सांसद हनुमान बेनीवाल बोलने से नहीं रुके तो मंच छोड़कर रवाना हुए विधायक जगत सिंह
भरतपुर में नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल मंच से CM भजनलाल शर्मा के खिलाफ बोलने लगे तो नदबई विधायक जगत सिंह नाराज हो गए और मंच छोड़कर चले गए।
विधायक सांसद बेनीवाल को रोकने के लिए खड़े भी हुए, उनसे हाथ मिलाया। बेनीवाल फिर भी नहीं रुके तो MLA जगत सिंह ने गर्दन हिलाकर मना किया और मंच से उतरकर चले गए।
भरतपुर के नुमाइश मैदान में सांसद बेनीवाल आरक्षण रैली को संबोधित कर रहे थे। सांसद बेनीवाल ने कहा कि "आज की रैली के बाद यह तय है कि राजस्थान में बड़ा बदलाव होगा।"
भरतपुर में आयोजन #जाट_आरक्षण_हुंकार_महारैली में हनुमान बेनीवाल ने किरोडीलाल मीणा के लिए सहानुभूति दिखाई.. 🫡
लेकिन फिर दोहराया मुर्खाधिराज.. 🤗
आज की#भरतपुर चलों रैली का सार.. 👇
लखनऊ में एक कोचिंग सेंटर में भीषण आग लगने से कई लोगों की मृत्यु का समाचार अत्यंत दुःखद एवं हृदयविदारक है।
मैं ईश्वर से प्रार्थना करता हूँ कि दिवंगत आत्माओं को शांति प्रदान करें तथा शोकाकुल परिवारों को इस दुःख को सहन करने की शक्ति दें।
इस घटना में घायल हुए सभी व्यक्तियों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की प्रार्थना करता हूँ।
भरतपुर, डीग और धौलपुर के जाट समाज को केंद्र में OBC आरक्षण का लाभ दिलवाने के लिए आज भरतपुर में आयोजित जाट आरक्षण हुंकार महारैली में मैंने कहा कि आज हम किसी के खिलाफ नहीं, बल्कि अपने संवैधानिक अधिकारों और न्यायपूर्ण हिस्सेदारी की मांग को लेकर यहां एकत्रित हुए हैं। भरतपुर की धरती केवल राजस्थान की नहीं, बल्कि पूरे भारत के इतिहास में स्वाभिमान, शौर्य और संघर्ष की पहचान रही है।
लोहागढ़ फोर्ट का इतिहास दुनिया जानती है, विभिन्न आक्रांताओं ने कई बार इस किले को जीतने का प्रयास किया, लेकिन लोहागढ़ अजेय रहा। यह केवल एक किला नहीं, बल्कि जाट समाज की अस्मिता, साहस और आत्मसम्मान का प्रतीक है। भरतपुर, डीग और धौलपुर जिले का जाट समाज सामाजिक और शैक्षणिक पिछड़ेपन के आधार पर केंद्र की ओबीसी सूची में शामिल किए जाने की मांग वर्षों से करता आया है। यह मांग संविधान के दायरे में है, लोकतांत्रिक है और न्यायसंगत है इसलिए केंद्र सरकार को जल्द से जल्द यहां के जाटों को आरक्षण देना चाहिए |
@RLPINDIAorg
भाजपा द्वारा लगातार सांसदों की खरीद-फरोख्त करना सीधे तौर पर जनमत को एक खुली चुनौती है। भाजपा ने 2024 के लोकसभा चुनावों में जनता से '400 पार' सीटें जिताने का आह्वान किया था, लेकिन देश की सजग जनता ने उन्हें बहुमत से दूर केवल 240 सीटों पर ही समेट दिया।
आज केंद्र में एनडीए (NDA) गठबंधन की सरकार चल रही है, जिसमें फिलहाल कोई खींचतान भी नज़र नहीं आती। इसके बावजूद तृणमूल कांग्रेस, शिवसेना और बीजेडी (BJD) जैसे दलों के सांसदों को तोड़कर भाजपा और एनडीए में शामिल करना यह साफ़ दिखाता है कि भाजपा धनबल और बाहुबल के आगे जनता के जनादेश को कुछ नहीं समझती।
पहले तोड़-फोड़ का यह खेल केवल गुजरात तक सीमित था, जहाँ पूर्ण बहुमत की स्थिर सरकार होने के बावजूद भाजपा पाँच साल तक लगातार विपक्षी विधायकों को तोड़ती रहती थी। अब यही तथाकथित 'गुजरात मॉडल' पूरे देश में लागू कर दिया गया है।
देश की जनता को सत्ता के इस खतरनाक खेल को गहराई से समझना होगा। मतदाताओं को न सिर्फ भाजपा से, बल्कि अब पाला बदलकर एनडीए में जा रहे उन सांसदों से भी कड़े सवाल पूछने चाहिए कि जब जनता ने उन्हें पाँच साल के लिए एनडीए की नीतियों के खिलाफ वोट देकर जिताया था, तो वे अब किस मुंह से एनडीए की गोद में जाकर बैठ गए?
विशेषकर देश की युवा पीढ़ी को सोचना होगा कि आखिर इस देश में हो क्या रहा है? आज महँगाई, बेरोज़गारी, भ्रष्टाचार और पेपर लीक जैसे आमजन से जुड़े संवेदनशील मुद्दों पर सरकार का कोई ध्यान नहीं है, लेकिन पर्दे के पीछे सांसदों की अनैतिक खरीद-फरोख्त लगातार जारी है। क्या यह सरकार विपक्ष और विरोध की हर लोकतांत्रिक आवाज़ को पूरी तरह कुचल देना चाहती है? क्या भारत का महान लोकतंत्र अब दम तोड़ने की कगार पर है?
श्री @RahulGandhi लगातार संसद के अंदर और बाहर संविधान की बात उठा रहे हैं। बार-बार राहुल जी देशवासियों से आह्वान कर रहे हैं कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए आगे आएं। युवाओं को इस पर गंभीरता से विचार करना चाहिए और हर दल की विचारधारा व उसकी नीतियों को समझकर देश की राजनीति में सक्रिय भागीदारी निभानी चाहिए।
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रीट पात्रता का एग्जाम बहुत ही जल्द करवाया जायेगा...💯
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@arvindchotia ये भी सच्चाई है प्राइवेट हॉस्पिटल वाले बिल बनाने के लिए लूटने के लिए ऑपरेशन करके ही डिलीवरी करते हैं। भले ही सब कुछ नॉर्मल हो
ऑपरेशन का मोटा पैसा मिलता है। नॉर्मल डिलवरी में नाम मात्र का मिलता है
100% सही बात है मंत्री जी की
लेकिन आजकल के माहौल में यह विवादित बयान की श्रेणी में ही आएगी। नहीं आएगी तो जबरन ले आया जाएगा। आप सरकारी और निजी अस्पतालों के आंकड़े उठाकर देख लीजिए। सरकारी अस्पतालों में आने वाली महिलाओं के फिर भी एक हद तक नॉर्मल डिलीवरी करवाई जाती है लेकिन निजी अस्पतालों में सिजेरियन डिलीवरी का प्रतिशत बहुत ऊंचा है।
दर्द सहन नहीं करने के अलावा सिजेरियन डिलीवरी के पीछे आर्थिक पहलू भी होते हैं। निजी अस्पतालों में लंबे बल बनाने के लिए भी सिजेरियन डिलीवरी प्राथमिकता पर की जाती है। कुछ सिजेरियन डिलीवरी मुहूर्त के हिसाब से भी तय की जाती है। लेकिन आप किसी भी महिला विशेषज्ञ चिकित्सक (किसी भी पैथी की) से पूछ लीजिए, सिजेरियन डिलीवरी महिलाओं की सेहत के लिए हर हाल में घातक ही बताई जाएगी।
सिजेरियन डिलीवरी में जो प्रसव पीड़ा है, वह जरूर कम हो जाती है लेकिन उसके बाद जीवन भर अनेक समस्याएं बनी रहती हैं। मंत्री जी के अनेक बयान विवादित और गैर जरूरी होते हैं। लेकिन यह बात बहुत सही है। जरूरी यह है कि महिलाओं को नॉर्मल डिलीवरी के लिए कैसे प्रेरित किया जाए और अस्पतालों को ज्यादा से ज्यादा नॉर्मल डिलीवरी करवाने के लिए कैसे तैयार किया जाए, इसकी कार्य योजना बनाई जानी चाहिए।
जब मैने #जाट_आरक्षण की मांग को लोकसभा मे उठाना चाहा तो #स्पीकर_महोदय ने मुझे इस मुद्दे पर बोलने से मना कर दिया था मगर फिर भी मैने 2-2 बार जाट आरक्षण के मुद्दे को संसद मे उठाया
- संजना जाटव (सांसद)
पत्रकार का सवाल: सरकार द्वारा पंचायती राज और स्थानीय निकाय चुनाव न करवाए जाने तथा बजट में कटौती किए जाने को लेकर आपका क्या कहना है?
जवाब: देखिए, इस कदम की तो पूरे प्रदेशवासियों को एक सुर में निंदा (Condemn) करनी चाहिए, क्योंकि संविधान के दायरे में समय पर चुनाव कराना बेहद आवश्यक है। साल 1998 में जब मैं मुख्यमंत्री था, तब कर्मचारियों की हड़ताल (Strike) हो गई थी। मैंने भी तब कोशिश की थी कि चुनाव कुछ समय के लिए टल जाएँ, क्योंकि कर्मचारियों की हड़ताल के बीच चुनाव कराना मुश्किल था। लेकिन हाई कोर्ट का स्पष्ट आदेश आ गया कि 'नहीं, चुनाव तो आपको करवाने ही पड़ेंगे, चाहे जैसे भी करवाओ।' हमने न्यायपालिका के आदेश का सम्मान किया और अन्य अधिकारियों-कर्मचारियों के सहयोग से चुनाव संपन्न करवाए, और हम चुनाव जीत भी गए।
आज की सरकार को यह चिंता सता रही है कि वे नगर निकायों और पंचायतों के चुनावों में पूरी तरह साफ़ हो जाएँगे। इसी हार के डर से, हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बावजूद ये चुनाव नहीं करवा रहे हैं। जब आप संविधान की आज्ञा और मर्यादा को ही नहीं मानते, तो आपको सत्ता में रहने का कोई अधिकार नहीं है। यह सरकार नैतिक रूप से बर्खास्त करने लायक है।
अब यह बात अलग है कि देश का माहौल ऐसा है, केंद्र में भी इन्हीं की सरकार है और 'डबल इंजन सरकार' का नारा दे रखा है, तो इन्हें बर्खास्त कौन करे? वरना कायदे की बात तो यह है कि राज्यपाल महोदय को राष्ट्रपति जी के पास सिफ़ारिश (Recommendation) भेजनी चाहिए कि 'यह सरकार समय पर चुनाव नहीं करवा रही है, इसलिए इसे तुरंत बर्खास्त किया जाए।' लेकिन आज देश के हालात बहुत गंभीर हैं और लोकतंत्र सीधे खतरे में है।
हमने बंगाल और बिहार में देखा है कि वहाँ क्या-क्या नहीं हुआ। हम लगातार यह बात बोल रहे हैं कि देश बेहद नाजुक दौर से गुज़र रहा है। अगर लोकतंत्र ही नहीं बचेगा, तो हमारी वर्तमान और आने वाली युवा पीढ़ी का क्या होगा? इतिहास किसी को माफ़ नहीं करेगा। इसीलिए मैंने युवाओं का आह्वान किया है कि छात्रों और नौजवानों को राजनीति में आगे आना चाहिए। वे सभी राजनीतिक दलों की विचारधारा को समझें, और फिर जहाँ उन्हें सही लगे उस पार्टी से जुड़ें, लेकिन राजनीति में हिस्सेदारी ज़रूर बढ़ाएँ; वरना यह देश बर्बादी की कगार पर चला जाएगा। आज जो लोग सत्ता में बैठे हैं, वे लोकतंत्र को पूरी तरह कमज़ोर करने में लगे हैं।
स्थिति यह हो गई है कि आप शांतिपूर्ण धरना भी दे दें, तो आपके ख़िलाफ़ मुक़दमा दर्ज कर दिया जाता है और ज़मानत तक नहीं होती। अभी हाल ही में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जहाँ लोगों को सीधे कोर्ट में पेश करके न्यायिक हिरासत (J.C.) में भेज दिया गया। यानी अगर कोई धरना दे, प्रदर्शन करे या सरकार की नीतियों की आलोचना करे, तो उसे सीधे गिरफ़्तार कर जेल भेज दिया जाता है, तुरंत एफ़आईआर दर्ज हो जाती है। यह कैसा तरीका है? आज पूरे हिंदुस्तान में न जाने कितने लोग इस तरह जेलों में बंद हैं। अगर केंद्र सरकार में ज़रा भी साहस है, तो वह देश को आंकड़े जुटाकर बताए कि उन्होंने आलोचना करने के जुर्म में कितने लोगों को जेलों में डाल रखा है।
कांग्रेस पार्टी के लिए अभी कुछ कहना ठीक नहीं है उन्हें पसंद नहीं आएगा पर हम साथ चुनाव लड़ेंगे।
जिस हिसाब से तैयारी होनी चाहिए उनकी वह तैयारी नहीं है
- अखिलेश यादव
अध्यापक भर्ती 2026 में 5 प्रश्नों को लेकर चर्चा करूंगा
डिलीट होने चाहिए या नहीं
क्या खामी है
बोर्ड द्वारा डिलीट किए गए 11 प्रश्नों में से 7 प्रश्नों पर चर्चा कर चुका हूं।
आज 5 अन्य प्रशन है जो बोर्ड ने डिलीट किया ओर न उत्तर बदला यानि छात्रों की आपत्तियों को स्वीकार नहीं किया
RSS की असलियत बताता ये वीडियो पोस्ट करना अगर अपराध है, तो कांग्रेस का हर कार्यकर्ता बार-बार ये अपराध करेगा।
नफ़रत और विभाजन के मुकाबले खेल और देश निर्माण की बात करना अगर अपराध है, तो ये अपराध हम बार-बार करेंगे।
मंडावा के नवीन को झुंझुनूं पुलिस ने इस वीडियो के लिए गिरफ्तार कर उसका मोबाइल तक अपने कब्जे में ले लिया गया। नवीन के वीडियो में एक तरफ RSS की शाखा दिखाई दे रही है, और दूसरी तरफ मैदान में पसीना बहाते बच्चे, जो खेल और मेहनत के जरिए देश का भविष्य गढ़ रहे हैं.. तो ऐसा क्या कसूर कर दिया नवीन ने?
गिरफ्तारी करके मोबाइल जब्त किए जा सकते हैं, लेकिन आवाज़ नहीं दबाई जा सकती। सच बोलना अपराध नहीं, लोकतंत्र का अधिकार है।
सरकार अविलंब नवीन को रिहा करें।
@RajCMO@PoliceRajasthan@JhunjhunuPolice