OBC को आंकड़ों का खेल नहीं, हिस्सेदारी चाहिए, आपस में लड़ाने की राजनीति बंद कीजिए।
13 महीने बाद ओबीसी आयोग की रिपोर्ट आई, लेकिन आज किसी को कुछ नहीं पता इसमें क्या है। अखबारों में रोज़ OBC के जातिवार संख्या के आंकड़े छप रहे हैं।
सवाल है, अगर ये जातिगत आंकड़े हैं, तो फिर भाजपा सरकार रिपोर्ट सार्वजनिक क्यों नहीं कर रही? OBC की आबादी कितनी है और आबादी के अनुपात में उनका आरक्षण 21% ही रहेगा या बढ़ेगा? सरकार इस पर चुप क्यों हैं? अगर OBC की आबादी 55% है तो फिर 50% आरक्षण की सीमा पर सरकार अपना रुख स्पष्ट क्यों नहीं करती? OBC को उसकी आबादी और भागीदारी के अ��ुपात में हक क्यों नहीं है?
जिन निर्दलीय विधायकों के हिस्से की विधायकी…
भाजपा के ज़मानत ज़ब्ती वाले नेता जी रहे हैं…
उन्हें डोटासरा जी से सीखना चाहिए…
अपना हक़ कैसे छीना जाता है…
क्योंकि माँगने से यहाँ सिर्फ़ धक्के मिलते हैं…!!!
हर साल असम में बाढ़ आती है, सरकार और भारत के लोग लगभग असम के लोगों की इस पीड़ा को इग्नोर ही करते हैं।
छात्र नेता निर्मल चौधरी राजस्थान से असम पहुंचे हैं और वहां क�� बाढ़ पीड़ित लोगों की मदद कर रहे हैं।
देखकर अच्छा लगा कि "रील वाले नेता" के आरोप झेल रहे लड़के ने रील से आगे बढ़कर असम के लोगों की मदद कर उत्तर भारत के लोगों में नॉर्थ ईस्ट की मदद करने के लिए प्रेरणा, जागृति का काम किया है और सवाल उठाने वाले लोगों की नीयत पर सवाल उठा दिए हैं।