रात में रांची में बारिश के बीच युवाओं का हौसला और स��घर्ष जारी है।
हेमंत सोरेन सरकार के लिए इससे शर्मनाक तस्वीर और क्या हो सकती है, अगर मांग मान लेते तो क्या ही बिगड़ जाता😡
लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध और अपनी बात रखना हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है।
और इस तरीके से चादर से Cover करके ताकि कोई वीडियो ना बना सके उठा कर ले जाना उस शख़्स को जो देश के तमाम बच्चो के भविष्य के लिए अनशन पर है कहा तक उचित है ?
क्या सही तरीका ये नहीं कि शिक्षा मंत्री का इस्तीफ़ा करवा देते , या आप सरकार के किसी मंत्री के द्वारा बातचीत करके उनका अनशन तुड़वाने की कोशिश करते लेकिन जबरदस्ती इस तरीके से अनशन तुड़वाना ये अनशन और देश का अपमान है
लोकतंत्र की हत्या है ! ......
दमन हर चीज का हुआ है ! तो दमन सत्ता के गलियारों में घर कर गया उस घमंड का भी होगा जिसके सामने आम नागरिकों की आवाज नहीं सुनाई दे रही !......
कैसा देश हो गया है - सांसद भी प्रोटेस्ट मंचों से सरकार से गुहार लगा रहे है कि सुनिए दर्द ए दास्तां ||
आज विपक्ष के सांसदों कि आवाज़ direct सरकार तक नहीं जा सकती कि वो पूछकर बता सके कि सरकार चाहती क्या है? क्यूँ नहीं सुन रही क्या उसको किसी के जान जाने से फर्क नहीं पड़ता?
क्या कोई ऐसा सांसद नहीं जो सीधे Modi साहब को पूछ ले और ह���ँ या ना का जवाब मिल जाए ||
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भूख हड़ताल का 15वां दिन! सोनम वांगचुक सर की तबीयत बेहद नाज़ुक है BP काफ़ी गिर चुका है 104/66 पर!
15 दिनों में 7.8 किलो वजन घट चुका है... शरीर टूट रहा है, लेकिन देश के ��ुवाओं के भविष्य के लिए इरादा आज भी फौलादी है।
इस सच्चे देशभक्त की गिरती सेहत देखकर भी क्या सिस्टम सोया रहेगा?
59 साल के @Wangchuk66 देश के करोड़ों युवाओं के बेहतर भविष्य के लिए 14 दिन से आमरण अनशन पर बैठे हैं, उनकी हालत बिगड़ रही है, 9 किलो वजन कम हो ���ुका है, लेकिन मेलोडी मोदी पर घंटों ख़बर चलाने वाला निर्दयी गोदी मीडिया की आत्मा मर चुकी है उसको करोड़ों युवाओं के मुद्दे से कोई मतलब नही।
तुम कब जागोगे युवा शक्ति?
पहुँचो जंतर मंतर।
सोनम वांगचुक, जिसने कभी अपने लिए नहीं माँगा, कुछ कि पद चाहिए, सत्ता चाहिए।
अपनी ज़िंदगी देश, समाज और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के लिए लड़ते रहे है और 15-16 दिनों से अनशन पर बैठे हैं!
अपने लिए नहीं, देश के लिए। देश के बच्चों के भविष्य के लिए! उसके बाद भी देश के नेताओं की सोई हुई संवेदनाएँ नहीं जाग पा रही।
सत्ता की ख़ामोशी बरकरार है।
भूख हड़ताल और अनशन भी अगर व्यवस्था को सुनाई नहीं दे रहा, तो एक आम नागरिक की आवाज़ की कीमत क्या ही होगी?
अब दर्द सिर्फ़ यह नहीं कि एक व्यक्ति अनशन पर है, बड़ा दर्द यह है कि देश धीरे-धीरे उस मुकाम पर पहुँच रहा है जहाँ जनता की पीड़ा का महत्व खत्म है और उस पर सत्ता हावी है।
सोचिए, आज अगर एक ऐसे व्यक्ति की आवाज़ अनसुनी ���ी जा सकती है, जिसने अपना जीवन देश के लिए लगा दिया, तो कल बेरोज़गार युवा, न्याय की गुहार लगाता परिवार, किसान, छात्र या कोई भी आम नागरिक किस उम्मीद से अपनी तकलीफ़ के लिए लड़ पाएगा और कौन उसकी सुनेगा?
लोकतंत्र का मतलब सिर्फ़ चुनाव है क्या? अगर सत्ता अपने शांत नागरिक की आवाज़ नहीं सुन रही, तो ये लोकतंत्र पर सवाल नहीं है?
और अगर वह आवाज़ भी अनसुनी होने लगे! तो यह चिंता स��र्फ़ पूरे देश को होनी चाहिए।
Be stand with Sonam Wangchuk
ऐसे सम्मानित व्यक्तित्व को इस स्थिति में देखकर मन व्यथित हो जाता है।🥺
लोकतंत्र की पहचान संवाद और जवाबदेही से होती है, उपेक्षा से नहीं।😳
इस्तीफा मिलने तक यही डटे रहेंगे।🤯
पहले भरोसा रहता था कि कम से कम उद्घाटन तक सड़क टिक जाएगी अब तो बनते-बनते ही सेफ्टी वॉल टूटने लगी है।
करोड़ों रुपये के प्रोजेक्ट ,लेकिन पहली ही बारिश में निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो जाते हैं। और सबसे दुख की बात यह है कि इन सवालों से न ठेकेदारों को कोई फर्क पड़ता है, न जिम्मेदार अधिकारियों को और न ही नेताओं को।
ठेकेदार बच जाएगा, फाइलों पर हस्��ाक्षर करने वाले अधिकारी बच जाएंगे, और बचाव में कोई न कोई नेता यह कह देगा कि सड़कें बनती हैं तो टूटती भी हैं
अगर करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी पहली बारिश नहीं झेल पा रहा, तो जवाबदेही किसकी तय होगी?
टैक्स जनता देती है, जोखिम भी जनता उठाती है... फिर जवाबदेही से हर बार बच कौन जाता है?
मैं 10-12 साल से कार चला रहा हूँ और पहली बार करीब एक महीने पहले ऐसा हुआ कि मेरी कार अचानक बंद हो गई। कोई नोटिफिकेशन भी नहीं आया, जबकि बात-बात पर नोटिफिकेशन देने वाली XC90 Car बस अचानक बंद हो गई।सर्विस सेंटर फोन किया तो उन्होंने कहा कि आजकल ऐसे इश्यू आ रहे हैं। आप 30 मिनट रुक जाइए, उसके बाद धीरे-धीरे सेंटर ले आइए। वैसा ही हुआ... 30 मिनट बाद स्टार्ट हो गई और सेंटर आ गई।वहाँ उन्होंने कहा कि इंजन में कुछ इश्यू है। हमने पूछा क्यों हुआ, तो बोले कि शायद खराब पेट्रोल डल गया होगा, क्योंकि कार 36 जगह जाती है, कहीं भी डल गया होगा।अब मैं सोच रहा हूँ... माइलेज तो कम हुआ है, इसमें कोई दो राय नहीं, लेकिन उतना हम लोग नोटिस भी नहीं करते। मगर सोचिए... अगर इतनी अच्छी, सबसे सुरक्षित कही जाने वाली कारों के इंजन पर भी खतरा आ सकता है, तो भविष्य में हमारे पूरे ट्रांसपोर्ट सिस्टम का क्या होगा?गडकरी जी की गलती हो या पेट्रोलियम मंत्रालय की... लेकिन अगर ईंध�� की क्वालिटी या नई फ्यूल पॉलिसी की वजह से लोगों को इंजन का नुकसान, कम माइलेज और लाखों की गाड़ी पर अतिरिक्त खर्च उठाना पड़े, तो इसका जवाब कौन देगा? आखिर आम लोगों की गाड़ियों पर ये कैसा प्रयोग हो रहा है?
राजस्थान में फिर परीक्षा में धांधलेबाजी !
युवाओं के साथ सबसे बड़ा अन्याय यही है कि उनके भविष्य को वही लोग बेच रहे हैं, जिन्हें उसकी रक्षा की जिम्मेदारी दी गई थी।
आज शिक्षा व्यवस्था कई लोगों के लिए कमाई का धंधा बन चुकी है।
पेपर लीक और भ्रष्टाचार ने व्यवस्था को खोखला कर दिया है। हालात ऐसे हैं कि जिसे चौकीदारी सौंपी गई, वही चोरी करवाने लगा।
जब व्यवस्था के रखवाले ही भ्रष्ट हो जाएं, तो ईमानदार छात्रों को न्याय कौन दिलाएगा?
This brother's condition is very critical. He has been on a hunger strike for the past 7 days, yet the government seems to have little concern for the youth of this country.
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