@JPSCreformanch लगता है गैंडा को हमारे प्रिंस वॉरियर के पोस्ट से ज्यादा तकलीफ हो रही है।
लगता है गैंडा का गांव में आग लग गई
कोई बाद नहीं गैंडा तुम्हारे गांव को गुड़गांव बना दिया जाएगा
दूसरे सवाल का जवाब में कई सच्चाई है। पहले सभी परीक्षाओं को टारगेट करो, भीड़ बढ़ाओ, जनसमर्थन हासिल करो और पीजीटी जैसे परीक्षाओं पर मुंह बंद करके अपने एजेंडे पर लग जाओ। सिर्फ पीजीटी ही नहीं अन्य परीक्षाओं पर भी मुँह बंद ही रहता है।
जो लोग JSSC CGL मामले में यह कहते हैं कि दोषी और निर्दोष अभ्यर्थियों के बीच segregation (अलग-अलग पहचान) नहीं किया जा सकता, उनसे एक सवाल जरूर पूछा जाना चाहिए—क्या उनका वास्तविक उद्देश्य भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई करना है या फिर पूरी परीक्षा को दोबारा कराने की मांग करना?
निर्दोष अभ्यर्थियों की वर्षों की मेहनत और उनके भविष्य को नजरअंदाज करके पूरी परीक्षा को दोबारा कराने की बात करना कहां तक उचित है?
कहीं ऐसा तो नहीं कि कुछ लोग पहले से ही इस इंतजार में बैठे हैं कि परीक्षा दोबारा हो और फिर कोचिंग, कोर्स और टेस्ट सीरीज बेचने का एक नया बाजार तैयार हो जाए?
भ्रष्टाचार करने वालों पर कठोर कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन उसकी कीमत उन अभ्यर्थियों से क्यों वसूली जाए जिन्होंने ईमानदारी से परीक्षा दी और अपने परिश्रम से सफलता हासिल की?
@harisharandevgn सर, JSSC CGL में 600+ आदिवासी अभ्यर्थियों का चयन हुआ है। इनमें 610+ ऐसे अभ्यर्थी हैं, जिन्होंने अपनी पुरानी नौकरी छोड़कर यह नौकरी जॉइन की। आपसे विनम्र आग्रह है कि दोषियों को सजा दिलवाइए, लेकिन निर्दोष और मेहनती अभ्यर्थियों की नौकरी बचाने के लिए भी खड़े हों। 🙏
@harisharandevgn सर,
सर, आज की स्थिति यह है कि निर्दोष और मेहनत से चयनित छात्रों के साथ न तो सरकार खड़ी दिखाई दे रही है और न ही कोई छात्र नेता, कोचिंग संचालक या अन्य सक्रिय व्यक्ति।
ऐसे समय में हम सभी सफल छात्र आपसे हाथ जोड़कर निवेदन कर रहे हैं कि कृपया हमारी वर्षों की मेहनत को यूँ ही बर्बाद मत होने दीजिए।
हमने दिन-रात मेहनत की, अपने परिवार की उम्मीदों और अपने भविष्य को दांव पर लगाकर तैयारी की और अपनी योग्यता के दम पर सफलता हासिल की। यदि कहीं कोई गड़बड़ी हुई है तो दोषियों पर कठोर कार्रवाई हो, लेकिन निर्दोष और मेहनत से चयनित छात्रों को उसकी सजा न मिले।
सर, हमारी लड़ाई किसी के खिलाफ नहीं है। हमारी मांग सिर्फ इतनी है कि दोषी को सजा मिले और निर्दोष को न्याय।
आज हमें आपकी आवाज और आपके सहयोग की जरूरत है।
कृपया मेहनत से चयनित इन छात्रों की आवाज बनिए और हमारी वर्षों की मेहनत को यूँ ही बर्बाद होने से बचाने के लिए हमारा साथ दीजिए।
जेएसएससी सीजीएल के साथ साथ 11 to 13 जेपीएससी, सीडीपीओ और फूड सेफ्टी ऑफिसर की भी नियुक्ति रद्द हुई है..
सीआईडी ने अब तक गड़बड़ी के आरोप में 11 टू 13 जेपीएससी, सीडीपीओ और फूड सेफ्टी ऑफिसर के कुल 400 से ज्यादा अधिकारियों में से कितने अधिकारियों को गिरफ्तार किया है???
व्यापक गड़बड़ी हुई है न भाई..!
कम से कम पांच दस अधिकारियों के नाम तो बता ही सकते हैं जो अब तक गिरफ्तार किए जा चुके हैं??
@JPSCreformanch@Jrkndikhurpench@kunalpratap86
??
थोड़ा आराम से बात करो.. अपने आप को बड़का ठेकेदार नहीं समझो... न्यायालय में भरोसा रखो... मिडिया ट्रायल से दूर रहो।विचार भले ही स्वतंत्र होने चाहिए लेकिन भाषा शैली मर्यादित, दायरे में और अनुशासन में होना चाहिए..सभी चयनित ऑफिसर को पर्सनली टारगेट करना बंद करो।
@gutthi_org@SACHNAMA_
Lota Man बड़ी तकलीफ़ में हैं, .........
सुनिए Lota Man का दर्द और दुविधा से भरा गाना… 😭🎤😂
#PGT पर कुछ बोल दें तो डर है—धनिया नाराज़ होकर दो वक्त की रोटी भी बंद न कर दे! 🌿😂
और चुप रहें तो गुत्थी पूछती है —“बाबू, इतनी चुप्पी का राज़ क्या है?” 👀🔍
बेचारे Lota Man… इधर गुत्थी, उधर धनिया! 😭😂
#JSSCCGL #JSSC #CGL #JPSC #JHARKHAND #MERIT
@kunalpratap86@ExamsFighters@JPSCreformanch
रद्द का प्रभाव आज उन मेहनती युवाओं को भुगतना पड़ रहा है जो अपनी मेहनत से नौकरी लिए हैं
निर्दोषों को संपूर्ण सुरक्षा और न्याय, सम्मान के साथ नौकरी का अधिकार✅
दोषियों को सबसे कठोरतम सजा बने एक मिसाल, घबराए ऐसा करने से✅
@JPSCreformanch@The_FollowUp@BJP4Jharkhand@JmmJharkhand
JSSC CGL परीक्षा में अपने मेहनत से चयनित होने वाले सभी सफल छात्रों की ओर से आपको @harisharandevgn बहुत बहुत धन्यवाद सर 🙏🙏🙏
आप हम निर्दोष छात्रों के दर्द को समझ रहे हैं इसके लिए आभार आपका 🙏🙏🙏
JSSC CGL परीक्षा में अपनी मेहनत और कड़ी मेहनत के दम पर चयनित हुए हम सभी सफल छात्रों ने झारखंड के छात्र नेताओं, कोचिंग संचालकों एवं अन्य सक्रिय लोगों से लगातार यह गुहार लगाई कि निर्दोष छात्रों को न्याय मिले और जो वास्तव में दोषी हैं, उनके विरुद्ध सख्त कार्रवाई हो।
लेकिन बेहद दुख के साथ कहना पड़ रहा है कि हमारी बात सुनने और समझने के बजाय हम लोगों को दरकिनार कर दिया गया और कई बार हमारा उपहास तक उड़ाया गया।
हमारा सवाल है—अपनी मेहनत से चयनित होने वाले छात्र इन लोगों की नजर में दोषी क्यों हैं?
क्या मेहनत और ईमानदारी से चयनित होकर हमने कोई गुनाह कर दिया है?
हम झारखंड के आदिवासी-मूलवासी छात्र हैं। हमने अपनी मेहनत, संघर्ष और वर्षों की तैयारी के बाद सफलता हासिल की है। आखिर अपनी मेहनत से परिणाम हासिल करके हमने किसका क्या बिगाड़ दिया?
हम केवल इतना चाहते हैं कि दोषी को दोषी माना जाए और निर्दोष को निर्दोष। किसी की गलती की सजा उन छात्रों को क्यों मिले, जिन्होंने दिन-रात मेहनत करके अपनी सफलता अर्जित की है?