"कोई अगर कुछ दिन भूखा रह ले, तो क्या वह खुद को इतना बड़ा समझने लगे कि प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति बनने की इच्छा करने लगे? क्या केवल भूखा रहने से कोई इतना योग्य हो जाता है?"
मादरणीय @AnilYadavmedia1 आज @ajeetbharti की शैली में कॉकरोच को गरिया दिए हैं 🤪😂
@BeingArun28 स्वरा, रवीश , कन्हैया, उमर खालिद , आरफा, जिस भी आंदोलन में शामिल हुए वो आंदोलन नहीं कुछ और ही बनकर उभरा और जनता की उससे रुचि ही समाप्त हो गयी
क़ु. रान verse 4.34 मुयलमान मर्द को इजाज़त देती है कि महिला कहना ना माने तो उसे पीटो।
बहुत सी काफ़िर महिलाए अपने पुरुषों को हिजड़ा बना चुकी है, और अब मुलसिमो की “मर्दानगी” से प्रभावित होकर उन्हें चुन रही है। लेकिन वे कु. रान की इस आयत के बारे में नहीं जानती शायद।
भरत तिवारी को सरेंडर करने के बाद भी गोली मार देने को सही ठहराने वाले, आज एक अपराधी प्रवृत्ति के आदमी को 2 थप्पड़ लगाए जाने पर सुबह से रवीश रोना कर रहे हैं बचपन से जब शोषित पीड़ित और वंचितों के नाम पर आप रोते रहेंगे तो यही होगा ये सियार हैं, एक हुआं करेगा तो सब हुआं करेंगे.!😂
आधुनिकता और आधुनिकीकरण में अंतर होता है आधुनिकता एक विचार और संकल्प है जिसके तहत हम अपनी संस्कृति और सभ्यता को थाम कर चलते हैं और आधुनिकीकरण सभ्यता और संस्कृति का गला घोंटकर आगे बढ़ता है।
कौन कहता है मंदिरों में जाति पूछी जाती है.?
जाति मंदिरों में कम संविधान में ज्यादा पूछी जाती है, सरकारी नौकरियों में पूछी जाती है। राशन कार्ड, स्काॅलरशिप और हर संस्थान में पूछी जाती है।”
फिर कौन हैं जो मंदिरो पर आरोप लगाते हैं.?
यदि भारत की सड़कें सही होतीं और ट्रैफिक जाम में फ्यूल बर्बाद नहीं होता तो प्रति वर्ष 34-35 बिलियन लीटर तेल बचता यानी सरकार 420 लाख मीट्रिक टन कच्चा तेल बचा पाती।
अर्धसत्य बेचना बंद करो मंत्री जी।
कौन कहता है मंदिरों में जाति पूछी जाती है.?
जाति मंदिरों में कम संविधान में ज्यादा पूछी जाती है, सरकारी नौकरियों में पूछी जाती है। राशन कार्ड, स्काॅलरशिप और हर संस्थान में पूछी जाती है।”
फिर कौन हैं जो मंदिरो पर आरोप लगाते हैं.?
CM 'भाड़े के टट्टे' बोल रहे हैं, जबकि उचित शब्द 'टट्टू' है। और हमारे जैसे नागरिकों से 'मर्यादा' और 'कर्णप्रिय भाषा' की अपेक्षा रखी जाती है, वो बात अलग है।
आधुनिकता और आधुनिकीकरण में अंतर होता है आधुनिकता एक विचार और संकल्प है जिसके तहत हम अपनी संस्कृति और सभ्यता को थाम कर चलते हैं और आधुनिकीकरण सभ्यता और संस्कृति का गला घोंटकर आगे बढ़ता है।
"आजकल हिन्दू कहलाने वाला भारतीय समाज ही भारतवर्ष का राष्ट्रीय समाज है। स्वभाव से ही सेक्युलर भारतीय समाज पर संप्रदायवाद का लांछन लगाने वाले और सेक्युलरिज्म के नाम पर भारतवर्ष की सनातन संस्कृति से द्वेष करने वाले लोग देशद्रोही हैं।"
- सीताराम गोयल
"ब्राह्मण के 'ज्ञान-श्रम' को हेय बता, क्षत्रिय के 'शौर्य-श्रम' को कलंकित कर, वैश्य के 'वाणिज्य-श्रम' को अनैतिक और शूद्र के 'कौशल-श्रम' को दलित बताकर, सेक्युलरों द्वारा विराट #हिंदू समाज को लगातार तोड़ा जा रहा है। इनकी सोच है कि #हिंदुत्व की आस्था को हिला दो, व्यवस्था हिल जाएगी.