@shivkant मौजूदा स्थिति ब्रिटेन जैसे उदारवादी लोकतांत्रिक देश के लिए अशुभ संकेत है। वास्तव में देश के गोरे धुर दक्षिणपंथी कट्टरवादियों के लिए जमीन तैयार हो रही है। इसका नुकसान अंततः मुस्लिमों को ही होगा। अन्य अश्वेत और भारतीय भी गोरे दक्षिणपंथियों के गुस्से के शिकार हो सकते हैं।
@airindia Excellent experience.I have been quite an old AirIndia traveller. Now I find marked improvement in all aspects, be it responsiveness, courtesy and promptness.
@shivkant ट्रंप ने अपनी नीतियों के कारण न केवल अमरीका की साख को मध्य पूर्व और सारी दुनिया में बट्टा लगाया है बल्कि सारी दुनिया को आर्थिक परेशानी में डाल दिया है। स्वच्छ ऊर्जा इस समस्या का प्रभावी हल है और भारत स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में भी काम कर रहा है। इसे और तेज करने की आवश्यकता है।
@shivkant शिक्षा व्यवस्था में सुधार अत्यंत आवश्यक है। परीक्षा व्यवस्था से जुड़ी समस्याओं का सीधा संबंध शिक्षा व्यवस्था से है। यह व्यवस्था मौलिक चिंतन के स्थान पर रट्टू तोतों को पैदा करने पर जोर देती है।
@shivkant आपका लेख दोनों देशों के बीच के मुक्त व्यापार समझौते के प्रावधानों को अत्यंत सुगम तरीके से समझाता है। आपने सही कहा है कि इस समझौते का लाभ भारतीय निर्यातक तभी ले पाएंगे जब वे गुणवत्ता के मानकों पर खरा उतरते हुए प्रतिस्पर्धात्मक मूल्यों पर अपना माल ब्रितानी बाज़ारों में उतारेंगे।
ट्रंप ने कहा अमरीका की सबसे बड़ी शक्ति सेना है।सबसे बड़ा खतरा कम्युनिज्म, आप्रवासी सबसे बड़ी समस्या और टैरिफ कूटनीतिक हथियार। अमरीका के संस्थापकों ने मुक्त व्यापार खुले आप्रवासन और दोस्ती की बात की थी जिनके बल पर अमरीका महान बना। क्या ट्रंप उलटे रास्ते चलकर उसे बचा पाएँगे? पढ़िए:
@shivkant आपने ट्रंप की सोच के अंदर के विरोधाभास को अत्यंत तर्क संगत और तथ्यपरक ढंग से उजागर किया है। ट्रंप एक खालिस व्यापारी हैं। उन्होंने अपने वोटरों की नब्ज़ पहचान कर उन्हें मूर्ख बनाया, सत्ता पर काबिज हुए और पैसे बनाने में लग गए। इनकी मानसिकता किसी अफ्रीकी देश के तानाशाह जैसी है।
@shivkant अमरीका का मौजूदा प्रशासन त्वरित लेनदेन के सिद्धांत में विश्वास रखता है। किसी दूरगामी रिश्ते में उसका विश्वास नहीं है। जैसा कि आप ने सही कहाहै, भारत को भी यही नीति अपनानी चाहिए
@shivkant आपसे पूरी तरह से सहमत हूं। ट्रंप जब पश्चिम यूरोप और कनाडा के नहीं हुए तब हमारे कहां से होंगे। आज कल तो ट्रंप त्वरित लेनदेन की नीति पर हैं। किसी दूरगामी रिश्ते की गुंजाईश वैसे भी नहीं है।
@shivkant सत्ता में लंबे समय तक बने रहने के बाद अब लंबे समय से सत्ता से बाहर रहना पड़ रहा है। अब स्थिति यह आ गई है कि एक एक दिन भारी पड़ रहा है। ऐसे में बेचैनी और मानसिक असंतुलन स्वाभाविक है। सही गलत की परवाह समाप्त हो रही है। सत्ता में वापसी चाहे जिस सही गलत तरीके से हो फर्क नहीं पड़ता।
@shivkant आपने अत्यंत सरल भाषा में एक गूढ़ और तकनीकी विषय को समझाया है। यह आम पाठकों को मौजूदा घटनाक्रम को बेहतर समझने के लिए संदर्भ और दृष्टि प्रदान करती है।