@harisharandevgn सर,
सर, आज की स्थिति यह है कि निर्दोष और मेहनत से चयनित छात्रों के साथ न तो सरकार खड़ी दिखाई दे रही है और न ही कोई छात्र नेता, कोचिंग संचालक या अन्य सक्रिय व्यक्ति।
ऐसे समय में हम सभी सफल छात्र आपसे हाथ जोड़कर निवेदन कर रहे हैं कि कृपया हमारी वर्षों की मेहनत को यूँ ही बर्बाद मत होने दीजिए।
हमने दिन-रात मेहनत की, अपने परिवार की उम्मीदों और अपने भविष्य को दांव पर लगाकर तैयारी की और अपनी योग्यता के दम पर सफलता हासिल की। यदि कहीं कोई गड़बड़ी हुई है तो दोषियों पर कठोर कार्��वाई हो, लेकिन निर्दोष और मेहनत से चयनित छात्रों को उसकी सजा न मिले।
सर, हमारी लड़ाई किसी के खिलाफ नहीं है। हमारी मांग सिर्फ इतनी है कि दोषी को सजा मिले और निर्दोष को न्याय।
आज हमें आपकी आवाज और आपके सहयोग की जरूरत है।
कृपया मेहनत से चयनित इन छात्रों की आवाज बनिए और हमारी वर्षों की मेहनत को यूँ ही बर्बाद होने से बचाने के लिए हमारा साथ दीजिए।
जेएसए���सी सीजीएल के साथ साथ 11 to 13 जेपीएससी, सीडीपीओ और फूड सेफ्टी ऑफिसर की भी नियुक्ति रद्द हुई है..
सीआईडी ने अब तक गड़बड़ी के आरोप में 11 टू 13 जेपीएससी, सीडीपीओ और फूड सेफ्टी ऑफिसर के कुल 400 से ज्यादा अधिकारियों में से कितने अधिकारियों को गिरफ्तार किया है???
व्यापक गड़बड़ी हुई है न भाई..!
कम से कम पांच दस अधिकारियों के नाम तो बता ही सकते हैं जो अब तक गिरफ्तार किए जा चुके हैं??
@JPSCreformanch
@Jrkndikhurpench
@kunalpratap86
??
थोड़ा आराम से बात करो.. अपने आप को बड़का ठेकेदार नहीं समझो... न्यायालय ���ें भरोसा रखो... मिडिया ट्रायल से दूर रहो।विचार भले ही स्वतंत्र होने चाहिए लेकिन भाषा शैली मर्यादित, दायरे में और अनुशासन में होना चाहिए..सभी चयनित ऑफिसर को पर्सनली टारगेट करना बंद करो।
@gutthi_org @SACHNAMA_
Lota Man बड़ी तकलीफ़ में हैं, .........
सुनिए Lota Man का दर्द और दुविधा से भरा गाना… 😭🎤😂
#PGT पर कुछ बोल दें तो डर है—धनिया नाराज़ होकर दो वक्त की रोटी भी बंद न कर दे! 🌿😂
और चुप रहें तो गुत्थी पूछती है —“बाबू, इतनी चुप्पी का राज़ क्या है?” 👀🔍
बेचारे Lota Man… इधर गुत्थी, उधर धनिया! 😭😂
#JSSCCGL #JSSC #CGL #JPSC #JHARKHAND #MERIT
@kunalpratap86@ExamsFighters@JPSCreformanch
रद्द का प्रभाव आज उन मेहनती युवाओं को भुगतना पड़ रहा है जो अपनी मेहनत से नौकरी लिए हैं
निर्दोषों को संपूर्ण सुरक्षा और न्याय, सम्मान के साथ नौकरी का अधिकार✅
दोषियों को सबसे कठोरतम सजा बने एक मिसाल, घबराए ऐसा करने से✅
@JPSCreformanch@The_FollowUp@BJP4Jharkhand@JmmJharkhand
JSSC CGL परीक्षा में अपने मेहनत से चयनित होने वाले सभी सफल छात्रों की ओर से आपको @harisharandevgn बहुत बहुत धन्यवाद सर 🙏🙏🙏
आप हम निर्दोष छात्रों के दर्द को समझ रहे हैं इसके लिए आभार आपका 🙏🙏🙏
JSSC CGL परीक्षा में अपनी मेहनत और कड़ी मेहनत के ��म पर चयनित हुए हम सभी सफल छात्रों ने झारखंड के छात्र नेताओं, कोचिंग संचालकों एवं अन्य सक्रिय लोगों से लगातार यह गुहार लगाई कि निर्दोष छात्रों को न्याय मिले और जो वास्तव में दोषी हैं, उनके विरुद्ध सख्त कार्रवाई हो।
लेकिन बेहद दुख के साथ कहना पड़ रहा है कि हमारी बात सुनने और समझने के बजाय हम लोगों को दरकिनार कर दिया गया और कई बार हमारा उपहास तक उड़ाया गया।
हमारा सवाल है—अपनी मेहनत से चयनित होने वाले छात्र इन लोगों की नजर में दोषी क्यों हैं?
क्या मेहनत और ईमानदारी से चयनित होकर हमने कोई गुनाह कर दिया है?
हम झारखंड के आदिवासी-मूलवासी छात्र हैं। हमने अपनी मेहनत, संघर्ष और वर्षों की तैयारी के बाद सफलता हासिल की है। आखिर अपनी मेहनत से परिणाम हासिल करके हमने किसका क्या बिगाड़ दिया?
हम केवल इतना चाहते हैं कि दोषी को दोषी माना जाए और निर्दोष को निर्दोष। किसी की गलती की सजा उन छात्रों क�� क्यों मिले, जिन्होंने दिन-रात मेहनत करके अपनी सफलता अर्जित की है?
JPSC और जेएसएससी को लेकर आंदोलन अगर सिर्फ “परीक्षा रद्द करो” तक सीमित है,
तो एक बार उस छात्र के बारे में भी सोचिए जो रोज़ लाइब्रेरी में बैठा है।
जिसकी सुबह किताबों के साथ होती है और रात भी किताबों के बीच बीतती है।
जिसने अपनी उम्र के कई खूबसूरत साल एक सरकारी नौकरी की तैयारी में लगा दिए हैं।
जिसके घर वाले हर महीने किसी तरह उसकी तैयारी का खर्च उठा रहे हैं
उसे अध्यक्ष और सदस्य चाहिए, ताकि आयोग चले।
उसे परीक्षा कैलेंडर चाहिए, ताकि उसे पता हो कि किस परीक्षा की तैयारी करनी है।
उसे नए विज्ञापन चाहिए, ताकि उसके सामने अवसर हों।
उसे समय पर परीक्षा, परिणाम ��र नियुक्ति चाहिए, ताकि उसकी जिंदगी आगे बढ़ सके।
लेकिन दुर्भाग्य देखिए
आंदोलन का बड़ा हिस्सा भी जैसे “रद्द करो, रद्द करो” के आगे सोच ही नहीं पा रहा।
लाइब्रेरी में बैठा वह लड़का आखिर कब तक रद्दीकरण की खबरें पढ़कर फिर किताब खोलता रहेगा?
उसके पास भी उम्र है, परिवार है, सपने हैं और जिंदगी है।
झारखंड के छात्रों को सिर्फ यह नहीं सुनना कि क्या रद्द होगा।
उन्हें यह भी सुनना है
क्या निकलेगा, कब परीक्षा होगी और कब नियुक्ति होगी?
आंदोलन अगर सचमुच छात्रों के भविष्य के लिए है, तो नारा सिर्फ
“रद्द करो” नहीं,
“व्यवस्था सुधारो, कैलेंडर जारी करो, विज्ञापन निकालो, परीक्षा कराओ और नियुक्ति दो”
भी होना चाहिए।
@HemantSorenJMM
@yourBabulal
@BJP4Jharkhand
@JPSCreformanch
“अगर जेन्युइन हो तो दोबारा परीक्षा देकर फिर पास कर लेना।”
यह तर्क सुनकर लगता है जैसे योग्यत��� कोई ऐसी चीज है, जिसे हर साल नई रसीद कटवाकर साबित करना पड़ता है।
नीरज चोपड़ा ने टोक्यो 2020 में ओलंपिक गोल्ड जीता, लेकिन पेरिस 2024 में गोल्ड ��हीं जीत पाए।
तो क्या इसका मतलब यह है कि टोक्यो का गोल्ड उन्होंने 35 लाख रुपये देकर जीता था?
भारत ने 2011 में क्रिकेट विश्व कप जीता, लेकिन 2015 में खिताब नहीं बचा पाया।
तो क्या 2011 की जीत इसलिए संदिग्ध हो गई कि 2015 में वही टीम दोबारा विश्व कप नहीं जीत सकी?
इसी तरह, इस वर्ष NEET की पुनः परीक्षा में मेरे कई जानने वाले छात्रों के अंक पहली परीक्षा की तुलना में कम हो गए।
तो क्या इसका मतलब यह है कि पहली परीक्षा में उनके अंक फर्जी थे?
नहीं।
क्योंकि हर परीक्षा, हर मैच और हर चुनाव एक नई परिस्थिति होती है।
राजनीति में ही देख लीजिए।
नरेंद्र मोदी ने 2019 में वाराणसी से लगभग 4.79 लाख वोटों के अंतर से जीत दर्ज की थी। 2024 में जीत का अंतर घटकर लगभग 1.52 लाख रह गया।
तो क्या 2024 में जीत का अंतर कम होने से 2019 की जीत कम वैध हो गई?
बिल्कुल नहीं।
क्योंकि बाद का प्रदर्शन, पहले के प्रदर्शन को अपने-आप अवैध नहीं कर देता।
ठीक यही बात ��र्ती परीक्षा पर भी ��ागू होती है।
अगर किसी अभ्यर्थी ने नियमों के अनुसार परीक्षा दी, अपने प्रदर्शन के आधार पर कटऑफ पार की और चयनित हुआ,
तो बाद में परीक्षा व्यवस्था में गड़बड़ी सामने आने पर यह कहना
“अगर सच में योग्य हो तो फिर से परीक्षा देकर पास कर लो”
दरअसल उसकी पहली सफलता को प्रमाणित करने के बजाय उसे एक नई प्रतियोगिता में फिर से उतारना है।
पहली परीक्षा में उसकी योग्यता का प्रमाण उसका उस परीक्षा में किया गया प्रदर्शन था।
दूसरी परीक्षा में वह पास होगा या नहीं, यह पहली परीक्षा में उसके प्रदर्शन का न तो प्रमाण है, न खंडन।
कोई पहली बार 90 अंक लाकर चयनित हो और दूसरी बार 70 अंक पाए, तो इससे यह सिद्ध नहीं होता कि पहली बार उसके 90 अंक फर्जी थे।
अलग परीक्षा = अलग परिस्थिति = अलग प्रदर्शन।
इसलिए व्यवस्था में गड़बड़ी हुई है तो सवाल यह होना चाहिए
किसने गड़बड़ी की?
किसे उसका लाभ मिला?
गड़बड़ी कितनी व्यापक थी?
कि��� स्तर तक परीक्षा की निष्पक्षता प्रभावित हुई?
और जिन लोगों की भूमिका संदिग्ध है, उनके विरुद्ध क्या कार्रवाई होनी चाहिए?
लेकिन हर चयनित अभ्यर्थी से यह कहना
“चलो, अब फिर से साबित करो कि तुम योग्य हो।”
यह समाधान नहीं है।
योग्यता का प्रमाण यह नहीं कि कोई व्यक्ति हर बार वही परीक्षा पास कर सकता है।
योग्यता का प्रमाण है जिस परीक्षा में चयन हुआ, उसमें उसने नियमों के अनुसार कैसा प्रदर्शन किया।
दोषी को खोजिए।
लाभार्थी को चिन्हित कीजिए।
गड़बड़ी का दायरा तय कीजिए।
लेकिन केवल इसलिए कि व्यवस्था अपनी गलती सुधार नहीं पा रही, निर्दोष अभ्यर्थी से उसकी सफलता की दूसरी रसीद मत मांगिए।