“इतिहास भी अजीब चीज़ है… जिसे पढ़ो, वही अपनी-अपनी कहानी का हीरो निकलता है।”
कुछ लोग आज भी Narendra Modi Ji को 2002 के लिए कटघरे में खड़ा करते हैं — जैसे देश की हर घटना का रिमोट कंट्रोल उसी एक कुर्सी पर रखा हो।
लेकिन सवाल ये है 👇
जब भी कहीं हिंसा होती है — चाहे संभल हो या दिल्ली, तब कुछ दलों की संवेदनाएं selective क्यों हो जाती हैं?
और फिर वही लोग हमें “नैतिकता” का ज्ञान भी देते हैं… वाह!
ज़रा 2002 से पहले का माहौल याद कीजिए ...
केंद्र में Atal Bihari Vajpayee की सरकार, विकास की रफ्तार, और उभरता हुआ “गुजरात मॉडल”…
राजनीति में जब मुकाबला मुश्किल लगे, तो सबसे आसान तरीका क्या होता है?
👉 विरोधी को “विलेन” बना दो।
तब एंट्री होती है “नैरेटिव फैक्ट्री” की…
जहाँ घटनाएँ कम और कहानियाँ ज़्यादा बनाई जाती हैं।
और फिर मंच पर आती हैं Sonia Gandhi ...
जिन्होंने “मौत का सौदागर” जैसे शब्दों से राजनीति को एक नया लेवल दिया।
अब सवाल ये नहीं है कि कौन सही था या गलत ...
सवाल ये है कि क्या हम पूरी तस्वीर देखना चाहते हैं, या सिर्फ वही हिस्सा जो हमें दिखाया जाता है?
🧠 क्योंकि सच अक्सर शोर में दब जाता है,
और राजनीति में “धारणा” ही असली हकीकत बन जाती है।
आख़िर में बस इतना ही ...
इतिहास को समझिए, सवाल पूछिए, और किसी भी नैरेटिव को आँख बंद करके मत मानिए…
क्योंकि लोकतंत्र में सबसे बड़ी ताकत “सोचने वाला नागरिक” ही होता है।
🌺 त्रिपुर सुंदरी — श्रीविद्या की परम आद्या शक्ति
त्रिपुर सुंदरी, जिन्हें ललिता महात्रिपुरसुंदरी भी कहा जाता है, सम्पूर्ण सृष्टि की मूल चेतना और परम सौन्दर्य की अधिष्ठात्री देवी हैं।
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