गाँधी हिंदुओं की जमीन काट कर मुसलमानों को दे दी, वो जमीन जो हज़ारों साल से हिंदुओं की थी।
क्षणिक आवेश के बाद शांत हुआ देश का हिन्दू तब भी गोडसे के साथ नहीं गया, नेहरू के साथ गया।
चार दशक बाद,1980 में भाजपा बनी लेकिन देश का हिन्दू तब भी भाजपा के साथ नहीं था, इंदिर�� के साथ था, राजीव के साथ था।
तब संसद भवन/ राष्ट्रपति भवन में रोजा इफ्तार होता था,हिन्दू कोई ऐतराज नहीं किया।
हिन्दू तो अपने घर में माता को चूनर चढ़ा कर खुश था। हज के लिए सब्सिडी दी जा रही थी, हिन्दू तब अमरनाथ वैष्णो देवी की यात्रा में आतंकियों की गोली खा कर भी खुश था।
ट्रेनों में, पार्कों में, बसों में, सड़कों को घेर कर नमाज होती थी।बेचारा हिन्दू खुद को बचा कच्ची पगडंडी से घर-ऑफिस निकल जाता था।
��िल्ली में CAA,NRC के विरोध में महीनों धरना चला, हिन्दू १५-२० किमी चक्कर लगाकर घर आफिस जाता था लेकिन फ्री के चक्कर में केजरीवाल को जिताया। भीषण दंगों का दंश झेला !
पूरे देश में वक्फ की आड़ में अन गिनत मस्जिदें बन रही थीं, हिन्दू को कोई ऐतराज नहीं था। वो तो तब अस्पताल मांग रहा था।
जगह जगह मज़ारें बना जमीन कब्जाई जा रही थी, हिन्दू उन्हीं मज़ारों पर माथा टेककर अपने बच्चों के लिए स्कूल मांग रहा था।
फिर एक दिन हिंदुओं ने अपने आराध्य श्��ीराम जी का अपना एक मंदिर वापस मांग लिया। लेकिन कुछ लोग रावण की तरह अभिमान में डूबे थे।
रावण ने कहा था सीता वापस नहीं करूँगा, ये राम और इसकी वानर सेना क्या ही कर लेगी।
कलयुग के रावणों को भी लगा, मन्दिर वापस नहीं करेंगे, ये काल्पनिक राम और इसकी वानर सेना क्या ही कर लेगी।
बाबर ना तो अयोध्या में पैदा हुआ था और न अयोध्या में मरा ���ा।
उसके नाम से मस्ज़िद देश में कहीं भी बन सकती थी। देश में हज़ारों लाखों म���्जिदों के बनने पर भी हिन्दू को ऐतराज नहीं था।
उसे चाहिए था तो बस एक मंदिर, लेकिन उसे मिला क्या?
माथे पर लगाने के लिए रामभक्तों के रक्त से सनी अयोध्या की मिट्टी, अर्चन के लिए खून से लाल सरयू का जल, अर्पण के लिए ट्रेन की बोगी में जली हुई रामभक्तों की लाशें।
अभी तक स्कूल अस्पताल नौकरी के सपनों में खोया बहुसंख्यक हिन्दू जिद पर अड़ गया। उसका स्वाभिमान जाग गया। वो उठ खड़ा हुआ, एकजुट हुआ और अपने ही देश में दोयम दर्जे का नागरिक बने रहने का अभिशाप एक झटके में उखाड़ फेंका।
बात सिर्फ एक मंदिर की थी, आज वो अपना हर मन्दिर वापस लेने की जिद पकड़ बैठा है।
हिंदुओं ने वो कर दिखाया है, जो संसार की कोई भी सभ्यता नहीं कर पाई।
न यहूदी अपने धार्मिक स्थल वापस ले पाए, न ईसाई और न पारस���.
और ना ही मुसलमान यहूदियों या ईसाईयों से अपने धार्मिक स्थल वापस ले पाए !
लेकिन हिंदुओं ने इनक�� जबड़े में हाथ डाल कर अपने आराध्य का घर वापस ले लिया ये मदमस्त वानरों की टोली है,
इनके रास्ते में मत आओ,
भले ही आप राजनीति के सर्वोच्च पद पर हों या धर्म के।
ये राम की वानर सेना है, जो लड़ना भी जानती है और अब जीतना भी।
और हां अयोध्या तो झांकी है,
अभी हिंदू राष्ट्र व मथुरा काशी बाकी है ।
भारत माता की जय
वंदे मातरम् - जय हिंद
जय जयश्री राम
🙏