पूरे राजस्थान में लोग सड़कों पर उतर आए है और स्कूलों की सच्चाई सामने ला रहे है।
मैं फिर कह रहा हूँ - जितनी हिंसा फैलानी है फैलाइए। खून का एक एक कतरा इस देश में इंकलाब का सैलाब लेकर आयेगा।
बिहार : अरवल ज़िले के 75 सरकारी स्कूलों में परोसे गए भोजन में कीड़े मिलने से हड़कंप मच गया
◆ कीड़े निकलने के बाद बच्चों ने खाना फेंक दिया
◆ घटना की जानकारी मिलते ही शिक्षा विभाग हरकत में आया और जिला शिक्षा पदाधिकारी असगर हुसैन ने मामले की जांच के आदेश दिए
◆ शिक्षा पदाधिकारी ने कहा कि जांच में किसी भी प्रकार की लापरवाही या दोषी पाए जाने पर संबंधित एजेंसी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी, उसे ब्लैकलिस्ट भी किया जा सकता है
#Bihar | Bihar | Mid-Day Meal
स्कूल में सरपंच की गायें बांध रह���।
इल्ली वाला खाना।
खुले में शौचालय।
पंखे पर घोंसला।
नर्क से भी बुरे हालात वाला स्कूल।
शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह जी; स्कूल का दौरा करके देखिए। आप खुद शर्म से पानी-पानी ना हो जाए तो कहना।
📍डोबढ़ा (मध्यप्रदेश)
राष्��्रगान को सम्मान देने तक का समय नहीं है उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष और भाजपा नेता सतीश महाना जी के पास।
आज पूरा देश भाजपा से एक ही सवाल पूछ रहा है- राष्ट्रगान का अपमान करने वाले अपने नेता पर भाजपा क्या कार्रवाई करेगी?
“जल्दी आ जाओ साहब, यहां पर जल्दी आ जाओ”…
बेचारा @Uppolice का सिपाही अपनी जान बचाने की गुहार लगा रहा है…
पुलिस का इकबाल कांवड़ियों द्वारा तार तार होते देखिए इस वीडियो में
देशवासियों
ज़ब तक मोदी-शाह को सत्ता से बाहर नहीं किया जायेगा ये लोग अपने गुंडों से धमकाना बंद नहीं करेंगे‼️
ध्यान से सुनिए इन गुंडों को कैसे GenZ बच्चियों पर अपनी मर्दानगी दिखा रहा है।
प्रधानमंत्री जी का “अच्छे दिन आने वाले हैं” का नारा जनता के लिए नहीं, बल्कि भ्रष्टाचारियों के लिए था, जिसका प्रमाण देहरादून का यह पुल है, जो एक बरसात भी नहीं झेल पाया।
बता दें, पिछली बरसात में भी यह पुल धंस गया था, जिसके बाद इसका दोबारा निर्माण कराया गया था।
सुप्रीम कोर्ट में जो हुआ वह दुखद है। माननीय जस्टिस ने स���यम और उदारता का परिचय देते हुए उचित ही कोई एक्शन नहीं लिया। यह बात तारीफ़ के क़ाबिल है। सुप्रीम कोर्ट का कंधा चौड़ा होना चाहिए और दिल बड़ा। इस बात को भी संज्ञान में लेना चाहिए कि समाज में न्याय को लेकर हताशा फैलती जा रही है। उसकी निष्पक्षता पर संदेह बढ़ता जा रहा है। अधिकारियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई नहीं होती। ��ोई किसी का एनकाउंटर कर दे रहा है, किसी का घर गिरा दे रहा है। नागरिक अपने सवालों को लेकर कोर्ट की सीढ़ियाँ चढ़ता है लेकिन दीवारों से टकरा जा रहा है। इन्हीं कारणों से हताशा बढ़ती जा रही है। उम्मीद है, ऐसी घटना दोहराई नहीं जाएगी। यह भी कि न्याय व्यवस्था अपनी उदारता के साथ साथ विश्वसनीयता को बेहतर करेगी। उम्मीद की आख़िरी मंज़िल कोर्ट है और उस मंज़िल का बने रहना ही हताशा का इलाज है।
भाजपा राज में पुलिस अन्याय का रिकॉर्ड तोड़ रही है। मेरठ में दलित समाज की बेटी ललिता गौतम के लिए न्याय की आवाज़ उठाने पर प्रशासन द्वारा पीड़ित परिवार सहित अन्य लोगों पर किया प्रहार और लाठी चार्ज बेहद निंदनीय है।
जब प्रदेश-प्रमुख ही सरेआम एक मृतक की माँ के साथ असंवेदनशील होने का उदाहरण प्रस्तुत करेंगे तो उनकी पुलिस से कोई उम्मीद करना बेमानी है।
घोर निंदनीय!