मेरे एक दोस्त ने सिर्फ ₹2 लाख की लागत से चिप्स का एक नया ब्रांड शुरू किया।
लेकिन बाजार में पहले से ही 100 से ज्यादा स्थानीय और राष्ट्रीय ब्रांड मौजूद थे।
इसलिए उसने लोगों की मानसिकता से खेलने के लिए 2 गजब की तरकीबें आजमाईं:
• उसने अपने 25 दोस्तों को 80 से अधिक दुकानों पर भेजा, ताकि वे वहां जाकर नाम लेकर उसके चिप्स मांगें।
• उसने कॉलेज, रेलवे स्टेशन और पार्कों के आसपास अपने चिप्स के करीब 500 खाली पैकेट बिखेर दिए।
नतीजा यह हुआ कि महज 45 दिनों के भीतर, 60 से ज्यादा दुकानदारों ने उसके ब्रांड का माल अपनी दुकानों में रखना शुरू कर दिया।
क्योंकि दुकानदारों को लगने लगा था कि बाजार में वाकई इस प्रोडक्ट की भारी मांग है।
सीख:
लोग असल में कोई सामान नहीं खरीदते।
वे उस चीज की लोकप्रियता को देखकर उसे खरीदते हैं।
On the first day of Āṣāḍha, a cloud rests upon a mountain peak, appearing like a playful elephant against a fortress wall.
One of Kālidāsa's most beautiful images, where nature becomes poetry.
#Meghadutam#Kalidasa#Monsoon#Sanskrit#Poetry#AncientWisdom
कहानी पुरानी है लेकिन अर्थ नया है। पुराने समय की बात है। एक दिन एक कवि हलवाई की दुकान पर सुबह-सुबह जलेवी खाने पहुंचे। उन्होंने एक पाव ताजा-ताजा जलेवी खरीदी और दुकान के बाहर रखी बेंच पर बैठ कर खाने लगे। इतने में एक कागा यानी कौव्वा आया और दुकान में रखे दही के वर्तन में चोंच मारी दी और थोड़ा सा दही खा लिया। यह देखकर हलवाई को गुस्सा आ गया और उसने कागा को डंडा फेंककर मारा। मार इतनी सटीक थी कि कौव्वा वहीं गिर कर मर गया। यह देखकर कवि का मन व्यथित हो उठा और वे जलेवी खाना छोड़कर चले गए।
कुछ दूर जाकर वे पानी पीने के लिए एक कुएं के पास रुके। पानी पीकर वे वहीं बैठ गए। कागा की मौत से उनका मन दुखी था। उन्होंने पास पड़े कोयले के टुकड़े से कुएं के चबूतरे पर लिखा - काग दही पर जान गंवाओ। यह लिखकर वे वहां से चले गए।
कुछ देर बाद गांव का निलंबित तहसीलदार वहां पहुंचा। कुछ देर पहले ही जमीन के कागजों में हेरफेर करने के कारण उसे निलंबित कर दिया गया था। पानी पीकर वहां बैठा तो उसकी नजर कवि की लिखी पंक्ति पर पड़ी। उसने पढ़ा -कागद ही पर जान गंवाओ। उसने सोचा जिसने भी लिखा है, सही लिखा है। कागज के कारण ही मेरा निलंबन हो गया।
कुछ देर बाद वहां प्रेम में लुटा-पिटा एक युवक पहुंचा। उसकी प्रेमिका ने अभी-अभी उसे लात मारकर भगा दिया था। वह अपनी प्रेमिका की बेवफाई से दुखी था। पानी पीकर उसकी भी नजर कवि की लिखी पंक्ति पर पड़ी। उसने पढ़ा - का गदही पर जान गंवाओ। उसने भी सोचा, कितनी सच्ची बात लिखी है किसी ने। मैं एक गदही के लिए जान दे रहा था।
इस कहानी का संदेश यह है कि आदमी अपनी मनःस्थिति के अनुसार ही हर चीज का अर्थ निकालता है। आदमी के मन में जब जैसी भावना चल रही होती है तब वह चीजों को उसी हिसाब से ग्रहण करता है। एक ही पंक्ति का अर्थ तीन लोगों ने अलग-अलग निकाला।
आपने सुना ही है कि जाकि रही भावना जैसी, प्रभु मूरत देखी तिन तैसी।✍️🙏
🚨 KUMAR SANGAKARA ON VAIBHAV SURYAVANSHI EXTRAORDINARY INNIGS AGAINST SL A 🚨
Kumar Sangakara Said 🗣️:
"I was afraid this would happen, and it did. I had already thought that today Vaibhav Suryavanshi would shine. The more you sledge Vaibhav Suryavanshi, the more he will come back in the next match and hit you even harder. That's why it's better to keep him calm. And Vaibhav Suryavanshi's most special quality is that he is a big-match player. I want him to keep playing like this and break every record."
On Maharana Pratap Jayanti, we salute the legendary warrior whose courage, sacrifice, and unwavering spirit of freedom continue to inspire generations.
🛡️ A timeless symbol of valor and pride.
प्रकृति के इस सूखे के संकेत को गंभीरता से लें, पानी की बरबादी रोकें 👇
जैसे कि इस साल जामुन की बंपर बहार
इस साल बाजार में दिख रहे हैं।
इतने जामुन मैंने पिछले दो तीन दशकों में कभी नहीं देखे।
जहां भी देखिए जामुन के पेड़ों के नीचे जामुन के ढेर लगे हैं।
जिन पेड़ों पर पिछले साल इक्का-दुक्का फल आए थे, वे पेड़ भी इस बार जामुन से लदे हुए हैं।
आखिर ऐसा क्यों हो रहा है?
हमारे बुजुर्ग हमेशा कहते थे कि.....
"जिस गर्मी में जामुन ऐसे ढेरों गिरते हैं, उस साल सूखा पड़ता है।"
बुजुर्गों का ये पारंपरिक ज्ञान वनस्पति शास्त्र के हिसाब से बिल्कुल सटीक है। विज्ञान में इस प्रक्रिया को "Masting" या "Stress Fruiting" कहते हैं।
पेड़ों के खुद को खत्म करके ज्यादा से ज्यादा फल देने के इस आखिरी प्रयास को "Suicide Fruiting" या "Bumper Crop" भी कहा जाता है।
विज्ञान इसके बारे में कहता है कि....
Survival Instinct यानी अस्तित्व की लड़ाई
जब पेड़ को जमीन के नीचे पानी की कमी महसूस होती है, तब पेड़ "Defense Mode" में चला जाता है। अपनी प्रजाति को जिंदा रखने के लिए पेड़ अपनी सारी ताकत फल बनाने में लगा देता है।
और नए पत्ते-टहनियों पर रोक लग जाती है।
ऐसे साल में पेड़ नई कोंपल निकालना बंद कर देता है।
ऊर्जा बचाकर सिर्फ जामुन का उत्पादन बढ़ाता है।
इसीलिए पिछले साल कम फल वाले पेड़ भी इस बार लदे हैं।
इस भविष्यवाणी और सूखे से रिश्ता देखें तो हमारे बड़े बूढ़ों का अनुभव सही है, क्योंकि पेड़ मौसम के बदलाव को पहले पहचान लेते हैं।
जामुन की जड़ 'Taproot' बहुत गहराई तक जाती है।
जब भूजल स्तर बहुत नीचे जाता है, तभी जड़ों को तनाव महसूस होता है।
ये तनाव ही आने वाले सूखे का संकेत है।
सीधी बात सी बात यह है कि,
जामुन का पेड़ आत्महत्या नहीं कर रहा, बल्कि खुद का बलिदान देकर अगली पीढ़ी को जन्म दे रहा है।
यहां हमारे पूर्वजों ज्ञान अनेकों पीढ़ियों का अनुभव और विज्ञान यहां एक बिंदु पर मिलते हैं।
इस साल जामुन का स्वाद लें, पर प्रकृति के इस 'सूखे' के संकेत को गंभीरता से देखें।
पानी संभलकर इस्तेमाल करें।।
पुरुष घर का मुखिया ही नहीं
पृथ्वी का हाँफता हुआ बैल भी है।
— भास्कर कविश
पुरुष को वहाँ से पढ़िए जहाँ से मौन है वो
ये हँसना और हँसाना तो हुनर है उसका !!
जब ध्यान बिखरता है तो ऊर्जा भी बिखरती है और जब ध्यान एक बिंदु पर ठहर जाता है, तो साधारण प्रयास भी असाधारण परिणाम देने लगते हैं।
- एक समय में एक लक्ष्य।
- एक दिशा।
- एक कदम।
तो सरलता से कहे कि जो व्यक्ति हर चीज़ का पीछा करता है, वह अक्सर कुछ भी नहीं कर पाता और जो एक ही चीज़ को पूरी फोकस के साथ करता है, उसके लिए बाकी रास्ते भी स्वयं खुलने लगते हैं।