@Jeevanl14086361@AMIT_GUJJU @Paprikaashh Bhai Highlights se world cup nhi jeetey jaate, World cup jeentney ke liye worldcup me hi perform krna pdta hai.
@JainManthan20 "स्याद्वादो वर्ततेऽस्मिन, पक्षपातो न विद्यते।
नासत्यन्य पीडनं किञ्चित् जैनधर्म: स उच्यते ।।"
Source: Anekantavada
Please Read this slowly and carefully... Tolerance and Ahimsa is the root of Jain philosophy. When we talk about Ahimsa it contains the Bhav Ahimsa too. PEACE 🕊️
@Brocode786 धन्यवाद मेरी आंखे खोलने के लिए। मैं दिगंबर श्रावक होने के नाते शर्मिंदा हूं और मैने मान भी लिया कि मैं मिथ्यात्वी हूं। मैं आपको अर्थात आप जो सम्यक दृष्टि जीव है उनको प्रणाम करता हूं और आशा करता हूं कि आप संपूर्ण जगत का कल्याण करेंगे। जय जिनेन्द्र 💕 उत्तम क्षमा
@bhushanvshah ठीक है जैसा आपको उचित लगे करिए, बस धर्म प्रभावना होती रहनी चाहिए। 🙏💕 बाकी दिगंबर श्वेतांबर का झगड़ा बड़े बड़े साधु भगवन नहीं सुलझा पाए तो इस बारे में सोचना भी हमारे लिए नामुमकिन है। जय जिनेन्द्र। Peace out
@bhushanvshah@TanviSolanki_ महोदय, जो विनायक जी कर रहे है वो ये देवी जी भी कर रहे है, इसलिए मैने देवी जी का अकाउंट mention किया है। मैने सोचा कि आपने अब सफाई का बीड़ा ��ठाया है तो कृपया इस तथ्य पर भी गौर फरमाए।
@OneAbhishekJain भाई तुम्हारे लिए सिर्फ एक ही बात बोलूंगा, दुनिया चुनौतियों से नहीं चू$यों से परेशान ��ै। तुम अपना ये ज्ञान गलती से vegans के सामने मत पेल देना पेल दिए जाओगे। परमात्मा तुमको सद्बुद्धि दे और अपनी शरण में ले या ना ले कोई फर्क नहीं पड़ता।
यहां हम आलू प्याज तक के त्याग करके बैठे है, और मैडम अपनी ही अलग दुनिया में जी रही है। खैर इनके लिए एक शेर लिखा है,
"बड़ी फुरसत से उन्होंने ये इल्ज़ाम लगाया है,
लगता है मोहतरमा ने आज फिर महुआ फरमाया है।"
@MahuaMoitra जी हम ही आपको माफ करते है। #ApologizeMoitra
(राजस्थानी महुआ)
@trackonindia Trackon You are such a useless delivery company In the world and your employees are more messy than you. They don't even pick the call. Shut down your company and sell vada pav instead. Where is my consignment- 620219476898 Shame on you, No follow-ups, no text messages.
@S1_Kumar_Amit @TanviSolanki_ एकेंद्रीय (त्रस कायिक) जीव की हिंसा का दोष नगण्य है क्योंकि यह मनुष्य को जीवित रखते है और साथ ही यह मनुष्य को कर्म करते रहने के लिए जीवनदायिनी पोषक तत्व है। त्रस जीव की हिंसा हो रही है इसलिए शास्त्र में सद्कर्म की आज्ञा है । (त्रस- सुक्ष्मदर्शी यंत्र द्वारा दिखाई देने वाले जीव।)
@anamikaa_143@TanviSolanki_ देवी जी, शास्त्रों में जीव को कई भागों में विभक्त किया गया है, जो आपके समझ से बाहर है, एकेंद्रीय से लेकर सैनी पंचेंद्रीय तक, जिनेन्द्र देव और शास्त्र की आज्ञा ��नुसार त्रस जीवों (एकेंद्रिय) की हिंसा केवल शरीर को ऊर्जा देने के लिए मान्य है। (वे जीव जो आप सूक्ष्मदर्शी से देखते है)
हे जीव ! तू अनंत बार 84 लाख योनियों में भटकता आया है यदि इस मनुष्य पर्याय में सम्यग्दर्शन तुझे प्राप्त नहीं हुआ तो तेरा मनुष्य जन्म व्यर्थ है समझ ले कि फिर यह मनुष्य भव मिलना उतना ही मुश्किल है जितना विशाल समुद्र में से एक रत्न ढूँढना
इसलिए हे भव्यजीव अब तो मोक्ष का पुरूषार्थ कर