आज गुनहगार 'ज्ञानेश कुमार' हैं लेकिन अग्नि परीक्षा सुप्रीम कोर्ट और चीफ जस्टिस सूर्यकांत की भी है
जो चुनाव आयोग के हर दावे को अब तक आँख मूँद कर मानते रहे हैं : गुरदीप सिंह सप्पल, कांग्रेस
'SIR वाले राज्यों में फिर हों चुनाव, ज्ञानेश कुमार को अरेस्ट किया जाए', EC विवाद पर ममता की मांग
एक मीडिया रिपोर्ट को लेकर उपजे विवाद के बाद ममता बनर्जी और उद्धव ठाकरे ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की है. उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में हुए चुनावों को रद्द कर फिर से बैलेट पेपर के इस्तेमाल से दोबारा चुनाव कराने की भी मांग की है.
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बीजेपी सांसद संबित पात्रा के बयान पर कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने तंज कसते हुए हमला बोला। संबित पात्रा ने कहा था कि चुनाव में धांधली और घोटालों का जन्म कांग्रेस से ही हुआ है। इस पर पवन खेड़ा ने सवाल उठाया, “आप पार्टी हैं या ब्रोकर? आरोप चुनाव आयोग पर है, सफाई देने भाजपा आ गई!”
ज्ञानेश कुमार को अभी सस्पेंड करो, SIR पर रोक लगाओ, बिहार बंगाल के चुनाव रद्द करो, किसके आदेश पर ज्ञानेश ये कर रहे थे उसपर भी FIR हो:- कपिल सिब्बल , सुप्रीम कोर्ट वकील
सिर्फ भारत ही नहीं पूरे विश्व में इस रिपोर्ट की चर्चा है कि भारत में चुनाव निष्पक्ष हो रहे हैं या नहीं ?
कमाल कर दिया इंडियन एक्सप्रेस की पत्रकार रितिका ने और जबरदस्त काम किया सौरभ भाई आपने।
न्यूज 24 से दबाव में इस्तीफा देने वाली ईमानदार पत्रकार गरिमा सिंह ने वोट चोरी और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर ज़बरदस्त रिपोर्टिंग करते हुए आइना दिखाया ,
गरिमा सिंह तुम भारत क़ी गरिमा हो , सलाम है आप को ऐसी पत्रकारिता के लिये ,
खुलासा खुलासा बहुत बड़ा खुलासा।
Indian Express के रिपोर्टस के मुताबिक चुनाव आयोग में पूरी तरह से झोल चल रहा है।
आखिर मामला क्या है? आइए बताते हैं।
चुनाव आयोग फिलहाल तीन सदस्यीय है जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार साथ ही सुखवीर सिंह संधू और विवेक जोशी चुनाव आयुक्त हैं।
10 महीनों तक सुखवीर सिंह संधू और विवेक जोशी लिखित में यह बताते रहे कि कुछ फैसले बिना उनकी जानकारी के लिए जा रहे हैं।
यहां तक इन लोगों ने 14 बार आपत्तियां भी दर्ज कराईं,
यही नहीं संधू और जोशी ने फॉर्म 6 में किए गए बदलाव को गैर कानूनी भी बताया और सहमति भी नहीं दी फिर भी बदलाव किए गए।
अगर Indian Express की रिपोर्ट्स सही है तो समझिए चुनाव आयोग में कितना बड़ा खेल चल रहा है।
ये ‘मुद्दा’ बहुत बड़ा है…
चुनाव आयोग फिर से विवादों में, इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के अलावा अन्य जो दो चुनाव आयुक्त हैं सुखवीर सिंह संधू और विवेक जोशी उन्होंने बताया कि 10 महीनों तक वो यह बताते रहे हैं कि कुछ फैसले बिना उनकी जानकारी के लिए जा रहे हैं। यहां तक कि इन लोगों ने 14 बार आपत्तियां भी दर्ज कराईं, यही नहीं संधू और जोशी ने फॉर्म 6 में किए गए बदलाव को गैर कानूनी भी बताया और सहमति भी नहीं दी फिर भी बदलाव किए गए।
बांग्लादेशी के नाम पर लोगों की ज़मीन छीनकर 'अडानी' को दी जा रही है: असम में 1400 मुस्लिम परिवारों की बेदखली पर कांग्रेस नेता सैयद नासिर हुसैन ने कहा.
@NasirHussainINC#Muslim#Adani
📍 उत्तर कोलकाता, पश्चिम बंगाल
45 दिनों से पानी के लिए तरस रही 5,000 की आबादी
ज्योतिनगर कॉलोनी में करीब 5,000 लोग रहते हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, यहां के 5 सार्वजनिक नल करीब 45 दिनों से सूखे पड़े हैं।
पानी के लिए लोगों को गंगा के पानी पर निर्भर रहना पड़ रहा है या फिर महंगे टैंकरों से पानी खरीदना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बार-बार शिकायत के बावजूद अब तक स्थायी समाधान नहीं हुआ है।
आज़म खान और जौहर यूनिवर्सिटी के समर्थन में होने जा रहे प्रोटेस्ट की परमीशान को केंसल कर दिया गया जिसके बाद आज़म खान के समर्थक संसद मार्ग पर इकठ्ठा हुए... इसके बाद क्या हुआ आप खुद देखिए...
@AbdullahAzamMLA#azamkhan#mohammadalijauharuniversity
सहारनपुर मस्जिद की रिपोर्टिंग पर पुलिस एक्शन का सामना कर रहीं पत्रकार पूजा माथुर ने मिल्लत टाइम्स से बातचीत में मौके पर उन्होंने मस्जिद के मलबे में क्या-क्या देखा और वहां की स्थिति कैसी थी।
सुनिए चौंकाने वाली बात:
मेडिकल सामान की कीमतों में लागत और MRP के बीच भारी अंतर का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है। महाराष्ट्र FDA के आयुक्त एवं IAS अधिकारी तुकाराम मुंडे ने इस विषय को उठाते हुए आम आदमी और गरीब मरीजों पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ की ओर ध्यान आकर्षित किया है।
महाराष्ट्र FDA के एक सर्वे में ₹6.75 की सिरिंज की MRP ₹57.20 और ₹11.05 के IV सेट की MRP ₹325 दर्ज की गई। कीमतों में इतना बड़ा अंतर कई गंभीर सवाल खड़े करता है कि आखिर मेडिकल उपकरणों की कीमतें किस आधार पर तय होती हैं और मरीजों से वसूली जाने वाली कीमतों में कितनी पारदर्शिता है?
इलाज पहले ही आम परिवारों के लिए महंगा है। ऐसे में मेडिकल सामान की कीमतों में पारदर्शिता, उचित मूल्य निर्धारण और प्रभावी निगरानी जरूरी है, ताकि किसी मरीज की बीमारी उसके परिवार के लिए अनावश्यक आर्थिक संकट न बन जाए।