मदरसे के प्राणसिपल साहिब ने एक 6 वर्षीय मासूम बच्ची को किस किया साथ ही उसके प्राइवेट पार्ट को अपनी जीभ से टच किया
जिसके बाद इसकी जमकर कुटाई हुई
लोग क्यों अपनी बच्चियों को स्कूल की बजाय मदरसे भेजते हैं
क्या मदरसे बंद होने चाहिए ??
@rajkumarbhatisp अगर सभी धर्म का सम्मान करता है तो यह क्यों कहा कि मैं राम कृष्ण को नहीं मानता उनकी पूजा नहीं करूंगा क्या बुराई पाए।बौद्ध सम्मेलन में तुम्हें यह कहने के लिए केवल राम कृष्ण ही मिले अल्लाह जीसस क्यों नहीं मिले। सपा में मैं तीनबार विधानसभा सचिव रहा हूं हिंदू हूं हमारी ही आस्था पर चोट
@ShivamdixitInd ए bos d k कहता है हम नहीं मानेंगे और इसके आका अलीशेख कहते है समाजवाद ही सनातन है। अबे चुटिया पहले अपने आका को समझा फिर देश की जनता को मूर्ख समझना
सारे शांतिदूतों ने करोड़ों रुपये दुकानों में लगा रखे हैं। जूते-चप्पल, रेडीमेड कपड़े, पर्स, बेल्ट, घड़ियाँ, बनियान-अंडरवियर से लेकर एलईडी, एलसीडी, टीवी, स्पीकर, मोबाइल और कैमरे तक, हर तरह का माल भरकर बैठे हैं। बाजार में रौनक है और त्योहारों के मौसम में कमाई के बड़े अवसर भी!
अक्टूबर से होली तक त्योहारों का सीजन चलता है। दुकानें सजती हैं, माल बिकता है और व्यापारी अपनी कमाई बढ़ाते हैं। मुस्लिम व्यापारी कारोबार करके अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत करते हैं, लेकिन हिंदू युवाओं को बेरोजगारी के नाम पर नारेबाजी और आंदोलनों में उलझाए रखने का खेल भी खूब चलता है।
एक तरफ दुकानें लगाकर कारोबार करो, लाखों-करोड़ों का मुनाफा कमाने के अवसर तलाशो, दूसरी तरफ हिंदू युवाओं को क्रांति के नाम पर सड़कों पर उतार दो। आखिर यह कैसी विडंबना है? कमाई के रास्ते पर कौन आगे बढ़ रहा है और नारेबाजी में किसका समय बर्बाद हो रहा है, हिंदू युवाओं को यह समझना होगा।
हिंदू भाइयों, अपनी मेहनत की कमाई की ताकत पहचानिए। त्योहारों पर खरीदारी करते समय हिंदू दुकानदारों को प्राथमिकता दीजिए। जूते-चप्पल हों, कपड़े हों, इलेक्ट्रॉनिक्स हों या घर का कोई दूसरा सामान, उचित कीमत और अच्छी गुणवत्ता मिलने पर अपने समाज के व्यापारियों से खरीदारी कीजिए।
दूसरों को कारोबार बढ़ाते और आर्थिक रूप से मजबूत होते देखकर भी यदि हिंदू समाज अपनी आर्थिक शक्ति का इस्तेमाल नहीं करेगा, तो फिर शिकायत किस बात की? रोजगार केवल नारों से नहीं मिलता, व्यापार केवल भाषणों से नहीं बढ़ता और आर्थिक मजबूती केवल सोशल मीडिया पर पोस्ट लिखने से नहीं आती।
याद रखिए, दूसरे अपने कारोबार में पैसा लगाकर कमाई के रास्ते बना रहे हैं और हमारे युवा केवल बेरोजगारी के नारे लगाते रह जाएँ, तो नुकसान आखिर किसका होगा?
त्योहार आपके हैं, मेहनत आपकी है, कमाई आपकी है। अपनी आर्थिक ताकत पहचानिए, हिंदू दुकानदारों को प्राथमिकता दीजिए और अपने समाज के व्यापार को मजबूत बनाइए।
नारे लगाने से आगे बढ़िए, आर्थिक रूप से मजबूत बनिए। क्योंकि समाज की असली ताकत केवल भीड़ में नहीं, उसकी आर्थिक आत्मनिर्भरता में भी होती है! 🚩
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