@praveeng_007 दुर्भागे का स्रोत संस्कृत का ‘दुर्भग’ है, जिसका अर्थ अभागा या दुर्भाग्यशाली होता है। शब्द आज कम प्रचलित है, पर गलत नहीं। निर्मल वर्मा का प्रयोग साहित्यिक और भाषिक रूप से बचाव योग्य है। निर्मल वर्मा ने यहाँ इसे जानबूझकर एक साहित्यिक और संस्कृतनिष्ठ अर्थ-छाया के लिए चुना है।
मैं अक्सर सोचता हूँ कि वे शहर कितने दुर्भागे हैं, जिनके अपने कोई खँडहर नहीं। उनमें रहना उतना ही भयानक अनुभव हो सकता है, जैसे किसी ऐसे व्यक्ति से मिलना, जो अपनी स्मृति खो चुका है, जिसका कोई अतीत नहीं।
( निर्मल वर्मा )
जीस्त के वे दोनों टुकड़े जिन्हें धूप-छाँव कहा जाता है, दिन में बारी बारी एक ऊंचे, क़द्दावर पहाड़ के नीचे से यूँ गुज़रते हैं कि धूप में छाँव का और छाँव में धूप का भरम होने लगता है।
―अनघ शर्मा
अपने कमरे का दरवाजा बंद कर हमने सारी दुनिया को बाहर बंद कर दिया। सारी दुनिया हमारे कैद में है। अपने दरवाजे को खोलकर हम दुनिया के कमरे में जाते हैं। जितनी बड़ी दुनिया है उतना बड़ा उसका कमरा है।
विनोद कुमार शुक्ल