हम आखिर कैसी दुनिया में जी रहे हैं, जहाँ इंसान की हैसियत उसके काम से तय होने लगी है, उसके इंसान होने से नहीं?
जो लोग हमारी सुविधाओं के लिए दिन-रात मेहनत करते हैं, हमारे घर के दरवाज़े तक सामान पहुँचाते हैं, क्या हम उनके साथ थोड़ा सम्मान से पेश नहीं आ सकते? क्या सिर्फ इसलिए कि कोई हमें सामान पहुँचाता है, हम उसे अपने से छोटा समझने लगें? हम क्यों भूल जाते हैं कि उसके पास भी दिल है, आत्मसम्मान है, सपने हैं और एक पूरी ज़िंदगी है।
दिल्ली के कल्याणपुरी में Flipkart Minutes में काम करने वाले इस नौजवान का वीडियो देखकर मैं अपने आँसू नहीं रोक पाई। मैं इस लड़के को नहीं जानती, लेकिन उसके शब्दों में जो दर्द है, उसे महसूस कर पा रही हूँ। उसके एक-एक शब्द दिल को भीतर तक तोड़ देते हैं।
काश, उस वक़्त कोई उसके पास होता। काश, कोई उसके हाथ से ज़हर छीनकर फेंक देता। काश, कोई उसे गले लगाकर कह देता कि तुम्हारी ज़िंदगी किसी के अपमान से कहीं ज़्यादा क़ीमती है। काश, उसे उस पल यह एहसास करा पाता कि दुनिया में कुछ लोग भले ही तुम्हारी मेहनत की क़द्र न करें, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि तुम्हारी कोई क़ीमत नहीं।
वह भी तो हमारी तरह अपनी मेहनत से ज़िंदगी जीना चाहता था। अपने सपने पूरे करना चाहता था। किसी पर बोझ बने बिना अपने पैरों पर खड़ा होना चाहता था। लेकिन जब रोज़मर्रा के व्यवहार में किसी इंसान को बार-बार उसकी हैसियत का एहसास कराया जाता है, तो हम यह क्यों भूल जाते हैं कि शब्द भी ज़ख़्म देते हैं और अपमान भी इंसान को भीतर से तोड़ सकता है?
हम अक्सर कहते हैं कि ज़माना बदल गया है, लोग संवेदनहीन हो गए हैं। लेकिन बदलाव की शुरुआत दूसरों से नहीं, हमसे होनी चाहिए। अगली बार जब कोई डिलीवरी पार्टनर आपके दरवाज़े पर आए, तो उससे ऐसे बात कीजिए जैसे आप अपने किसी परिचित से करते हैं। एक धन्यवाद, एक मुस्कान और थोड़ी-सी इज़्ज़त देने में हमारा कुछ नहीं जाता, लेकिन सामने वाले के लिए उसका बहुत बड़ा मतलब हो सकता है।
काश, हम किसी इंसान की ख़ामोशी के पीछे छिपा दर्द, उसके टूट जाने से पहले समझ पाते। काश, हम उस समाज का हिस्सा बन पाते जहाँ किसी को अपनी ग़रीबी, अपने काम या अपनी हैसियत की वजह से अपमान न सहना पड़े।
उस नौजवान के लिए दिल रो रहा है। और उससे भी ज़्यादा तकलीफ़ इस बात की है कि हम इंसान होकर भी एक-दूसरे के प्रति इतने बेरहम कैसे हो गए?
किसी के काम को छोटा मत समझिए। मेहनत करने वाला कोई इंसान छोटा नहीं होता। छोटा हमारा नज़रिया हो सकता है।
अल्लाह उस नौजवान पर रहम करे और उसके परिवार को यह दुःख सहने की ताक़त दे। आमीन।
@DelhiPolice से मां बाप न्याय की गुहार लगा रहे है , कम से कम उनकी सुन लीजिये Delhi Police। इस लड़के की फ़रियाद तो आपलोगों ने नहीं सुनी, सुन ली होती तो शायद जिंदा होता ...
#LBSHospital #Delhipolice
@pranaydub Mujhe bhi Darr laga tha aise first time , but second time mai apne dost ko le gya aur mai cameraman bann gya . Phir dost ki lanka lagwa di 🤣🤣🤣
@PechuLaaL You’ve had reservations since independence, yet why do you still feel oppressed? Why are Brahmins still considered upper caste? Perhaps the answer lies in mindset and self-awareness.
Abhi and Niyu, the so-called “highly intellectual” couple, got called out by Dhruv Rathee for allegedly spreading misleading information about Indians—again.
सुबह के 4 बजे। जब दुनिया सो रही थी, तब अंकिता भंडारी के माता-पिता को हिरासत में ले लिया गया।
उनका गुनाह? वे इंडिया गेट पर चुपचाप बैठे थे - बोझिल कंधों के साथ, बिना किसी हंगामे के और सिर्फ़ इतना माँग रहे थे कि CBI जाँच पूरी होने तक दुष्यंत गौतम को सिक्किम का राज्यपाल न बनाया जाए।
कल मैं और प्रियंका इन माता-पिता से मिले थे।
जिस जाँच का नतीजा आया नहीं, उसके पहले ही नियुक्ति की जल्दी और सवाल पूछने वाले माँ-बाप को रात के अंधेरे में उठा लिया गया।
इस सरकार की पहचान यही है: पीड़ितों की आवाज़ दबा दो, सवाल करने वालों को हटा दो।
पर न्याय की लड़ाई न दबेगी, न रुकेगी।
कांग्रेस अंकिता भंडारी के परिवार के साथ खड़ी है, और खड़ी रहेगी - जब तक उन्हें न्याय नहीं मिलता।
#JusticeForAnkitaBhandari