पहले पानी पिलाया, जैसे ही जाति पता चली, पंडित का धर्म भ्रष्ट हो गया!
"तुमने हमारा गिलास कैसे छुआ? पानी पीने की हिम्मत कैसे हुई?" "मास्टर हो गया तो अपनी जगह भूल गया"
सोचिए इनके घर के बच्चे जब कॉलेज में पढ़ने जाते होंगे तो कितना भेदभाव करते होंगे!
मैं अगर चोरी नहीं करता तो चोरी की सजा के लिए कितना भी बड़ा कानून आ जाए मैं नहीं डरूँगा
OBC दलित एसटी छात्रों के साथ भेदभाव होता है जो की नहीं होना चाहिए इसलिए यूजीसी का नया नियम जरूरी है ।
जिसको भी UGC गाइड लाइन्स से दिक्क़त है,
वो पहली फुरसत में पाकिस्तान निकल ले,
ये गाइड लाइन्स भारत के लोगों के लिए है,
पाकिस्तान में UGC गाइड लाइन्स नहीं है,
वहाँ निकल लो, विरोध करने वालों,
UGC का विरोध करने वाले SC ST OBC को हिंदू नहीं मानते?
अगर आप जातिवादी नहीं हैं तो आपको समर्थन करना चाहिए।
रोहित, पायल, दर्शन, पल्लवी, मुत्थु जैसे हजारों बहुजनों को हमने खो दिया, अब और बलिदान नहीं देंगे!
हजारों सालों वाला जातिवादी गुंडई अब बंद करनी पड़ेगी!
एकलव्य का अंगूठा काटने की आदतों से अब बाज आइए।
UGC गाइड लाइन्स का जितना विरोध
ब्राम्हण समाज कर रहा है,
उतना विरोध ठाकुर और भूमिहार समा�� नहीं कर रहा है,
क्योंकि ठाकुर और भूमिहार समाज शासक और जमींदार रहा है,
हमेशा देने वाला समाज रहा है,
जबकि ब्राम्हण समाज दलित, पिछड़ों के अधिकार में होने वाली किसी भी बात का हमेशा विरोध करता रहा है,
#LEGEND_उवाच
एंकर “क्या UGC नैचुरल जस्टिस के ख़िलाफ़ है”
बहुजनों के साथ अन्याय को इतना नेचुरल बना दिया है की उनपर अत्याचार क���ने का अधिकार भी नेचुरल लगने लगा है!
ये चिंता नहीं की रोहित, पायल और दर्शन की माँ अपने बच्चों को खोने के बाद सुप्रीम कोर्ट गई केवल इसलिए की 2012 का UGC क़ानून देश में ढंग से लागू नहीं हुआ और उनके बच्चे उनसे छिन गए!
ये चिंता नहीं की विश्वविद्यालयों में Caste Discrimination को आज तक civil act माना गया है Criminal Act नहीं बनाया गया इसलिए जेल जाने की नौबत नहीं आती तो धड़ल्ले से जातिगत भेदभाव कर रहे हैं।
अंत में Equity कमिटी मामले को VC के पास भेजेगी और VC की देश में कितनी डाइवर्सिटी है सबको पता है !
शर्म नहीं आती उन लोगों को जो आज भी दमन का अधिकार जारी रखना चाहते हैं!
यह फ्राड बागेश्वर छत्तीसगढ़ सरकार के विमान से घूम रहा है। जनता अपने लिए स्कूल, कॉलेज, एयरपोर्ट, बस, रेलवे और तमाम बुनियादी ढांचे के लिए टैक्स देती है, न कि फ्राड बाबाओं के मज़े करने के लिए।
बीजेपी जनता की पार्टी नहीं है, बल्कि फर्जी बाबाओं की पार्टी है, यह बात वह कई बार साबित कर चुकी है।
जब रेप दोषियों को राहत मिलती है,तो डर सिर्फ एक परिवार में नहीं पूरे समाज में फैलता है।आज पीड़िता सड़कों पर है —और सवाल सिस्टम से है।
#JusticeForUnnaoVictim
बच्चों के साथ स्कूल में जातीय आधार पर भेदभाव होता है. बच्चों ने खुलेआम ऑन कैमरा टीचर पर आरोप लगाया. GUNDI टीचर ऊंची आवाज में बच्ची को धमका रही है. खबर बिहार की राजधानी पटना की है. इस महिला टीचर पर कठोर कार्यवाही होनी चाहिए.
चुनाव आयोग और बीजेपी की जुगलबंदी समझनी हो तो असम को देखिए। पूरे देश में SIR लागू किया जा रहा है, लेकिन असम—��हाँ इसकी सबसे ज़्यादा ज़रूरत थी—वहीं न फ़ॉर्म भरना पड़ेगा और न ही SIR लागू होगा।
सुनिए, इस पर @_YogendraYadav जी क्या कह रहे हैं—क्यों यह फैसला लोकतंत्र और मतदाता अधिकारों के लिए गंभीर सवाल खड़े करता है।