कम से कम गाली पर बीजेपी को बोलने का नैतिक आधार नहीं है ।
इनके प्रवक्ता लाइव टीवी पर और संसद के अंदर गाली नहीं देते देखे जाते रहे हैं ?
क्या किसी के खिलाफ कार्रवाई हुई ?
ऐसे ही पूछ लिया । जवाब मैं जानता हूँ ।
सुधांशु त्रिवेदी ने राज्यसभा में दावा किया कि अमेरिका ने गाय के मूत्र का पेटेंट कराया है। आइए, इस दावे की वास्तविकता समझते हैं।
1. जिस अमेरिकी पेटेंट का हवाला दिया जा रहा है, वह किसी अमेरिकी संस्था का नहीं, बल्कि भारत की वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) द्वारा दायर किया गया था।
2. यह पेटेंट 2020 में मेंटेनेंस (एक्सटेंशन) फीस जमा न होने के कारण समाप्त (Expired) हो गया।
3. यह पेटेंट गाय के मूत्र पर नहीं, बल्कि गाय के मूत्र के डिस्ट��लेट (Cow Urine Distillate) के असर का है अर्थात दावा मूत्र पर नहीं, बल्कि उसके आसुत (distilled) अंश के संभावित प्रभाव पर था।
4. स्वयं पेटेंट में यह भी उल्लेख है कि इसी प्रकार का प्रभाव भैंस, ऊँट और हिरण के मूत्र के डिस्टिलेट में भी देखा गया।
डिस्टिलेशन (Distillation) क्या है?
किसी भी मिश्रण में उपस्थित विभिन्न घटकों का वाष्प दाब (Vapor Pressure) और क्वथनांक (Boiling Point) अलग-अलग होता है। इसी सिद्धांत का उपयोग करके डिस्टिलेशन के माध्यम से क��छ वाष्पशील (volatile) घटकों को अलग किया जाता है। यही तकनीक पानी के शुद्धिकरण, समुद्री जल के अलवणीकरण (desalination), रसायन उद्योग और यहाँ तक कि सीवेज के उपचार में भी उपयोग की जाती है। इसलिए किसी पदार्थ का डिस्टिलेट प्राप्त होना अपने-आप में उस मूल पदार्थ के औषधीय या सेवन योग्य होने का प्रमाण नहीं है।
अब एक महत्वपूर्ण प्रश्न उठता है। गाय सहित लगभग सभी जानवरों के मूत्र में विभिन्न प्रकार के सूक्ष्मजीव और खरनाक रोगजनक (pathogenic) बैक्टीरिया पाए जाते हैं। यदि मूत्र में इतना शक्तिशाली एंटीमाइक्रोबियल कंपोनेंट होता, तो सबसे पहले उसी में मौजूद बैक्टीरिया नष्ट हो जाने चाहिए थे।
वास्तविकता यह है कि अनेक रसायनों और प्राकृतिक पदार्थों में प्रयोगशाला स्तर पर ���ंटीमाइक्रोबियल गतिविधि (antimicrobial activity) पाई जाती है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं होता कि वे सीधे पीने, खाने या चिकित्सा के लिए सुरक्षित और प्रभावी सिद्ध हो जाते हैं। किसी पदार्थ को दवा मानने के लिए कठोर प्रीक्लिनिकल और क्लिनिकल परीक्षण आवश्यक होते हैं।
भारत जैसे देश में, जहाँ अभी भी वैज्ञानिक साक्षरता और वैज्ञानिक ��ृष्टिकोण को मजबूत करने की आवश्यकता है, संसद जैसे सर्वोच्च लोकतांत्रिक मंच से इस प्रकार के अधूरे या भ्रामक दावे करना लोगों में भ्रम और अंधविश्वास को बढ़ावा मिलेगा । सार्वजनिक जीवन में वैज्ञानिक विषयों पर चर्चा हमेशा उपलब्ध वैज्ञानिक प्रमाणों और तथ्यों के आधार उस विषय के एक्सपर्ट को करनी चाहिए न कि प्रोपेगंडा के लिए भाषण बाजी करना चाहिए।
राजकुमारी कौल बिना विवाह के अटल जी के साथ रहती थीं। उनकी बेटी नमिता को अटल जी ने अपनी दत्तक पुत्री बताया था।
संघ के एक बड़े पदाधिकारी ने भी कहा था कि अटल जी ने अपने सरकारी आवास को व्यभिचार का अड्डा बना लिया था।
ये बातें कांग्रेसियों को पता है लेकिन इनके चरित्र हनन नहीं करते।
अच्छी बात तो यही होती कि हम किसी भी नेता के व्यक्तिगत जीवन पर टिप्पणी न करें।
लेकिन जब भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जिन्होंने लगभग 9 वर्ष जेल में बिताए और 112 पुस्तकें लिखीं उन्हें सदन में बार-बार एक जाहिल नेता "अय्याश" कहता है!तब उसकी संसद सदस्यता रद्द नहीं किया जाता बल्कि ऐसे नेताओं को BJP वाले संरक्षण प्रदान करते हैं।
जेफरी एपस्टीन फाइल, मानसी सोनी फाइल, मधु किश्वर सुब्रमण्यम स��वामी फाइल,जो पुरा देश जानता है नरेंद्र दामोदरदास मोदी की रिश्ता एपस्टीन फाइल से जुड़ी हैं।
सबसे बड़ी बात यह है कि मोदी जी जब भी विदेश जाते हैं बिना नेहरू और गांधी के बिना उनकी बात होती ही नहीं।
नेहरू को अय्याशी कहने वाले भाजपा के सांसद निशिकांत दुबे को सार्वजनिक रूप से माफी मांगना चाहिए।
धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा हमारे education system को फिर से संवारने की दिशा में बहुत बड़ा कदम है।
शाबाश देश भर के छात्रों, आप सभी पर गर्व है।
सड़कों पर आ कर लोकतंत्र, संविधान और अपने भविष्य की रक्षा में डट कर खड़े होने वाले हर एक युवा, हर छात्र को बहुत-बहुत बधाई।
2 मांगें अभी भी बाकी हैं - प्रधानमंत्री छात्रों और भारत के भविष्य को सम्मान देते हुए माफ़ी मांगें और छात्रों पर हिंसा के दोषियों पर कार्रवाई हो।
ये समाज के दूसरे वर्गों किसानों, मजदूरों, गरीबों, हर वो व्यक्ति जिसे इस सरकार ने दबाया है, कुचला है - अपने सम्मान के लिए संवैधानिक तरीके से डटकर खड़े होने में ही असली ��ाहस है।
इस सरकार को हटाने का वक्त आ गया है।
डरो मत!
"अगर एक बार फिर बोलने पर उन्हें 'देशद्रोही' कहा जाता है, तो वह इसके लिए तैयार हैं"
◆ सिंगर दिलजीत दोसांझ ने कहा
#DiljitDosanjh | @diljitdosanjh | Diljit Dosanjh
बड़ा बयान: "मैं वास्तव में मरने से पहले मरना नहीं चाहता।" 🔥
पत्रकार: अन्ना हज़ारे के आंदोलन के दौरान हमने आमिर खान, अनुपम खेर, अमिताभ ब��्चन और कई अन्य कलाकारों को खुलकर बोलते देखा था।
पत्रकार : आपको डर नही लगता
प्रकाश राज : झूठ बोलने को डरना है यार, सच बोलने को क्या डरना, सच के साथ खड़ा होना डर नही है !
अब सोनम वांगचुक और CJP के विरोध प्रदर्शन के समर्थन में कोई सामने क्यों नहीं आ रहा?
प्रकाश राज: "वे डरे हुए हैं। हम सच के साथ खड़े हैं। जो सही है, उसके समर्थन में खड़े होने से हमें डर नहीं लगता।"
प्रधानमंत्री मोदी भारत के इतिहास के सबसे युवा-विरोधी प्रधानमंत्री हैं - इतने युवा विरोधी कि एक नाकाम शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा भी नहीं ले सकते।
152 पेपर लीक। 7.5 करोड़ छात्र पीड़ित। और सज़ा एक दोषी को भी नहीं। सजा किसे मिली? मेहनती युवाओं को।
और जब इन बच्चों ने शिक्षा के जायज़ सवाल उठाए - तो जवाब में मिली लाठी और हिरासत। लीक करने वाले अपराधी आज़ाद - और वाजिब मुद्दे उठाने वाले छात्र घसीट�� जाते हैं, पीटे जाते हैं।
यह सरकार सिर्फ़ युवाओं को नाकाम नहीं कर रही - उनपर टूट पड़ी है।
कोटा, आप कमाल थे।
यकीन मानिए, कल हमने मिलकर इतिहास की शुरुआत की।
हज़ारों छात्र मैदान में थे, लाखों लोगों ने ऑनलाइन देखा - और देश को पहली बार खुलकर पता चला कि शिक्षा के नाम पर कितनी ब��़ी वसूली चल रही है।
लेकिन यह तो सिर्फ़ शुरुआत है। कोटा में जो लौ जली है, उसे अब पूरे देश में बदलाव की मशाल बनाना है। और इस सफ़र में आपकी जगह तय है।
अपने सुझाव भेजिए। Petition पर अभी Sign कीजिए।
#ChhatronKiGoonj
मीनाक्षी नटराजन का नामांकन ऐसे मामले के आधार प�� खारिज किया गया है, जो मौजूद ही नहीं है।
निर्वाचन आयोग का काम न्याय करना है। अगर इस तरह नामांकन खारिज किए जाएंगे, तो चुनाव में सभी उम्मीदवारों को बराबरी का मौका कैसे मिलेगा?
— अभिषेक मनु सिंघवी, सुप्रीम कोर्ट के वकील
मीनाक्षी नटराजन का नॉमिनेशन रद्द करने की ज़िद पर अगर चुनाव आयोग अड़ा रहता है तो पूरे विपक्ष को इसके ख़िलाफ़ आंदोलन छेड़ देना चाहिए।
सिर्फ़ कांग्रेस का नहीं, यह हर सत्ता विरोधी पार्टी और नागरिक का ��ंघर्ष है।
��ूरदर्शन के सरकारी पत्रकार ने देश के एक होनहार छात्र वेदांत को पाकिस्तानी बता दिया।क्योंकि वेदांत ने CBSE से परीक्षा पर सवाल पूछ लिया था।एक सवाल पूछते ही जनता के टैक्�� के पैसों पर पलने वाले भारतीयों 🇮🇳 को पाकिस्तानी बताने लगते हैं।
नार्वे में जो तमाशा हुआ, उस पर शेखर सुमन ने गोदी मीडिया और अंधभक्ति, दोनों की स्क्रिप्ट फ���ड़ दी। 💯🔥
यहां मीडिया को इतनी "छूट" है कि स्टूडियो में इस्लामाबाद पर कब्ज़ा भी कर लेते हैं। 🤣😭🔥