Well done, Arjun. ❤️
Proud of the way you’ve carried yourself through this season, always believing in your ability, staying patient, working hard quietly, and remaining positive despite having to wait for your opportunity till the very last match.
Cricket tests patience as much as skill, and you handled both beautifully today.
Keep your feet on the ground, and continue being in love with the game like you always have.
Love you always.👏
Wars are tragic, yet they remain a reality.
Any language or action that contemplates the end of civilisation is unacceptable in the modern world.
The use of nuclear weapons can never be justified - under any circumstances.
>1965 बंगाल में जन्म,
>1988 में IIT खड़गपुर से कंप्यूटर साइंस में बीटेक,
>TIFR से कंप्यूटर साइंस में PhD,
>MBA इन बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन एंड फाइनेंस ,
>LLB पंजाब यूनिवर्सिटी से ,
>अशोक खेमका IAS 1991 बैच
>57 ट्रांसफर पूरे करियर में औसतन हर 6 महीने में,
>पिछले 12 साल से लो प्रोफाइल डिपार्टमेंट में ईमानदार होने की सजा काट रहे थे ,
>रॉबर्ट वाड्रा से संबंधित गुरुग्राम डील को कैंसिल किया,
>4 पोस्टिंग आर्काइव डिपार्टमेंट में मक्खी मारने के लिए मिली ,
>2023 में खट्टर साहब को विजिलेंस हेड करने के लिए पत्र लिखा और कहा कि ये भ्रष्टाचार के खिलाफ सबसे बड़ा युद्ध होगा और कोई नहीं बचेगा लेकिन मौका नहीं मिला,
>आज सिस्टम में रहकर सिस्टम से लड़ते लड़ते वो रिटायर हो गए ,
देश में ईमानदार अधिकारियों को सबसे घटिया डिपार्टमेंट में मक्खी मारने की लिए छोड़ दिया जाता है,और जो अधिकारी नेताओं के जांघिया का नारा पकड़ के जी हुजूरी करते हैं उन्हें मलाई वाले डिपार्टमेंट दिए जाते हैं, इस देश में बेईमान और चोरों की तूती बोलती है और ईमानदारों को सच बोलने की सजा मिलती है।
अगर अशोक खेमका जैसे 100 अधिकारी भी सिस्टम में आ जा���ं तो काफी बदलाव देखने को मिलेगा।
Dr. Sivaranjani Santoshh has been fighting for 8 years against sugar-rich drinks falsely marketed as ORS.
We’ve been consuming sugary drinks when our body actually needs ORS.
Yet it took FSSAI 8 damn years to take a call.
Most Corrupt and Inefficient. That’s FSSAI.
"हम जीत गए! अब कोई भी अपनी बोतल पर ‘ORS’ नहीं लिख सकेगा!"
अब किसी भी खाने-पीने के प्रोडक्ट पर ‘ORS’ का लेबल लगाने से पहले WHO की मंजूरी जरूरी होगी - ये आदेश FSSAI ने जारी किया है।
हैदराबाद की बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. शिवरंजनी संतोष ने इसके लिए 8 साल तक लड़ाई लड़ी और आखिरकार जीतने के बाद वो भावुक हो गईं।
उनका मकसद था - गलत मार्केटिंग को रोकना और लोगों को बताना कि असली ORS कौन-सा है, ताकि बच्चों को मीठे ड्रिंक्स से नुकसान न पहुंचे।
PC – Indianews daily
डॉ. शिवरंजनी संतोष ने 8 साल तक लड़ाई लड़ी ताकि मीठे पेय ORS के नाम पर बच्चों को जहर न पिलाया जाए —> पर सवाल ये है कि इतने साल तक ये झूठा कारोबार चलता रहा तो कौन था जो इन कंपनियों की ढाल बना रहा था?
माननीय @myogiadityanath@PMOIndia,
देश में दिवाली से बड़ा कोई पर्व नहीं है और अगर इस दिन भी इंसान अपने घर पहुंच कर त्यौहार नहीं मना पाए तो फिर त्यौहार होने का क्या फायदा?
एक अकेले कमरे में नौकरी करता हुआ इंसान पूरे साल रहता है कृपया उसे घर जाने की इजाजत दें।
#DiwaliForBankers
जो भी लोग ट्रेन से सफर करते हैं, उन्होंने यह नजारा जरूर देखा होगा -->
स्टेशन पर कुछ लोग बाल्टी या टोकरी में भुजिया , मिक्सचर, चना, मूँगफली , नींबू, खीरा, समोसे , ब्रेड-ऑमलेट लेकर सीधे बोगियों में घुस जाते हैं।
🚨 सवाल यह है —>
कौन देता है इन्हें अनुमति?
ना इनके पास टिकट, ना लाइसेंस, ना हाइजीन सर्टिफिकेट।
फिर भी ये रोज़ाना ट्रेन में घुसते हैं, सामान बेचते हैं, और ट्रेन स्लो होते ही कूदकर उतर जाते हैं , ये सब रेलव�� अधिकारियों की आंखों के सामने होता है।
⚠️ खतरे :
इन चीज़ों की क्वालिटी पर कोई नियंत्रण नहीं कोई यात्री बीमार पड़े या मर जाए, जिम्मेदार कौन?
फूड पॉइज़निंग, संक्रमण और स्वास्थ्य जोखिम का सीधा खतरा।
ऐसे लोग सुरक्षा जोखिम भी हैं —> कोई चोरी, झगड़ा या दुर्घटना हो जाए, इनकी पहचान तक दर्ज नहीं होती।
भ्रष्टाचार का शक :
ऐसा लगता है कि यह सब रेल अधिकारियों की मिलीभगत से चलता है।
रोज़ाना इन लोगों को ट्रेन में घुसने देने के लिए रोज़ का पैसा वसूला जाता है — यानी यात्रियों की जान और सुरक्षा “रोज़ की कमाई” में बेची जा रही है।
✊ अब वक्त है जवाब मांगने का :>
हर ट्रेन में सिर्फ अधिकृत वेंडरों को ही अनुमति दी जाए।
वेंडरों की ID और यूनिफॉर्म अनिवार्य की जाए।
बिना टिकट-बिना परमिट घुसने वालों पर तुरंत कार्रवाई हो।
यात्रियों को जागरूक किया जाए कि वे अवैध विक्रेताओं से सामान न खरीदें।
और सबसे जरूरी — रेलवे को जवाब देना होगा कि ये लोग रोज कैसे घुसते हैं और किसकी जेब में जाता है यह पैसा।
👉 यह सिर्फ सफाई या खानपान का मुद्दा नहीं यह सुरक्षा, ईमानदारी और यात्रियों की जान का सवाल है।
ऐसा अक्सर देखा जाता है कि जब रेलवे की ऑफिशियल वेबसाइट या IRCTC ऐप से टिकट बुक करते हैं, तो सीट Not Available या “WL” (वेटिंग लिस्ट) दिखती है ,
लेकिन थर्ड पार्टी ऐप्स जैसे Confirm Ticket , Goibibo , Makemytrip, EaseMyTrip आदि पर Available दिख जाती है।
इससे लोगों में कई सवाल उठते हैं —> क्या रेलवे इन एजेंट ऐप्स को टिकट पहले से दे देती है?
मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं :
1. रेलवे कोटा सिस्टम –> अलग-अलग ऐप्स और एजेंट IRCTC के API से टिकट बुक करते हैं, पर कई बार इनके पास Tourism, Tatkal, Premium Tatkal या Agent Quota के तहत सीमित सीटों की एक्सेस होती है।
2. थर्ड पार्टी सर्विस चार्ज –> ये ऐप्स टिकट के ऊपर अतिरिक्त सर्विस चार्ज जोड़ते हैं और कंडीशन लगाते हैं कि टिकट सिर्फ स्टार्टिंग स्टेशन से एंड स्टेशन तक ही मिलेगा —> यानी आंशिक यात्रा के लिए नहीं।
3. कस्टमर का नुकसान –> मजबूरी में लोग ये महंगी टिकटें लेते हैं क्योंकि IRCTC पर वेटिंग दिखती है।
4. Confirmed Ticket Guarantee जैसी स्कीमें –> ये ऐप्स अपने स्तर पर रिस्क लेकर टिकट ब्लॉक कर लेते हैं और बाद में कन्फर्म टिकट देने का वादा करते हैं, जिससे कई बार दूसरे यूज़र्स को टिकट नहीं मिल पाती।
5. डेटा और सिंक टाइम डिफरेंस –> इन ऐप्स पर सीट की जानकारी IRCTC सर्वर से थोड़ी देर बाद अपडेट होती है, जिससे अस्थायी भ्रम भी हो सकता है कि वहां सीट है पर IRCTC पर नहीं।
6. नैतिक सवाल –> इससे यह शंका भी उठती है कि कहीं रेलवे एजेंटों या ऐप्स को अप्रत्यक्ष रूप से प्राथमिकता तो नहीं मिल रही।
👉 नतीजा : आम यात्री को सीधी IRCTC बुकिंग में नुकसान होता है —> न सीट मिलती है, न सही दाम।
लोगों को पारदर्शी और एक समान टिकटिंग सिस्टम की जरूरत है, ताकि सीट उपलब्धता और किराया हर प्लेटफॉर्म पर एक जैसा दिखे।
पूरे देश में जब दिवाली धूमधाम से मनाई जा रही होगी वहीं बैंक कर्मी जो कि घरों से बहुत दूर पोस्टिंग पर हैं वह रास्तों में धक्के खा रहे हैं होंगे।
माननीय @myogiadityanath@irameshawasthi जी से मेरा अनुरोध है कृपया 21 को छुट्टी घोषित करें।
देश का हर विभाग दीवाली के बाद छुट्टी देता है,
सिवाय बैंकों के।
क्यों?
क्या बैंककर्मी त्यौहार नहीं मना सकते?
खैर त्योहार इंसान मनाते है पर बैंक वे तो ग़ुलाम है
और गुलामो को खुशियों का हक कहाँ
#DeewaliForBankers
प्रिय साथियों,
दिवाली के बाद का दिन हमारे परिवारों के साथ समय बिताने का होता है, परंतु बैंककर्मियों को उस दिन भी कार्य करना पड़ता है। इस न्यायसंगत मांग को प्रभावी रूप से उठाने हेतु कल 17oct ट्विटर/X पर ���क संयुक्त अभियान चलाया जाएगा
समय: शाम 8:00 बजे
हैशटैग: #DiwaliForBankers
दीपावली पर बैंक कर्मी देश की सेवा में जुटे रहते हैं,
पर परिवार संग त्योहार मनाने का अवसर उन्हें भी मिलना चाहिए। 🙏
अतः अनुरोध है कि दीपावली के अगले द���न 21 को NI Act के अंतर्गत अवकाश घोषित किया जाए।
#DiwaliForBankers