आदिवासी है, बेवकूफ नहीं।
राज्य के भ्रष्ट नेता/अधिकारी को सुधारना हमारा लक्ष्य, बाकी समय बस ये समझने में लगे रहते है, सुधार पहले उन्हें चाहिए या हमें।
जोहार🙏🏻
क्या हुई @JmmJharkhand ??
6 फॉलोअर वाले आदावासी से नहीं सके, तो भाजपा से क्या खाक सकोगे सोशल मीडिया पर?
परम आदरणीय मुख्यमंत्री @HemantSorenJMM जी, झामुमो आईटी सेल टीम में कैसे टटपूंजियों को भर रखा है आपने?
🤣🤣🤣
“बाकी IPS जैसा मुझे कोई न समझे…” — साहब की बात वीडियो खुद समझा रहा है! 😏 रांची के अशोक नगर में पड़ोसी के गेट के सामने गाड़ी खड़ी कर रास्ता रोकने के आरोप हैं। वर्दी अलग हो सकती है, सवाल व��ी—क्या आम आदमी के लिए भी यही नियम हैं?
#Ranchi #IPS
@JharkhandCMO @IPS_Association
ये सब तो “घर की बात” है, फिर खबर क्यों बन रही है? थाली बजाकर चंदा चोरों के संघियों की जेब टटोलिए शायद वहीं मिल जाए? वैसे पारिवारिक मैडम की बेटियों का सोने का नेकलेस भी चोरी हुआ था, जब नए चोरों की संगत में आई थीं। आखिर ये सब तो “आम बात” है!
कितना दुर्भाग्यपूर्ण है एक गर्भवती महिला को अस्��ताल में भर्ती होने के लिए भी पैरवी करनी पड़ रही है।
और बजाय राज्य सरकार, मुख्यमंत्री, स्वास्थ मंत्री से सवाल करने के, आप जैसे पत्तलकार इसे अपनी उपलब्धि के तौर पर साझा कर रहे है। शर्मनाक!
एक गोदी म���डिया है और एक आप लोग!
@khurpenchh
बेटा हुआ… ❤️
सुबह-सुबह एक अनजान नंबर से कॉल आया। फोन उठाया तो दूसरी तरफ से एक महिला के रोने की आवाज आई। मैं घबरा गया कि आखिर क्या हो गया।
उन्होंने रो��े हुए बताया, “मुझे बहुत दर्द हो रहा है। आज मेरी डिलीवरी की तारीख है। सुबह छह बजे से पीएमसीएच धनबाद में हूं, लेकिन मुझे भर्ती नहीं किया जा रहा है। कहा जा रहा है कि बेड खाली नहीं है। मदद कीजिए।”
मैंने फोन रखते ही एक सक्षम अधिकारी को फोन कर पूरी बात बताई। उन्होंने कहा, “मैं तुरंत बात करता हूं।” थोड़ी देर बाद उन्होंने कॉल बैक करके बताया कि अस्पताल में बात कर दी गई ��ै। मैं निश्चिंत हो गया और उस महिला को भी फोन करके बता दिया कि आपको भर्ती कर लिया जाएगा।
लेकिन करीब एक घंटे बाद फिर महिला का फोन आया। उन्होंने बताया कि अभी तक कोई मदद नहीं मिली है।
इसके बाद मैंने धनबाद के डीसी आदित्य रंजन को फोन किया और उन्हें पूरी बात बताई। उन्होंने कहा, “आप डिटेल भेजिए, मैं तुरंत दिखाता हूं।”
मैंने उन्हें सारी जानकारी भेज दी। इसके महज पांच मिनट बाद ही महिला का फोन आया। उन्���ोंने बताया कि उन्हें अस्पताल में भर्ती कर लिया गया है।
और अभी थोड़ी देर पहले महिला ने फोन करके बताया कि उसे बेटा हुआ है।
यह सुनकर जो सुकून मिला, उसे शब्दों में बयां नहीं कर सकता। ❤️
एक मां को समय पर इलाज मिला और एक नन्ही-सी जिंदगी ने दुनिया में कदम रखा… इससे बड़ी खुशी और क्या हो सकती है। आदित्य रंजन जी को शुक्रिया। उम्मीद है अस्पतालों की स्थिति अच्छी हो और उसके चौखट से कोई बिना इलाज नहीं लौटे।
@dc_dhanbad
@sunny_sharad कितना दुर्भाग्यपूर्ण है एक गर्भवती महिला को अस्पताल में भर्ती होने के लिए भी पैरवी करनी पड़ रही है।
और बजाय राज्य सरकार, मुख्यमंत्री, स्वास्थ मंत्री से सवाल करने के, आप जैसे पत्तलकार इसे अपनी उपलब्धि के तौर पर साझा कर रहे है। शर्मनाक!
एक गोदी मीडिया है और एक आप लोग!
@khurpenchh
कानून का राज इसलिए होता है ताकि रात के 12 बजे भी कोई परिवार बिना डर के फिल्म देखकर घर लौट सके, मार्केटिंग कर सके या किसी दुकान पर बैठकर एक कप चाय-कॉफी पी सके. नागरिकों को सुरक्षा देना पुलिस की जिम्मे��ारी है, उन्हें डराना नहीं.
बीती रात जमशेदपुर के बिष्टुपुर में सोशल मीडिया में वायरल वीडियो के अनुसार रात 10:30 से 11:30 बजे के बीच दुकानों में चाय पी रहे, कोई आइसक्रीम खा रहे हैं या खरीदारी के लिए बाहर निकले आमलोगों पर बिस्टुपुर पुलिस द्वारा अचानक बिना सूचना दिए लाठी बरसाने का शर्मनाक मामला सामने आया है. आमलोगों की पुलिस द्वारा पिटाई की मैं कड़ी निंदा करता हूं. कानून-व्यवस्था बनाए रखना पुलिस की जि��्मेदारी है, लेकिन आम नागरिकों के साथ मारपीट किसी भी परिस्थिति में उचित नहीं है.
@JharkhandPolice वायरल वीडियो में शांतिपूर्ण नागरिकों पर डंडा चलाने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो. साथ ही पुलिस के आला अधिकारियों को इस पूरे मामले पर सार्वजनिक रूप से स्पष्टीकरण भी देना चाहिए. निर्दोष लोगों को क्यों पीटा जा रहा है. ?
अगर रात में बाजारों में निकलना अपराध है, तो जिला प्रशासन आमलोगों पर लाठी चलाने और बेरहमी से पिटाई करने के बजाय शहर में स्पष्ट नियम और आवश्यक प्रतिबंध क्यों नहीं लागू कर देती है ? पुलिस इतनी लाचार है तो नियम बना दे कि संध्या 7 बजे के बाद दुकानें बंद कर दें. घर से निकलने के लिए पुलिस से अनुमति लेनी होगी.
पुलिस को अपना पावर दिखाना ही है तो बेकाबू हो चुके अपराध और अपराधियों पर दिखाए. जो लोग नशाबाजी को लेकर अड्डेबाजी करते हैं, उनके खिलाफ जरूर सख्त कार्रवाई करें.
जमशेदपुर एक औद्योगिक शहर है. लोग देर रात तक फैक्ट्रियों में शिफ्ट करते हैं, काम करते हैं फिर अपने परिवार के साथ कुछ समय बिताने बाहर निकलते हैं, उन्हें सुरक्षा चाहिए, पुलिस की लाठी नहीं.
माननीय मुख्यमंत्री @HemantSorenJMM जी, आपकी सरकार विदेशों में जाकर निवेशकों को झारखंड में निवेश के लिए आमंत्रित कर एमओयू कर रही है, यदि अपराधियों पर नियंत्रण के बजाय बाजार बंद करवाए जाएं और आम नागरिकों को रात में सड़कों पर निकलने से लाठी से पिटाई और डराया जाए, तो इससे देश-दुनिया में जमशेदपुर और झारखंड की कानून-व्यवस्���ा को लेकर क्या संदेश जाएगा ?
जमशेदपुर में हालात ऐसे हैं कि पुलिस की गाड़ी से खींचकर हत्या की घटना सामने आती है, दिनदहाड़े बैंक लूटे जा रहे हैं और रेस्टोरेंट में घुसकर अपराधी ताबड़तोड़ फायरिंग करके आसानी से फरार हो जाते हैं. अपराधियों में पुलिस का खौफ दिखाई नहीं देता. अपराधी पुलिस के नाक के नीचे से अपराध करता है, पुलिस देखती रह जाती है. ये पुलिस की नाकामी है,
लेकिन जब अपराधियों पर कार्रवाई करने की बात आती है तो क्या आम जनता पर डंडा चलाकर अपनी ताकत दिखाना ही पुलिसिंग है ?
दिन ��ें बैंक लुटे जा रहे है. दिन में चोरी, दिन में गोलीबारी, हत्या, दुष्कर्म, महिलाओं के गले से चेन छीनतई की घटना होती है तो क्या स्कूल, बाजार और फैक्ट्रियां भी बंद करा दी जाएंगी ? लोगों को घरों में बंद कर देने से अपराध खत्म हो जाएंगे ? अपराध नियंत्रण के नाम पर चाय पी रहे लोगों पर लाठी से पिटाई करने से कानून-व्यवस्था बेहतर नहीं होगी.
एक तरफ राज्य सरकार की अनुमति से देर रात 11 बजे तक बार और शराब की दुकानें ख���लती हैं, दूसरी तरफ चाय-आइसक्रीम खाने वाले आमलोगों पर डंडे बरसाए जाते हैं. आखिर कौन सा कानून पुलिस को शांतिपूर्ण नागरिकों के साथ ऐसा व्यवहार करने का अधिकार देता है ? क्या रात में दुकान पर चाय-कॉफी पीना या परिवार के साथ बाहर निकलना अपराध है ?
वायरल वीडियो में एक दुकान के बाहर महिलाएं भी डरे-सहमे देखा जा रहा है और उनके सामने पुलिसकर्मी लाठियां भांजते नजर आ रहे हैं. दुकानें बंद करवाकर और लोगों की पिटाई कर घरों में भेजकर पुलिस अपनी नाकामी छिपा नहीं सकती. इससे जनता के मन में कानून के प्रति सम्मान नहीं, बल्कि भय और अविश्वास पैदा होगा.
जमशेदपुर की गंभीर परिस्थितियों को देखकर नब्बे दशक की याद आने लगी है, जब रात होते ही बाजारों में सन्नाटा छा जाता था और लोगों को घर से निकलने में डर लगता था.
अपराधी खुलेआम अपराध करके निकल जाएं और उसका खामियाजा आम जनता भुगते यह कानून का राज नहीं हो सकता...
@Jsr_Police : अपराध नहीं रुक रहा, कोई बात ��हीं, चलो हर शाम शहर के आम नागरिकों को कूट देते है।
@JharkhandPolice क्या जमशेदपुर पुलिस वर्दी की आड़ में अब लाेगों का घर से निकलना भी बंद करवा देगी? इस प्रकार बर्बरता से गुंडों की तरह आम लोगों को मारेगी?
@HemantSorenJMM सर, संज्ञान ले।
@Jsr_Police : अपराध नहीं रुक रहा, कोई बात ��हीं, चलो हर शाम शहर के आम नागरिकों को कूट देते है।
@JharkhandPolice क्या जमशेदपुर पुलिस वर्दी की आड़ में अब लाेगों का घर से निकलना भी बंद करवा देगी? इस प्रकार बर्बरता से गुंडों की तरह आम लोगों को मारेगी?
@HemantSorenJMM सर, संज्ञान ले।
@Jsr_Police : अपराध नहीं रुक रहा, कोई बात ��हीं, चलो हर शाम शहर के आम नागरिकों को कूट देते है।
@JharkhandPolice क्या जमशेदपुर पुलिस वर्दी की आड़ में अब लाेगों का घर से निकलना भी बंद करवा देगी? इस प्रकार बर्बरता से गुंडों की तरह आम लोगों को मारेगी?
@HemantSorenJMM सर, संज्ञान ले।
@Jsr_Police : अपराध नहीं रुक रहा, कोई बात नहीं, चलो हर शाम शहर के आम नागरिकों को कूट देते है।
@JharkhandPolice क्या जमशेदपुर पुलिस वर्दी की आड़ में अब लाेगों का घर से निकलना भी बंद करवा देगी? इस प्रकार बर्बरता से गुंडों की ��रह आम लोगों को मारेगी?
@HemantSorenJMM सर, संज्ञान ले।
@The_FollowUp@DipikaPS@HemantSorenJMM@INCIndia दिन भर किताबों में खोई रहती थी और रात भर सड़क पर कार दौड़ा कर घूमा करती थी।
इतना कहानी क्यों बनाना है भाई, किसी के भी घर व��ले इतनी रात को अपने बच्चों को निकलने नहीं देते है। वो भी रात के 2-3 बजे।
आए दिन झारखंड में सड़क दुर्घटनाओं में किसी न किसी परिवार के सदस्य जान गवां देते।
क्या झारखंड के भांड डिजिटल मीडिया वालो को शोकाकुल परिवार के घर जा कर कवरेज करते देखा है किसी ने?
@The_FollowUp@DipikaPS मरांग बुरू दिवंगत आत्मा को शांति दे।
आए दिन किसी न किसी परिवार के सदस्य सड़क हादसे में जान गवां देते है, उनके परिवार का कवरेज करने भी जाया करो।
@IrfanAnsariMLA झारखंड का स्वास्थ व्यवस्था आपके कार्यकाल में इतना बढ़िया हो गया है कि हमारे ��दरणीय मुख्यमंत्री जी को अपनी पूजनीय माता जी को इलाज के लिए हैदराबाद ले जाना पड़ रहा है।
ऐसे ही काम करते रहिए इरफान चिचा।