@ShubhamShuklaMP अगर ब्राह्मण मारते तो दबंग कहलाते। यादवों ने मारा तो दरिंदा कहलाये। वाह क्या बात है। बहुजन जवाब देना और लड़ना सीख गया। हिंसा का एक ही जवाब है सिर्फ़ हिंसा। यही जवाब मिलेगा कोई किसी भी जात का हो।
@ShubhamShuklaMP शुक्ला जी,ऐ तो हर आम घरों में मिलने वाली चीजें हैं, हथियार तो नहीं हैं, जिस यादव की हत्या कर दी गई है, क्या उसके पक्ष में आपने कभी लिखा?सभी के साथ न्याय होना चाहिए, मैं किसी का भी पक्ष नहीं ले रहा हूं, न्याय की बात होना चाहिये।
@ShubhamShuklaMP सत्य प्रकाश दुबे ने एक अकेले यादव को मार गिराया। लेकिन वो समय भी आया जब इसभी को चादर में भरकर ले जाना पड़ा।
आखिर ये नौबत क्यों आई ? क्या प्रेम यादव की जान की कोई कीमत न थी ?अकेले प्रेम यादव को घेरकर मार दिया क्या ये न्याय था ?
निष्कर्ष - जैसा करोगे वैसा भरोगे गीता में लिखा है
@TweetAbhishekA @Hemrajmeena123 चाय बेच कर PM बना जा सकता
और चाय बेचकर चाटुकार भी बन सकते है
चाय बेचकर समाज को पाखण्डवाद का ज्ञान भी दिया जा सकता है
पर रबिश कुमार पांडेय जी जैसे बनने के लिये सामंतवादी बिचार धारा तोड़कर उसके लिये ज्ञान और बाबा साहब आंबेडकर संबिधान अध्यन की जरूरत है
जय हिंद वन्दे मातरम
@Sudhir_mish कुछ जाति विशेष वर्ग के लोग आज भी खुले घूम रहे है पर किसी की निगाह नही जाती है उन क्योकि आका आर्शीवाद प्राप्त है
पहले जर्नलिस्ट का कोई धर्म नही होता था ना कोई पार्टी की चाटूकारिता पर आज सब हो रहा है
जर्नलिस्ट की परिभाषा अगर किसी को पता हो तो जरूर बताना
उप्र परिवहन से निलंबन के सदमे के कारण आत्महत्या करने पर मजबूर हुए स्व. मोहित यादव के परिजनों से मिलकर उनका दुख बाँटा और हर हालात में उनके साथ खड़े रहने व हर तरह से मदद करने का सच्चा आश्वासन दिया।
इस बारे में बस इतना और कहना है कि भाजपा के नेता, उसके कार्यकर्ता, समर्थक और मतदाता इतना बताएं कि क्या ये सब जायज़ है। इतनी घृणा दिलों में रखने से भाजपाई क्या ख़ुद को बीमार नहीं कर रहे हैं। अगर किसी के दुख से भाजपाइयों को सुख मिल रहा है, तो ये आदत एक दिन भाजपाइयों को अपनों से भी दूर कर देगी।
भाजपाई बीमार न बने, समझदार बनें!
@RubikaLiyaquat इस दुनिया हर चीज बिकती बस उसका सही कीमत होनी चाहिये मीडिया भी बिकती पेड समाचार भी चलते है
देश की सेना अभी तक बची है उन्ही पर मेरा विस्वास भी है उन्ही पर गर्व